एनसीपी नेता शरद पवार के खिलाफ मानहानिकारक ट्वीट को लेकर छात्र की गिरफ्तारी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की है। साथ ही कोर्ट ने सरकार से एक सवाल भी पूछा हैं।
मुंबई: महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव नतीजों के बाद से ही सूबे में सियासी संग्राम जारी है। इन सब के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने शरद पवार (Sharad Pawar) के खिलाफ कथित मानहानिकारक ट्वीट मामले में एक छात्र की गिरफ्तारी पर राज्य की उद्धव सरकार (Uddhav Govt) की खिंचाई की है। कोर्ट ने सरकार से एक सवाल भी पूछते हुए कहा कि क्या वह हर ट्वीट का संज्ञान लेगी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि एनसीपी चीफ खुद नहीं चाहेंगे कि वह छात्र जेल में रहे।
ज्ञात हो कि बंबई उच्च न्यायालय ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चीफ शरद पवार के खिलाफ कथित मानहानिकारक ट्वीट करने के लिए 21 साल के छात्र की गिरफ्तारी के मामले में राज्य की एमवीए सरकार की खिंचाई की है। अदालत ने सरकार से यह भी कहा कि क्या आपत्तिजनक लगने वाले हर ट्वीट का वह संज्ञान लेगी। हाईकोर्ट ने आगे कहा कि शरद पवार खुद नहीं चाहेंगे कि उस छात्र को जेल में रखा जाए।
छात्र निखिल भामरे द्वारा दायर एक याचिका की हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस एस शिंदे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ सुनवाई कर रही थी। इसमें उसके खिलाफ दर्ज मुकदमों को चुनौती दी गई थी। साथ ही छात्र को तुरंत रिहा करने का अनुरोध किया गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने छात्र द्वारा किये गए ट्वीट को संज्ञान लेने के बाद कहा कि इसमें किसी के नाम का जिक्र नहीं है। दरअसल 21 साल के निखिल भामरे को नाशिक पुलिस ने शरद पवार के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट के चलते गिरफ्तार किया था। बाद में मुंबई पुलिस ने उसकी कस्टडी ली थी।