एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने दावा किया है कि उन्हें सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम के शपथग्रहण की जानकारी नहीं थी और अजित पवार गुट के साथ विलय की घोषणा 12 फरवरी को होने वाली थी।
महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के दुखद निधन के बाद अब उनके राजनीतिक उत्तराधिकार और एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर घमासान शुरू हो गया है। जहां शरद पवार ने दावा किया है कि 12 फरवरी को दोनों गुटों के एक होने की घोषणा होने वाली थी, वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर अजित पवार किसी तरह के विलय पर विचार कर रहे होते, तो क्या वे भाजपा से चर्चा किए बिना ऐसा करते, वह हमारे साथ थे।
सीएम फडणवीस ने शरद पवार के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह वर्तमान स्थिति में राजनीति नहीं करना चाहते, लेकिन वह सभी घटनाक्रमों के साक्षी रहे हैं। फडणवीस ने कहा, "अजित दादा और मेरे संबंध ऐसे थे कि वे हर बात मुझसे साझा करते थे। उनके निधन के एक दिन पहले भी हमने करीब एक घंटा बातचीत की थी। अगर विलय जैसी कोई बात अंतिम चरण में होती, तो वे निश्चित तौर पर इस बारे में चर्चा करते। वे राज्य सरकार में पूरी तरह स्थिर थे। अगर अजित पवार वास्तव में शरद पवार गुट के साथ विलय पर चर्चा कर रहे थे, तो क्या इसका मतलब वह एनडीए से बाहर जाने की तैयारी थी? यह सब भ्रम फैलाया जा रहा है और कुछ नहीं।"
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि किसी पार्टी का विलय करना उनका अपना आंतरिक निर्णय है, लेकिन महायुति गठबंधन का हिस्सा होने के नाते ऐसी चर्चा हमसे छिपी नहीं रहती। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि एनसीपी का विलय करना या न करना पूरी तरह उनकी पार्टी का आंतरिक फैसला है। लेकिन उन्होंने अब तक कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले सहयोगी दल होने के नाते हमसे चर्चा की है और मुझे विश्वास है कि वह आगे भी ऐसा ही करेंगे।
सीएम फडणवीस ने यह भी कहा कि हम एनसीपी के साथ गठबंधन में है, इसलिए उनके निर्णय के साथ खड़ा रहना हमारी जवाबदारी है। एनसीपी अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है, हम एनसीपी के फैसले के साथ खड़े है, पहले भी, आज भी और कल भी। एनसीपी नेताओं-कार्यकर्ताओं ने ही सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में आगे बढ़ने का निर्णय लिया है, हमें उनके द्वारा सुझाएं गए किसी भी नाम से न पहले दिक्कत थी और न कभी होगी। सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में भाजपा, एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना और एनसीपी (अजित पवार) घटक दल हैं।
अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने शनिवार को महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। हालांकि, उन्हें अजित पवार का संभाला हुआ वित्त एवं योजना विभाग नहीं दिया गया। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए सीएम फडणवीस ने कहा, "सुनेत्रा जी इस समय जिस गहरे दुख और पीड़ा से गुजर रही हैं, उनसे बजट जैसी बड़ी जिम्मेदारी की अपेक्षा करना सही नहीं है। वह अभी 100% तैयार नहीं है। बजट पेश करना सिर्फ भाषण पढ़ना नहीं, बल्कि बैठकों और गहन तैयारी की लंबी प्रक्रिया है। उनके साथ चर्चा के बाद ही वित्त विभाग फिलहाल मैंने अपने पास रखा है। बजट सत्र के बाद इस पर फिर विचार किया जाएगा।"
इससे पहले, एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने बारामती में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सनसनीखेज दावा किया था। उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों से अजित पवार और जयंत पाटिल के बीच दोनों गुटों को साथ लाने की चर्चा चल रही थी।
वरिष्ठ नेता ने कहा, "अजित दादा, जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे और सुनील तटकरे जैसे नेता सबको एकजुट करने के लिए संवाद कर रहे थे। हमने 12 फरवरी को इस विलय की आधिकारिक घोषणा करने की तारीख भी तय कर ली थी, लेकिन 28 जनवरी को हुए विमान हादसे ने सब कुछ बदल दिया।"
शरद पवार ने शनिवार को दावा किया था कि उन्हें सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि अजित पवार की मौत के कारण एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की प्रक्रिया में बाधा आ सकती है।
अजित पवार के निधन के बाद न सिर्फ दोनों गुटों के नेताओं ने, बल्कि खुद पवार परिवार ने भी सुलह के संकेत दिए थे। शनिवार को अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने गोविंदबाग जाकर शरद पवार से मुलाकात की। इस दौरान सुप्रिया सुले और रोहित पवार भी मौजूद थे। हालांकि, राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद विलय की बातचीत अब ठंडे बस्ते में चली गई है। शरद पवार विमान दुर्घटना के चार दिन बाद मुंबई लौट आये हैं, जबकि शरद पवार का मुंबई में कोई निर्धारित कार्यक्रम नहीं है। उनकी बेटी और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले बजट सत्र में भाग लेने शनिवार को ही दिल्ली के लिए रवाना हो गई थीं।
सुनेत्रा पवार ने भी मुंबई में उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद देर रात पवार परिवार के गृह नगर बारामती लौट आईं। सुनेत्रा फिलहाल राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन की सदस्य नहीं हैं। उनके बारामती विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना है, जो अजित पवार के निधन से खाली हुई है।