
मुंबई. शांतिदूत आचार्य महाश्रमण के सुशिष्य मुनिश्री जिनेशकुमार ठाणा - 2 के सानिध्य में युवा उत्कर्ष शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महिला मंडल के मंगलाचरण के साथ हुई, तत्पश्चात तेयुप अध्यक्ष ने पधारे सभी धर्म प्रेमी भाइयो एवं बहनों का स्वागत किया। मुनि परमानंद ने फरमाया कि जीवन को हर पल सुखी बनाने के लिए आध्यत्मिक साधना की जरूरत है हमें सिर्फ हमारी आत्मा को उज्ज्वल बनाना है, इसके लिए हमे उत्कर्ष बनना है।
मुनि जिनेश कुमार ने अपने वक्तव्य में फरमाया की स्वयं के भीतर संकल्प शक्ति जगाएं। इस संकल्प शक्ति के द्वारा हमें अपने आप को बदलना है इसके लिए उत्कर्ष से मेरी चेतना में भौतिक गुणों का विकास हो उत्कर्ष के दो प्रकार है। एक भौतिक उत्कर्ष एक आध्यात्मिक। मेरी चेतना में नैतिक गुणों का विकास हो इस संकल्प से आध्यात्मिक उत्कर्ष होता है और भौतिक उत्कर्ष लालसाओं को बढ़ाता है।
श्रम करो सफल बनो
1. सहनशील बनो सफल बनो
2. संयम करो सफल बनो 3. श्रम करो सफल बनो 4.सेवा करो सफल बनो 5.स्वभाव बदलो सफल बनो, इस तरह हम उत्कर्ष के द्वारा जीवन बदल सकते है। संजय जैन ने बताया दो दिन के नेरुल प्रवास के दौरान मुनिश्री ने द्विदिवसीय संस्कार निर्माण शिविर का आयोजन भी किया, जिसमें नेरुल सिवुड ज्ञानशाला के लगभग 35 बच्चे प्रतिभागी बने मुनि जिनेश कुमार ने बच्चों को खेल खेल के माध्यम से संस्कार ज्ञान सिखाया साथ ही मुनि परमानंद ने बच्चों अच्छी आदतों को समझाते हुए खाना खाते वक्त न देखने के एक महीने के त्याग बच्चों को करवायें। आध्यत्मिकता का परिचय बच्चों को करवाया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रवीण चंडालिया, देवेंद्र बोहरा, आनंद सोनी, प्रकाश बोहरा, महेंद्र मादरेचा, दिलीप सिंघवी, मुकेश बोहरा, राजेश सामोता, धनराज सोनी, महेंद्र मेहता, अमित धाकड़, भारत कोठरी, ललित सोनी, मनोज बडाला, पंकज बोहरा, जतन इंटोदिया, सतीश बाफना का सराहनीय योगदान रहा।