मुंबई

महाराष्ट्र में सीमा विवाद गहराया, बुलढाणा के 4 गांवों ने की मध्य प्रदेश में विलय की मांग

Maharashtra Karnataka Border Dispute: वर्षों से गांव में मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने आक्रोश में आकर यह निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारियों को निवेदन पत्र भी दिया जा चुका है।
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Updated: 7 Dec 2022, 9:43 AM IST
Eknath Shinde and Devendra Fadnavis
एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस

Maharashtra Buldhana News: महाराष्ट्र में कर्नाटक (Karnataka) के बाद अब मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से जुड़ा सीमा का मुद्दा खड़ा हो गया है। दरअसल मध्य प्रदेश की सीमा पर मौजूद राज्य के बुलढाणा जिले के 4 गांवों के नागरिकों ने बुनियादी सुविधाएं न मिलने के कारण मध्य प्रदेश में शामिल होने का फैसला किया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, वर्षों से गांव में मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने आक्रोश में आकर यह निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारियों को निवेदन पत्र भी दिया जा चुका है। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र के सब्र की परीक्षा न लें... वर्ना... शरद पवार ने कर्नाटक सरकार और केंद्र को दी चेतावनी

मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित बुलढाणा जिले के चार गांवों ने जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध करते हुए मध्य प्रदेश में शामिल होने का फैसला किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन उन्हें बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने में असमर्थ है। इस संबंध में चारों गांवों के नागरिकों ने मंगलवार को अनुविभागीय अधिकारियों से मुलाकात की। इसके बाद राज्य सरकार और बुलढाणा जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

एक तरफ जहां महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद चल रहा है, वहीं बुलढाणा के चार गांवों द्वारा मध्य प्रदेश में विलय की मांग ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। खबर है कि अधिकारी अब इन गांवों का दौरा कर हालात सुधारने की दिशा में कदम बढ़ा रहे है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य प्रदेश की सीमा पर बसे बुलढाणा जिले के दूर-दराज के गांवों तक पहुंचने के लिए कोई सड़क नहीं है। जबकि इन गांवों में बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। इसलिए ग्रामीण जिला प्रशासन पर उनकी घोर उपेक्षा करने का आरोप लगा रहे है।

इससे पहले सोलापुर (Solapur) के अक्कलकोट तालुका (Akkalkot Taluka) की 11 ग्राम पंचायतों ने जिलाधिकारी से बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा और अच्छी सड़कों की समस्या का समाधान करने या संबंधित ग्राम पंचायतों को कर्नाटक में विलय करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

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