मुंबई

‘हम आतंकी हैं क्या?’: IAS तुकाराम मुंढे के फैसले पर भड़के व्यापारी, सरकार को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम

Tukaram Mundhe FDA action: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीआई) कमिश्नर तुकाराम मुंढे के खुले खाद्य तेल की बिक्री पर रोक लगाने के फैसले के खिलाफ खाद्य तेल व्यापारी लामबंद हो गए हैं। नासिक में हुई बैठक में व्यापारियों ने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है और आंदोलन की चेतावनी दी है।
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Aug 24, 2026
Maharashtra Edible Oil Ban FDA Tukaram Mundhe
IAS तुकाराम मुंढे के खिलाफ व्यापारियों ने खोला मोर्चा (Photo: IANS)

Maharashtra Loose Edible Oil Ban: महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे इन दिनों अपनी सख्त कार्रवाई को लेकर चर्चा में हैं। पूरे देश में उनकी कार्रवाई की खूब चर्चा हो रही है। हालांकि, खुले खाद्य तेल (कुकिंग ऑयल) की बिक्री पर रोक लगाने के उनके फैसले को लेकर व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों ने इस फैसले को छोटे कारोबारियों के लिए आर्थिक रूप से नुकसानदायक बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। साथ ही राज्य सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी है।

नासिक में खाद्य तेल व्यापारियों की अहम बैठक

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के खुले खाद्य तेल की बिक्री पर रोक लगाने के फैसले के विरोध में नासिक में खाद्य तेल व्यापारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें राज्य के अलग-अलग जिलों से व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में व्यापारियों ने साफ कहा कि खुले तेल की बिक्री पर अचानक रोक लगाने से छोटे कारोबारियों और उनसे जुड़े हजारों परिवारों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। व्यापारियों ने फैसला किया है कि वे इस निर्णय को अदालत में चुनौती देंगे।

इसके साथ ही राज्य सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। व्यापारियों का कहना है कि यदि इस अवधि में फैसला वापस नहीं लिया गया, तो राज्यभर के खाद्य तेल व्यापारी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष भी उठाने का निर्णय लिया गया है।

'क्या हम आतंकवादी हैं?'

बैठक में व्यापारियों ने प्रस्तावित जुर्माना और जेल की कार्रवाई को लेकर भी तीखी नाराजगी जताई। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि खुले तेल की बिक्री के मामले में 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल की सजा जैसी कार्रवाई का प्रावधान क्यों किया जा रहा है? उन्होंने रोष जताते हुए सवाल किया, 'क्या हम आतंकवादी हैं?'

व्यापारियों का कहना है कि खुले खाद्य तेल की बिक्री का कारोबार वर्षों से चला आ रहा है। अचानक इस पर रोक लगाने से छोटे दुकानदारों और व्यापारियों के सामने बड़ी आर्थिक मुश्किल खड़ी हो जाएगी।

व्यापारियों का दावा- ग्राहकों पर भी असर

व्यापारी संगठनों ने यह भी दावा किया कि खुले तेल की बिक्री से ग्राहकों को फायदा था। उन्हें ब्रांडेड पैक्ड खाद्य तेल की तुलना में कम कीमत पर खाद्य तेल मिल जाता था। यदि खुले तेल की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी जाती है और केवल पैक्ड तेल की बिक्री होती है, तो इसकी कीमत बढ़ सकती है।

इससे आम उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका व्यापारियों ने जताई है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि किसी भी फैसले से पहले व्यापारियों और आम ग्राहकों दोनों के हितों को ध्यान में रखा जाए।

15 दिन बाद आंदोलन की तैयारी

नासिक में हुई बैठक के बाद राज्यभर के खाद्य तेल व्यापारियों में इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई दे रही है। व्यापारियों ने फिलहाल सरकार को 15 दिन का समय दिया है। इस दौरान यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन का स्वरूप क्या होगा, इसे लेकर आगे रणनीति तय की जाएगी।

अब देखना होगा कि व्यापारियों के विरोध और आंदोलन की चेतावनी के बीच राज्य सरकार और एफडीए इस मामले पर क्या रुख अपनाता है। वहीं, व्यापारियों के अदालत का रुख करने के फैसले से यह मामला आने वाले दिनों में और गरमा सकता है।

Updated on:
24 Aug 2026 11:22 am
Published on:
24 Aug 2026 11:09 am