राउत ने अपने लेख में कहा है कि सावरकर ने जेल में रहकर जिस प्रकार से प्रताडऩा झेला है, वैसा पंडित जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी ने नहीं झेला है। जो पीड़ा सावरकर को हुई थी उसका एहसास गांधी और नेहरू को नहीं थी। राउत ने कहा कि राहुल गांधी को सावरकर मामले में अधिक नहीं बोलना चाहिए, उनका जमीन पर रहकर बोलना ज्यादा उचित है।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुंबई. शिवसेना नेता संजय राउत ने वीर सावरकर के मुद्दे पर एक बार फिर कांग्रेस को दुखी करने वाला बयान दिया है। राउत ने पार्टी के मुखपत्र दैनिक सामना में कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी को सावरकर मामले में कदम पीछे लेने की नसीहत दी है। साथ ही नेहरू और गांधी पर भी टिप्पणी कर दी है। जिससे कांग्रेस में एक बार फिर शिवसेना के रवैये को लेकर भूचाल आ गया है। कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने तो ट्वीट पर राउत को जवाब भी दिया है। निरुपम ने कहा कि कांग्रेस को राउत कुछ भी कहें लेकिन गांधी और नेहरू पर टिप्पणी करने की उनकी हैसियत नहीं है।
राउत ने अपने लेख में कहा है कि सावरकर ने जेल में रहकर जिस प्रकार से प्रताडऩा झेला है, वैसा पंडित जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी ने नहीं झेला है। जो पीड़ा सावरकर को हुई थी उसका एहसास गांधी और नेहरू को नहीं थी। राउत ने कहा कि राहुल गांधी को सावरकर मामले में अधिक नहीं बोलना चाहिए, उनका जमीन पर रहकर बोलना ज्यादा उचित है। सावरकर पर राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए इसमें कोई हर्ज नहीं।
राउत के इस बयान पर कांग्रेस के नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि राउत ज्यादा बोलते हैं उन्हें पता नहीं चलता है कि वे क्या बोल रहे हंै। गांधी, नेहरू और सावरकर में तुलना नहीं हो सकती है। गांधी नेहरू की विचारधारा देश हित में थी, जबकि सावरकर की विचारधारा देश के लिए घातक थी। उन्हें जानकारी कम है। सावरकर को काले पानी की सजा नहीं थी, वे ड्यूटी पर थे अंग्रेजों के चापलूस बनकर।
कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने ट्वीट कर राउत को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि शिवसेना सावरकर के बचाव में उतरे इससे हमें कोई आपत्ति नहीं, लेकिन गांधी और नेहरू जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के अपमान बर्दास्त नहीं होगा।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने शिवसेना पर तंज कसते हुए कहा कि शिवसेना सावरकर को लेकर सिर्फ नाटक कर रही है। वास्तव में यदि उसे सावरकर से लगाव होता और उनके विचारधारा पर चल रही होती तो कांग्रेस के साथ नहीं जाती।