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PM मोदी की ‘एक साल तक ये मत करो’ अपील पर स्टैंड-अप कॉमेडियन ने लिए मजे, बोले- मीम मटेरियल है

Stand up comics on PM Modi: पीएम मोदी की 'एक साल तक ये मत करो' अपील पर स्टैंड-अप कॉमेडियन ने काफी मजे लिए और इसे सोशल मीडिया पर नया मीम मटेरियल बताया।

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Varun Grover,

Varun Grover (फोटो सोर्स: X के @Gaurav_Dix अकाउंट द्वारा)

Stand up comics on PM Modi: पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से अगले 1 साल तक सोने की खरीदारी न करने और ईंधन की खपत घटाने की अपील की। इस पर पीएम मोदी का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना था, लेकिन इस अपील ने सोशल मीडिया पर मीम्स की एक नई लहर पैदा कर दी और कई जाने-माने स्टैंड-अप कॉमेडियनों ने इसे अपने नए सेट का हिस्सा बना लिया है।

मोदी की "क्या न करें" वाली लिस्ट को केंद्र में रखा

कॉमेडियन वरुण ग्रोवर ने अपने हालिया स्टैंड-अप सेट में मोदी की "क्या न करें" मीम मटेरियल वाली लिस्ट को केंद्र में रखा और उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि इतनी सारी पाबंदियां और अपीलें याद रखने के लिए भारतीयों को जल्द ही बॉलीवुड फिल्म 'गजनी' के हीरो की तरह अपने शरीर पर टैटू गुदवाने पड़ेंगे।

इतना ही नहीं, वरुण ग्रोवर का मीम सिर्फ सोने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने उस बड़े पैटर्न पर निशाना साधा जिसमें बार-बार आम जनता से बलिदान मांगा जाता है। उनका कहना था कि आम भारती पहले ही नोटबंदी, लॉकडाउन और महंगाई के दौर में देश बचाने में अपने साल लगा चुका है। सेट के लास्ट में उन्होंने चुटीले ढंग से अंबानी परिवार और सोने की शादियों का जिक्र करते हुए पूछा कि ये अपील आखिर किसके लिए है। कॉमेडियन गौरव गुप्ता ने अपने सेट में एक अलग ही कोण से इस मुद्दे को उठाया। ऑडियंस में बैठे एक टैक्स अधिकारी से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस अपील की असली वजह खुलकर बताए, तो मध्यमवर्गीय परिवार सोना खरीदने की बजाय अपना पुराना सोना बेचने को तैयार हो जाएंगे।

मोदी का ये भाषण उनके खुद के पिता जैसा है

इस पर गौरव गुप्ता ने एक मजेदार तुलना की उन्होंने कहा कि मोदी का ये भाषण उनके खुद के पिता जैसा है जो हमेशा "ये मत करो, वो मत करो" कहते हैं, लेकिन फर्क ये है कि उनके पिता कम से कम कारण तो बताते हैं। इसके बाद उन्होंने टाइटैनिक का इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि जब आइसबर्ग की चेतावनी दी जाती है और कैप्टन कहे कि "घबराओ मत, बस अपनी-अपनी लाइफजैकेट पहन लो", तो ये राहत की बात नहीं, बल्कि खतरे की घंटी है। उनके अनुसार, जब सरकार नागरिकों से इस स्तर की स्वैच्छिक कटौती मांगे, तो असली सवाल ये है कि जहाज कितना डूब चुका है।

यहीं ये बात नहीं रूकी, कॉमेडियन पुनीत पनिया ने इस पूरे मामले को और सीधे शब्दों में कहा। उनका मीम्स था कि ये कटौती की अपील उस पुराने फॉर्मूले का हिस्सा है जिसमें देश की जरूरतों से पहले सत्ताधारी पक्ष के फायदे देखे जाते हैं और आम नागरिक को "राष्ट्रभक्ति" के नाम पर चुप रहने को कहा जाता है। इन कॉमेडियनों का तंज सिर्फ हंसी के लिए नहीं है। उनके सेट्स के जरिए जो सवाल उठाए जा रहे हैं, PM मोदी की अपीलें, वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल मीटिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के ज्यादा इस्तेमाल की कोविड काल की याद दिलाती हैं और शायद यही वे तुलना है जो सबसे ज्यादा चुभती है।