
सीएम विजय की फिल्म बनी युवक के लिए प्रेरणा। (फोटो सोर्स: IMDb and arunthementalist_atm)
Vijay movie Thamizhan: हाल ही में तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय ने तमिलनाडु विधान सभा चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल करने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली और अब एक-एक करके आम जनता की बेहतरी के लिए अहम फैसले ले रहे हैं। विजय की ये ऐतिहासिक जीत लोगों के उनके प्रति अपार प्यार को बखूबी दर्शाती है। मगर आज हम विजय के राजनितिक करियर की नहीं बल्कि एक ऐसे फैन की बात करने जा रहे हैं, जिसने उनकी फिल्म के एक सीन से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री राहत कोष में हजारों रुपये जमा कराए। आइये जानते है कौन है ये युवक और ये कौन सी फिल्म है।
चेन्नई के रहने वाले 43 वर्षीय अरुण लोगनाथन ने राज्य के कर्ज को चुकाने में अपना योगदान देते हुए मुख्यमंत्री जन राहत कोष में 22,674 रुपये जमा किए हैं। अपने इस योगदान पर बात करते हुए अरुण कहते हैं, "यह मेरी तरफ से एक छोटा सा प्रयास है। मैंने अक्सर यह कहावत सुनी है कि इस दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, उसके लिए सबसे पहले आपको खुद से शुरुआत करनी पड़ती है। मेरे लिए यह उसी बदलाव का एक हिस्सा है।"
जानकारी के लिए बता दें अरुण पेशे से मेंटलिस्ट हैं। अरुण का मानना है कि देश के नागरिकों को शासन और समाज में जागरूकता फैलाने में भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए। अरुण ने कहा, “मैंने विल्लीवक्कम पोस्ट ऑफिस जाकर अपनी तरफ से धनराशि जमा करने तक की पूरी प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्ड किया है।”
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि फरवरी 2026 में जारी तमिलनाडु के बजट के आधार पर उन्होंने अपने हिस्से की बकाया राशि की गणना की है। अरुण ने आगे कहा, “अगर एक व्यक्ति के हिस्से की पूरी रकम निकाली जाए तो यह 1 लाख रुपये से ज्यादा होगी, लेकिन फिलहाल मैंने 22,674 रुपये जमा करने का फैसला किया।”
अरुण ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय को एक पत्र लिखकर अपने इस योगदान के साथ-साथ 'अपनी व्यक्तिगत कर्ज जिम्मेदारी को पूरा करना (Fulfilling My Individual Debt Responsibility)' टाइटल से एक पत्र भी लिखा, जिसमें उन्होंने इस योगदान के पीछे की मंशा का विस्तार पूर्वक वर्णन किया।
आपको बता दें कि बचपन में पोलियो से पीड़ित रहे अरुण इस लेटर के जरिये वह तमिलनाडु सरकार का ध्यान दिव्यांग लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं और आसान पहुंच उपलब्ध कराने की ओर दिलाना चाहते हैं। वो आगे कहते हैं, “मुझे पता है कि यह राशि सीधे राज्य के कर्जों को चुकाने के लिए नहीं, बल्कि राहत कार्यों के लिए इस्तेमाल की जाएगी, जैसा कि कुछ लोगों ने मेरे सोशल मीडिया पर बताया है। लेकिन अगर इससे दिव्यांग लोगों के लिए आसान सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में थोड़ा भी बदलाव आता है, तो यह उनके जीवन को बेहतर बनाने में मदद करेगा।”
आज अरुण एक मेंटलिस्ट, हिप्नोटिस्ट और माइंड-रीडर हैं, जो रेगुलर बेसिस पर कॉर्पोरेट शो और टीवी प्रोग्राम्स में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। बता दें कि साल 2000 के दशक की शुरुआत में वो लॉ स्टूडेंट थे। डॉ. अंबेडकर लॉ कॉलेज से पढ़ाई करने वाले अरुण हमेशा एक भ्रष्टाचार-मुक्त और कानून का पालन करने वाले समाज का सपना देखते थे।
अभिनेता से नेता बने विजय ने अपने फ़िल्मी करियर में एक से बढ़कर एक सुपर-डुपर हिट फिल्में दीं हैं। और वो कहते हैं ना कि फिल्में अच्छे और बुरे दोनों तरह से लोगों को प्रभावित करती हैं। ऐसी ही एक फिल्म है जिसने अरुण पर सकारात्मक प्रभाव डाला। फिल्म का नाम है 'थमिझन' (Thamizhan)। फिल्म के बारे में बात करते हुए अरुण ने कहा, “कॉलेज के दिनों में ‘थमिझन’ देखने की मेरी बहुत अच्छी यादें हैं और मैं फिल्म के हीरो के विचारों से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता था।” फिल्म के एक सीन ने अरूण पर गहरी छाप छोड़ी।
साल 2002 में आई फिल्म 'थमिझन' के एक महत्वपूर्ण सीन में, फिल्म का हीरो सूर्या (विजय द्वारा अभिनीत किरदार) देश के बकाया कर्ज को चुकाने में अपना योगदान देते हुए भारतीय प्रधानमंत्री को 4,000 रुपये का चेक भेजता है। हाल ही में अभिनेता विजय के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने के बाद, अरुण ने भी वही किया जो फिल्म में विजय थलापति ने किया था। अरुण ने भी राज्य के कर्ज को चुकाने में अपना योगदान देते हुए मुख्यमंत्री जन राहत कोष में 22,674 रुपये जमा किए हैं।
हैरान करने वाली बात ये है कि ये धनराशि एक्टर विजय के फैंस के लिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि ये आंकड़ा अभिनेता से राजनेता बने विजय की जन्मतिथि (22 जून, 1974) से मेल खाती है।
विजय की फिल्म 'थमिझन' में, सूर्या (विजय) का उद्देश्य आम आदमी में बुनियादी कानूनों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। मजीठ द्वारा निर्देशित और बॉलीवुड स्टार प्रियंका चोपड़ा की पहली फिल्म, इस फिल्म में कई ऐसे दृश्य भी हैं जहां नायक सरकारी कर्मचारियों को फटकार लगाता है - जैसे कि एक कंडक्टर जो बस में यात्रा कर रहे एक वरिष्ठ नागरिक को खुले पैसे देने से इनकार करता है, और निगम के अधिकारी जो अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करते हैं जिससे वंचितों का जीवन प्रभावित होता है।
इस वाकये से ये साबित होता है कि फिल्में समाज का आईना होने के साथ-साथ, सामाजिक मुद्दों को उठाते हुए जागरुकता फैलाने का भी काम करती हैं।
Updated on:
15 May 2026 03:46 pm
Published on:
15 May 2026 03:31 pm
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