मुंबई

‘अपने से फोन से MMS भेज रहे’, फर्जी कोर्ट रूम और जज, रिटायर्ड अधिकारी से 1.57 करोड़ की ‘डिजिटल ठगी’

Mumbai News: मुंबई के अंधेरी में ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर 69 वर्षीय रिटायर्ड अधिकारी से 1.57 करोड़ रुपये ठग लिए। आरोपियों ने वीडियो कॉल पर फर्जी कोर्ट रूम दिखाकर पीड़ित को झांसे में लिया।
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Mar 31, 2026
Mumbai cyber fraud digital arrest MMS
एआई फोटो

Mumbai News: आर्थिक राजधानी मुंबई के अंधेरी इलाके से साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। डीएन नगर के रहने वाले एक 69 वर्षीय सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी को शातिर ठगों ने 'डिजिटल अरेस्ट' के जाल में फंसाकर उनसे 1.57 करोड़ रुपये हड़प लिए। ठगों ने न केवल खुद को पुलिस अधिकारी बताया, बल्कि विश्वास दिलाने के लिए वीडियो कॉल पर एक फर्जी कोर्ट रूम तक तैयार कर लिया था।

आपको बता दें कि इस महाठगी का खेल 6 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ और 3 जनवरी 2026 तक चला। इस दौरान पीड़ित को मानसिक रूप से इतना डराया गया कि उन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई, एफडी (FD) और म्यूचुअल फंड तोड़कर ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।

फर्जी 'सुप्रीम कोर्ट' और जज का ड्रामा

ठगों ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए फिल्मी अंदाज में पूरी साजिश रची थी। सबसे पहले पीड़ित को दूरसंचार विभाग के नाम पर फर्जी कॉल कर बताया गया कि उनके नंबर से आपत्तिजनक एमएमएस भेजे जा रहे हैं। इसके बाद खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाया और पीड़ित का नाम मशहूर कारोबारी नरेश गोयल के केस से जोड़कर उसे और ज्यादा भयभीत किया। इतना ही नहीं, ठगों ने वीडियो कॉल पर एक ऐसा कमरा भी दिखाया जो बिल्कुल कोर्ट रूम जैसा लग रहा था और दावा किया कि यह सुनवाई देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की निगरानी में हो रही है, ताकि पीड़ित पूरी तरह उनके झांसे में आ जाए।

ऑटो चालक निकला ठगों का मददगार

मुंबई साइबर सेल ने मामले की शिकायत मिलते ही तकनीकी जांच शुरू की और अशोक पाल नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, अशोक पेशे से ऑटो रिक्शा चालक है, लेकिन वह कमीशन के लालच में साइबर अपराधियों को अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने के लिए देता था। ठगी की एक बड़ी राशि इसी के खाते से होकर गुजरी थी।

ऐसे हुई 1.57 करोड़ की लूट

गिरफ्तारी के डर से घबराए बुजुर्ग अधिकारी ने 8 दिसंबर से 3 जनवरी के बीच कई किस्तों में कुल 1.57 करोड़ रुपये ठगों के 'वेरिफिकेशन' अकाउंट्स में भेज दिए। जब पैसे खत्म होने के बाद ठगों के फोन आने बंद हुए, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

पुलिस की अपील

इस मामले में के मुंबई पुलिस ने नागरिकों को सचेत किया है और कहा है कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस कभी भी वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही जांच एजेंसियां फोन पर पैसे ट्रांसफर करने की मांग करती हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें इस तरह का कोई संदिग्ध कॉल आए, तो घबराएं नहीं और तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

Updated on:
31 Mar 2026 12:56 pm
Published on:
31 Mar 2026 12:56 pm