
अरुण लाल
मुंबई. मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने मोनोरेल को पटरी पर लाने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए 10 नई मोनो रेल का आवेदन मंगाए गए हैं। इन दस ट्रेनों के लिए लगभग चार सौ करोड़ रूपए खर्च होने हैं। इन 10 ट्रेन-सेटों की आपूर्ति के लिए चीन की सीआरआरसी कॉपोरेशन लिमिटेड और बीवायडी ने अपनी बोली लगाई है। दिसंबर से एक नई मोनो रेल आने से यात्रियों को हर पंद्रह मिनट पर एक ट्रेन मिलेगी। अभी 20 मिनट समय लगता है। गौरतलब है कि प्रारंभ में मोनो रेल को 20 किमी कॉरिडोर में चलाने का निर्णय लिया गया था। पर काम पूरा न होने के चलते फरवरी 2014 को एक हिस्से को ही चेंबूर और वडाला डिपो के बीच 8.8 किमी के मार्ग पर शुरू किया गया। बीते तीन मार्च को कई वर्षों की देरी के बाद पूरे 20 किमी को शुरू किया गया। दूसरे चरण के लिए सुरक्षा अनुमति अप्रैल 2018 में मिल गई था। प्राधिकरण के पास ट्रेन न होने के चलते सेवाओं को शुरू नहीं किया गया। प्रारंभ में मोनो रेल चलाने की जिम्मेदारी प्राइवेट ठेकेदार एलटीएसई को दी गई थी, पर वे सुचारु रूप से मोनो नहीं चला सके। इसके बाद 14 दिसंबर को एमएमआरडीए ने ठेकेदार मेसर्स को समाप्त कर दिया। एक मोनो रेल की कीमत 40 करोड़ है। एमएमआरडीए के एक अधिकारी ने बताया कि हमें इन दो चीनी फर्मों से दो बोलियां मिली हैंं। नवंबर के पहले सप्ताह से हम इसकी वित्तीय और तकनीकी जांच शुरू करेंगे। सूत्रों की माने तो इनमें से जिसे ठेका मिलेगा वह वर्क ऑर्डर जारी होने के 15 महीने बाद (4 कार में से प्रत्येक) रेक की आपूर्ति शुरू कर सकेगा। चार डिब्बों वाली मोनो रेल में प्रति कोच की लागत 10 करोड़ रुपये आंकी गई है। एक संपूर्ण मोनों रेल की कीमत लगभग 40 करोड़ होने की संभावना है।
2010 में होना चहिए था पूरा काम
मोनो रेल परियोजना की कल्पना थी कि इससे रोज 30 लाख लोग यात्रा करेंगे। पर ऐसा हो न सका। इसके पीछे सबसे प्रमुख कारण यह है कि मोनोरेल मुंबई में सबसे विलंबित शहरी परियोजना रही है। इसे 2010 तक पूरा 20 किमी तैयार हो जाना था। लेकिन प्रारंभिक चरण में ही समस्याओं के कारण इस परियोजना को दो चरणों चेम्बूर से वडाला डिपो (चरण-1) और वडाला डिपो से जैकब सर्कल (चरण-2) में शुरू करने का निर्णय लिया गया। मार्च 2008 में परियोजना का खर्च प्रारंभिक अनुमान 1,539 करोड़ (करों सहित) था। इसके आधार पर मई 2008 में मोनोरेल परियोजना के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। अगस्त 2008 में जब वित्तीय बोलियां खोली गई थीं। एलटीएसई के 2,460 करोड़ रुपये के अंतिम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया। कंपनी ने नवंबर 2008 से आरंभ किया।
दिसंबर से 15 मिनट पर होगी एक मोनो रेल
एमएमआरडीए दिसंबर से पहले सिस्टम में एक और मोनो रेल शुरू करने की योजना बना रहा है। वर्तमान में प्रधिकरण के पास पांच मोनोरेल हैं। ये मोनोंरेलें चेंबूर और जैकब सर्कल के बीच 20 मिनट के अंतराल में चलती हैं। प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नई मोनोरेल आने से हर 15 मिनट में एक रेल चला सकेंगे।
मोनो रेल के स्टेशन
पहले चरण के स्टेशन चेम्बूर, वी यन पुरव, फर्टिलाइजर टाउनशिप, भारत पेट्रोलियम, मैसूर कॉलोनी, भक्ति पार्क और वडाला डिपो। दूसरे चरण के स्टेशन जीटीबी नगर, अंटाप हिल, आचार्य अत्रे नगर, वडाला ब्रिज, दादर (पूर्व), नायगांव, आम्बेडकर नगर, मिंट कालोनी, लोअर परेल और संत गाडगे महाराज चौक है।