मुंबई के जीटीबीनगर की पंजाबी कालोनी में स्थित एक जर्जर बिल्डिंग में करीब 100 परिवार रहने पर मजबूर है। इस बिल्डिंग में 1200 अपार्टमेंट हैं जिनमें से अधिकांश लोग यहां से जा चुके हैं। लेकिन अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से आज भी 100 परिवार रह रहे हैं।
मुंबई के जीटीबी नगर की पंजाबी कॉलोनी के रहवासियों पर मौत का खतरा 24 घंटे मंडरा रहा है। करीब 100 परिवार जर्जर बिल्डिंग में रहने पर मजबूर है, इन लोगों की जिंदगी जोखिम से भरा है क्योंकि वे आर्थिक परिस्थिति खराब होने की वजह से ये कहीं और एक फ्लैट नहीं ले सकते हैं। इसमें 1,200 अपार्टमेंट हैं और अधिकांश लोग खतरे को देखते हुए यहां से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं।
साल 1958 और 1962 के बीच पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के शरणार्थियों के लिए बनाया गया ये चार मंजिला इमारत में हमेशा रौनक रहा करती थी। जैसे-जैसे समय बितता गया वैसे-वैसे इमारत में दरारें पड़ने लगीं, उसके पुनर्विकास करने के प्रयास किसी न किसी वजह से आगे नहीं बढ़ सका। इससे भवनों की स्थिति और भी खराब हो गई। यह भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi 2022: महाराष्ट्र में गणेशोत्सव को लेकर शानदार तैयारियां, पुणे में कैदियों ने बनाए इको फ्रेंडली गणपति
साल 2020 में बीएमसी ने काट दिया था बिजली और पानी कनेक्शन
अगस्त महीने में बोरीवली में गीतांजलि इमारत के पांच परिवारों के इमारत छोड़ने के बाद से पंजाबी कॉलोनी ने फिर से सबका ध्यान खींच लिया है। शहर में 350 से अधिक खतरनाक इमारतें हैं। साल 2020 में बीएमसी ने पंजाबी कॉलोनी में पानी और बिजली की आपूर्ति काट दी।
इस इमारत के तीसरी मंजिल पर रहने वाली सुमन कोचड़ ने बताया कि उनके पति अशोक लकवाग्रस्त हैं। वह पिछले तीन सालों से बिस्तर पर पड़े है। कुछ साल पहले हमारी बेटी की शादी हुई थी। सुमन ने कहा कि अब हमारे पास इनकम का कोई दूसरा जरिया नहीं है और हम 15-20 हजार का किराया नहीं भर सकते है। हम बहुत परेशान हैं लेकिन हम इस जगह को नहीं छोड़ सकते।
इसी इमारत में हरमिंदर सिंह अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहते हैं। उनकी भी तबीयत ठीक नहीं रहती है और आर्थिक रूप से भी वे तनावग्रस्त हैं, हरमिंदर ने बताया कि उनका बचपन इस घर में गुजरा हैं। जबकि हमारे सभी पड़ोसी पहले ही जा चुके हैं। कोई भी ऐसी परिस्थितियों में नहीं रहना चाहता लेकिन अधिकारियों को हमें जाने के लिए कहने से पहले सोचना होगा। हम इतना किराया कैसे भरेंगे?
हरमिंदर जैसे कई लोगों ने तत्काल किराए या वैकल्पिक आवास की मांग प्रशासन से की है। बीएमसी द्वारा इमारतों की जर्जर हालत का हवाला देते हुए पंजाबी कॉलोनी को नोटिस जारी करने के दो साल बाद इंद्रपाल बागी इंदौर चले गए। यहां के स्थानीय नेता ने इन लोगों मदद की, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।