
उल्हासनगर. कैंप चार के पवई क्षेत्र में बना है शिव विश्व शांति धाम मंदिर जो न केवल आस्था का बड़ा उदहारण है बल्कि ऐसा रमणीक स्थल है जहां दर्शन करने के बाद वापस लौटने का मन नहीं करता। एक बार कोई दर्शन हेतु जाता है तो उसे बार बार मंदिर में जाने की इ'छा होती है। यह मंदिर बोट क्लब के ठीक सामने एक संकरी गली के अंदर है परन्तु जहां मंदिर बना हुआ है वहां विशाल प्रांगण है। मंदिर में अंदर जाने पर दुर्गा माता राधा कृष्ण और अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां है। उसके बाद वैष्णौ देवी की तरह गुफा बानी हुयी है जिसमें मां लक्ष्मी मां सरस्वती और महाकाली के दर्शन होते हैं। जहां गुफा समाप्त होती है वहां से ऊपर जाने के लिए सीढि़ां हैं। सीढिय़ां पार करने पर जो नजारा दीखता है वह अद्भुत और आकर्षक है। यहां देवों के देव महादेव की विशालकाय प्रतिमा है। भगवान शिव यहां ध्यानमुद्रा में विराजमान हैं। यही प्रतिमा भक्तों की आस्था की प्रतीक है। इस मंदिर में महाशिवरात्रि पर मेले जैसा माहौल होता है। उल्हासनगर के आलावा गांव और आसपास के कस्बों से लोग दर्शन करने आते हैं। इसी दिन भोलेनाथ की जटाओं से गंगा मैया का पवित्र जल निकलता है। चकाचौंध करने वाली रौशनी शिव जी के मुख को रौशन करती है। मंदिर के बाहर एक बड़ा पिलर है जिसमें दर्शाया गया है भगवान अपनी शक्ति से धरती को चला रहे हैं। इसके आलावा मानसरोवर भी है और नागशैया पर विराम करते भगवान विष्णु भी। इस मंदिर की एक रोचक कथा है। जब इस मंदिर का निर्माण कराने के लिए तैयारी की जा रही थी तब एक स्थानीय रसूख वाले व्यक्ति ने इसका विरोध किया। जब निर्माणकर्ता दीपक गिडवानी ने उसे बताया कि उसकी बेटी ने सपने में देखा है कि हम मंदिर निर्माण कर रहे हैं तो उसकी इ'छा पूर्ण करने के लिए मंदिर बनाया जा रहा है जहां भगवान शिव की विशालकाय प्रतिमा होगी। भगवान शिव का नाम सुनकर वह रसूख वाला आदमी मंदिर बनने के लिए राजी हो गया क्यूंकि वह स्वंयम शिव भक्त था। फिर जब मंदिर बनकर तैयार हुआ तो लोगों को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उल्हासनगर में ऐसा भव्य मंदिर है। तब से यहां भक्तगण बड़ी तादाद में आते हैं। श्रवण माह में भगवान शिव की आराधना तो होती ही है बल्कि हर सोमवार यहां भक्तों का तांता लगता है।