
NEET UG 2026 Late Entry: मुंबई के परेल इलाके में स्थित महर्षि दयानंद कॉलेज के बाहर उस समय भारी तनाव फैल गया, जब दो नीट उम्मीदवारों को लेट आने के कारण प्रवेश देने से साफ मना कर दिया गया। कॉलेज प्रशासन ने एनटीए के नियमों का सख्त हवाला देते हुए ठीक 1:30 बजे मुख्य गेट बंद कर दिया। परीक्षा से वंचित रहने वाले छात्रों में एक कुर्ला और दूसरा मुंबई के पास डोंबिवली इलाके का रहने वाला है। सालभर की मेहनत पर पानी फिरता देख छात्रों और उनके परिजनों ने कॉलेज के बाहर जमकर हंगामा किया और मिन्नतें कीं, लेकिन प्रशासन ने गेट नहीं खोला।
इसी तरह का एक बेहद भावुक और तनावपूर्ण वाकया कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में देखने को मिला, जहां महज 2 मिनट की देरी ने चार छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर 1:29 बजे केंद्र पर लाउडस्पीकर से आखिरी मिनट की घोषणा की गई और ठीक 1:30 बजे गाइडलाइंस के अनुसार मुख्य द्वार को ताला लगा दिया गया।
दोपहर 1:32 बजे तीन छात्राएं दौड़ते हुए केंद्र पर पहुंचीं। मुख्य गेट बंद देखकर वे बदहवास हो गईं और सुरक्षा घेरे की रेलिंग तथा दीवार लांघकर कॉलेज परिसर के अंदर कूद गईं। हालांकि, अंदर जाकर उन्होंने देखा कि मुख्य परीक्षा हॉल का आंतरिक दरवाजा भी लॉक हो चुका था, जिसके कारण उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिल सकी। इनके अलावा एक चौथा छात्र भी महज एक मिनट की देरी से एंट्री से चूक गया।
परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद अभिभावकों ने रोते हुए प्रशासन पर गुस्सा निकाला। परिजनों का आरोप है कि शहर में कांग्रेस की एक रैली के कारण सड़कें पूरी तरह से जाम थीं और ट्रैफिक को संभालने के लिए कोई पुलिसकर्मी तैनात नहीं था। एक अभिभावक ने कहा कि हम घर से समय पर निकले थे, लेकिन जाम ने सब बर्बाद कर दिया। हमारे बच्चों का पूरा भविष्य दांव पर लगा है, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने हमारी एक न सुनी।'
दूसरी ओर, परीक्षा अधिकारियों का कहना है कि वे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नियमों से बंधे हैं। एनटीए के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट है कि दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी परिस्थिति में किसी भी उम्मीदवार को केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जा सकता। गौरतलब है कि देश भर में कड़ी सुरक्षा और कड़े नियमों के बीच नीट-यूजी परीक्षा का आयोजन किया गया, लेकिन इन घटनाओं ने एक बार फिर ट्रैफिक और परीक्षा प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।