
Orphan Children Scheme in Maharashtra: महाराष्ट्र की शिंदे-फडणवीस सरकार ने राज्य के अनाथ बच्चों की हित में बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने अनाथ बच्चों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में एक फीसदी का आरक्षण देने का निर्णय किया है। एक आदेश में कहा गया है कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले माता-पिता दोनों को खो चुके बच्चे रोजगार में आरक्षण के पात्र होंगे।
अनाथों के लिए नौकरियों में आरक्षण रिक्तियों की कुल संख्या और प्रवेश के लिए बाकि जगह की संख्या के आधार पर दिया जाएगा। अनाथों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। एक अनाथालयों या सरकारी संस्थानों में पंजीकृत बच्चे हैं और दूसरे वे बच्चे जो सरकारी संस्थानों से बाहर हैं या रिश्तेदारों द्वारा उनकी देखभाल की जाती है। गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, लगातार 5 दिन बारिश हुई तो मानी जाएगी प्राकृतिक आपदा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना वायरस महामारी के दौरान लगभग 800 बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया। इसको लेकर 2021 में तब के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने अनाथों के आरक्षण के कोटे को मंजूरी दी थी। महाराष्ट्र के विभिन्न अनाथालयों में चार हजार से अधिक अनाथ बच्चे रहते हैं।
माता-पिता, भाई-बहन, नजदीकी रिश्तेदार, गांव, तालुका की जानकारी के बिना अनाथालयों में रहने वाले बच्चों को 'ए' की श्रेणी में रखा गया है। जिन बच्चों ने माता-पिता दोनों को खो दिया है, जिसके पास कोई जाति प्रमाण पत्र नहीं है और अनाथालय में रह रहे है, उन्हें श्रेणी 'बी' में शामिल किया गया है।
वहीँ, जिन बच्चों के माता-पिता दोनों की मृत्यु 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले हो गई हो, लेकिन उनका पालन-पोषण रिश्तेदारों ने किया हो, वे 'सी' श्रेणी में आएंगे। अनाथ बच्चे अनुसूचित जाति मानदंड के आधार पर आयु, ट्यूशन और परीक्षा शुल्क में छूट के पात्र होंगे। लेकिन आदेश में यह भी कहा गया है कि 'सी' श्रेणी के अनाथों को शिक्षा में सभी रियायतें मिलेंगी, लेकिन वे सरकारी नौकरी में आरक्षण के लिए पात्र नहीं होंगे। यह भी पढ़े-पुणे-सोलापुर नेशनल हाईवे पर श्रद्धालुओं की बस पलटी, 1 की मौत, 30 जख्मी