
महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ी एक अहम खबर है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और उद्धव ठाकरे के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक संजय राउत ने स्वास्थ्य कारणों से अगले दो महीने तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहने की घोषणा की है। उनका यह फैसला ऐसे समय आया है जब मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC Election) चुनाव की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संजय राउत के शीघ्र स्वस्थ होने और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की है।
संजय राउत ने शुक्रवार को एक भावनात्मक पत्र जारी करते हुए अपने साथियों, परिवार और समर्थकों को बताया, “आप सभी ने मुझे हमेशा प्यार और भरोसा दिया है। लेकिन अचानक कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। इलाज चल रहा है, और मैं जल्द ही ठीक हो जाऊंगा। डॉक्टरों की सलाह पर मुझे कुछ समय आराम की जरूरत है। मुझे बाहर जाने और भीड़-भाड़ में जाने से मना किया गया है। इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है।“
राज्यसभा सांसद राउत ने अपने समर्थकों से कहा कि उन्हें विश्वास है कि वे शीघ्र स्वस्थ होकर दोबारा सक्रिय राजनीति में लौटेंगे। उन्होंने पत्र में आगे कहा, “मुझे यकीन है कि मैं जल्द ही ठीक होकर नए साल में फिर आप सबसे मिलूंगा। तब तक अपना प्यार और आशीर्वाद ऐसे ही बनाए रखें।”
संजय राउत का यह निर्णय ऐसे वक्त में आया है जब विपक्षी दल मुंबई में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर 1 नवंबर को बड़ा मार्च निकालने जा रहे हैं। इस मार्च का नेतृत्व एनसीपी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे, कांग्रेस और वामपंथी दलों के वरिष्ठ नेता करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा सांसद संजय राउत का अस्थायी रूप से सक्रिय राजनीति से दूर होना उद्धव ठाकरे गुट के लिए एक झटका है। वे न केवल शिवसेना (यूबीटी) के सबसे प्रखर प्रवक्ता माने जाते हैं, बल्कि महाविकास आघाड़ी (MVA) की रणनीति और संवाद का भी अहम चेहरा रहे हैं।
अब उद्धव ठाकरे गुट को आने वाले बीएमसी चुनाव से पहले अपने अभियान और रणनीति को नए सिरे से तैयार करना होगा, क्योंकि संजय राउत की अनुपस्थिति पार्टी की राजनीतिक आक्रामकता और जनसंपर्क पर सीधा असर डाल सकती है।