मुंबई

सातारा जिला बैंक चुनाव में 42 साल बाद बड़ा उलटफेर, शिंदे के मंत्री शंभूराज देसाई की जीत, भाजपा को झटका

Maharashtra Politics: सातारा जिला बैंक चुनाव में शिवसेना (शिंदे गुट) नेता शंभूराज देसाई ने भाजपा के सत्यजितसिंह पाटणकर को मात दे दी है। इसके साथ ही करीब 45 साल बाद पाटण में देसाई गुट की वापसी हुई है।
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Updated: 3 Nov 2026, 12:42 PM IST
bjp setback in Satara District Bank Election
शंभूराज देसाई ने भाजपा को दिया झटका (Photo: FB Shambhuraj Desai)

Shiv Sena Vs BJP: महाराष्ट्र में सातारा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के चुनाव नतीजों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। सातारा जिले के पाटण सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र में राज्य के मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री शंभूराज देसाई ने बाजी मार ली है। उन्होंने अपने पारंपरिक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और भाजपा नेता सत्यजीतसिंह पाटणकर को हराकर जीत दर्ज की है। इस मुकाबले में शंभूराज देसाई को 58 वोट मिले, जबकि सत्यजीतसिंह पाटणकर को 46 वोटों से संतोष करना पड़ा।

इस जीत को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए भी अहम माना जा रहा है। करीब 42 साल बाद पाटण में जिला सहकारी बैंक के संचालक पद पर देसाई गुट की वापसी हुई है। नतीजे के बाद देसाई समर्थकों ने जश्न मनाया।

वहीं दूसरी ओर, सांगली जिला बैंक के चुनाव में तासगांव सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व सांसद संजय काका पाटील ने महज एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने पूर्व विधायक सुमन ताई पाटील को शिकस्त दी। सुमन ताई पाटील महाराष्ट्र के दिवंगत नेता आर. आर. पाटिल की पत्नी हैं।

पाटण में देसाई और पाटणकर के बीच था कड़ा मुकाबला

सातारा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के पाटण विकास सेवा सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव काफी प्रतिष्ठा का विषय बन गया था। इस सीट पर शंभूराज देसाई और भाजपा नेता सत्यजीतसिंह पाटणकर आमने-सामने थे। दोनों नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों के साथ पूरी ताकत लगाई थी।

आखिरकार मतगणना में शंभूराज देसाई को 58 वोट मिले और उन्होंने 12 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। पाटणकर को 46 वोट मिले। इस नतीजे को भाजपा के लिए झटका माना जा रहा है। इस जीत में शंभूराज देसाई के बेटे यशराज देसाई की भी अहम भूमिका बताई जा रही है।

42 साल बाद देसाई गुट की वापसी

पाटण तालुका में शंभूराज देसाई का राजनीतिक प्रभाव रहा है, लेकिन जिला सहकारी बैंक में अब तक पाटणकर गुट का दबदबा माना जाता था। इस बार देसाई ने इस समीकरण को बदलते हुए बैंक के संचालक पद पर जीत दर्ज की है। करीब 45 साल बाद देसाई गुट की इस वापसी को स्थानीय सहकार और राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इससे पहले जिला परिषद चुनाव के दौरान भी शंभूराज देसाई और सत्यजीतसिंह पाटणकर गुट के बीच राजनीतिक मुकाबला देखने को मिला था। अब जिला बैंक के पाटण निर्वाचन क्षेत्र में मिली जीत से देसाई ने स्थानीय राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत की है।

Updated on:
3 Nov 2026, 12:42 PM IST
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