इस फंड का इस्तेमाल एसआरए की अटकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए किया जाएगा। 541 एसआरए परियोजनाएं तैयार हैं, करीब 370 परियोजनाएं हैं जो अटकी हुई हैं। सरकारी तनाव कोष ऐसी अटकी हुई परियोजनाओं को पुनर्जीवित करेगा और झुग्गीवासियों को लाभान्वित करने के साथ-साथ डेवलपर्स की मदद करेगा।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुंबई.महाराष्ट्र सरकार के आवास मंत्री जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि एसआरए परियोजनाओं के लिए एक विशिष्ट तनाव कोष होगा। जिससे एसआरए परियोजना को रिवीव किया जाएगा। राज्य सरकार 700-1000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी, शेष धनराशि एसबीआई बैंकों से ली जाएगी।
जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि इस फंड का इस्तेमाल एसआरए की अटकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए किया जाएगा। 541 एसआरए परियोजनाएं तैयार हैं, करीब 370 परियोजनाएं हैं जो अटकी हुई हैं। सरकारी तनाव कोष ऐसी अटकी हुई परियोजनाओं को पुनर्जीवित करेगा और झुग्गीवासियों को लाभान्वित करने के साथ-साथ डेवलपर्स की मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि एसआरए के पे रोल पर काम करने वाले सुरक्षा कर्मियों की मदद से प्राधिकरण झुग्गियों के बचे हुए झोंपड़ियों को हटा देगा। एक बार डेवलपर ने 70 प्रतिशत झोपड़ियों को साफ कर दिया और शेष गैर सहकारी झुग्गीवासियों के साथ समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ज्यादातर परियोजनाओं में 95 प्रतिशत झोपड़पट्टी वाले खाली करते हैं और शेष 5 प्रतिशत बाधा उत्पन्न करते हैं। इस कदम से उन डेवलपर्स को मदद मिलेगी जो 70 प्रतिशत सहमति के बावजूद गैर-सहकारी किरायेदारों की समस्या का सामना करते हैं। इसके अलावा न्यायालयों के स्टे अलावा, परियोजना का काम किसी और की वजह से नहीं रुकेगा ।
उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) के तहत सरकार ने कुछ प्रक्रियाओं को भी कम कर दिया है। उदाहरण के लिए एक फाइल जो छह टेबल पर जाती थी अब।उसे तीन अधिकारियों के पास जाना होगा। सरकार ने पुनर्विकास परियोजना को आगे बढ़ाते हुए डेवलपर्स द्वारा झुग्गीवासियों को किराए का भुगतान करने का भी फैसला किया है।
मुंबई में बांद्रा तक का किराया 12,000 रुपए प्रति माह होगा। बांद्रा से अंधेरी / घाटकोपर तक प्रति माह 10,000 रुपए और उससे आगे 8,000 रुपए प्रति माह होगा। एसआरए ने पुनर्वास परियोजनाओं को पूरा करने के लिए विभिन्न डेवलपर्स को कुल 1856 एलओआई दिए हैं। सभी एसआरए परियोजनाओं से 5.07 लाख घरों के निर्माण की उम्मीद है, जिनमें से 3.80 लाख घर निर्माणाधीन हैं, जबकि शेष निर्माण किए गए हैं।