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वेटर की बेटी से संसद तक का सफर: जानें कौन हैं ज्योति वाघमारे, जिन्हें शिंदे भेज रहे राज्य सभा

PhD होल्डर डॉ. ज्योति वाघमारे पिछले 15 वर्षों से सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह मूल रूप से महाराष्ट्र के सोलापुर की रहने वाली हैं।

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Mar 05, 2026
एकनाथ शिंदे ने डॉ. ज्योति वाघमारे को बनाया उम्मीदवार (Photo: X/Dr Jyoti Waghmare)

महाराष्ट्र में राज्य सभा चुनाव को लेकर तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो गई है। राज्य की सात राज्य सभा सीटों के लिए 16 मार्च को होने वाला चुनाव अब निर्विरोध होगा। भाजपा, एनसीपी (सुनेत्रा पवार) और विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (MVA) पहले ही अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुके थे। वहीं सबसे ज्यादा सस्पेंस इस बात को लेकर थी कि शिवसेना (एकनाथ शिंदे) की ओर से किसे उम्मीदवार बनाया जाएगा।

अब इस पर विराम लगाते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने डॉ. ज्योति वाघमारे (Dr. Jyoti Waghmare) के नाम की घोषणा कर दी है। कई चर्चित और बड़े नामों को पीछे छोड़ते हुए उन्हें राज्य सभा के लिए उम्मीदवार बनाया गया है।

महाराष्ट्र की सभी 7 सीटों पर इनकी जीत पक्की!

महाराष्ट्र से राज्य सभा की सात सीट अगले महीने रिक्त हो रही हैं। जिसमें से भाजपा के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन छह उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति में है। इसमें भाजपा के चार, जबकि एनसीपी और शिवसेना के एक-एक उम्मीदवार शामिल है। वहीँ, आवश्यक संख्या बल नहीं होने के कारण एमवीए से सिर्फ शरद पवार को राज्य सभा भेजा जा रहा है।

भाजपा ने महाराष्ट्र से आगामी राज्य सभा चुनाव के लिए बुधवार को चार उम्मीदवारों की घोषणा की, जिनमें केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, भाजपा महासचिव विनोद तावड़े, नागपुर की पूर्व मेयर माया चिंतामन इवनाते और विधान परिषद के पूर्व सदस्य रामराव वाडकुटे शामिल हैं।

जबकि शिवसेना शिंदे गुट ने ज्योति वाघमारे और एनसीपी ने अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार (Parth Pawar) को राज्य सभा का टिकट दिया है। विपक्षी खेमे से केवल एनसीपी (एसपी) प्रमुख व वर्तमान राज्य सभा सांसद शरद पवार को फिर से मौका दिया गया है, जिन्हें कांग्रेस और उद्धव की शिवसेना (UBT) का समर्थन प्राप्त है। राज्य सभा चुनाव में इन सभी सात उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचित होना निश्चित है।

कौन हैं डॉ. ज्योति वाघमारे

डॉ. ज्योति वाघमारे मूल रूप से महाराष्ट्र के सोलापुर जिले की रहने वाली हैं और उन्हें एक तेज-तर्रार महिला नेता के रूप में जाना जाता है। पिछले करीब 15 वर्षों से वे सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। अप्रैल 2023 में उन्होंने शिवसेना में प्रवेश किया था। फिलहाल वे पार्टी की राज्य प्रवक्ता और धाराशिव जिला संपर्क प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

शिवसेना में हुए ऐतिहासिक बगावत के बाद उन्होंने विभिन्न टीवी डिबेट और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिंदे गुट का पक्ष आक्रामक तरीके से रखा, जिससे उन्हें व्यापक पहचान मिली।

संघर्ष भरी पारिवारिक पृष्ठभूमि

डॉ. ज्योति वाघमारे का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता नागनाथ वाघमारे दलित पैंथर आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता थे। परिवार के पालन-पोषण के लिए उन्होंने होटल में वेटर और निर्माण मजदूर के रूप में भी काम किया था। उनकी सामाजिक सक्रियता को देखते हुए सोलापुर के लोगों ने उन्हें नगरसेवक के रूप में भी चुना था।

पिता की इसी संघर्षभरी विरासत को आगे बढ़ाते हुए ज्योति वाघमारे ने मानवाधिकार आंदोलन और आंबेडकरी विचारधारा से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की।

शिक्षा और भाषाओं पर मजबूत पकड़

शिवसेना नेता ज्योति वाघमारे शिक्षा के क्षेत्र में भी बेहद मेधावी रही हैं। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। वह बारहवीं में पुणे मंडल में पिछड़ा वर्ग श्रेणी में प्रथम स्थान पर थीं। इसके अलावा उन्हें हिंदी, मराठी, अंग्रेजी, तेलुगू और कन्नड़ सहित पांच भाषाओं का ज्ञान है।

शिवसेना की आक्रामक प्रवक्ता

शिवसेना में शामिल होने के बाद डॉ. वाघमारे ने कम समय में ही अपनी अलग पहचान बना ली। वे पार्टी की तेज-तर्रार प्रवक्ता के रूप में जानी जाती हैं और राजनीतिक विरोधियों के आरोपों का मुखर जवाब देने के लिए चर्चित हैं।

पार्टी के दसरा मेला जैसे बड़े कार्यक्रमों में उनके भाषणों ने काफी ध्यान आकर्षित किया था। इसके अलावा उन्हें महाराष्ट्र के इतिहास, बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों और भारतीय संविधान का गहरा ज्ञान है। उन्होंने कुछ समय तक न्यूज एंकर के रूप में भी काम किया और सोलापुर के कॉलेज में 10 साल से अधिक समय तक प्रोफेसर के रूप में पढ़ाया है। अब ज्योति वाघमारे का अनुभव संसद भवन में महाराष्ट्र की आवाज बनकर गूंजेगा।

शिंदे का बड़ा सियासी दांव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. ज्योति वाघमारे को राज्य सभा भेजकर एकनाथ शिंदे ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। एक उच्च शिक्षित दलित महिला को मौका देकर उन्होंने सर्वसमावेशी राजनीति का संदेश दिया है। साथ ही उनके जरिए पश्चिम महाराष्ट्र में शिवसेना की पकड़ मजबूत करने की रणनीति भी मानी जा रही है।

Updated on:
05 Mar 2026 05:14 pm
Published on:
05 Mar 2026 05:13 pm
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