मुजफ्फरनगर

2013 में मुजफ्फरनगर के इन गांवों मची थी तबाही, उत्तराखंड त्रासदी के बाद फिर अलर्ट जारी

Highlights - सीएम योगी के आदेश के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट - 2013 में आई तबाही में जलमग्न होने वाले मुजफ्फरनगर के गांवों के दौरे पर अधिकारी - आधा दर्जन से ज्यादा गांव गंगा के किनारे बसे

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुजफ्फरनगर. उत्तराखंड में ग्लेशियर के टूटने से भारी तबाही के संकेत मिल रहे हैं। इसके चलते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में भी अलर्ट जारी कर दिया है, ताकि गंगा के आसपास के इलाकों में कोई किसी तरह की क्षति ने हो। इसके लिए जिला प्रशासन तमाम तरह की व्यवस्थाओं में जुट गया है। मुजफ्फरनगर में जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे ने बाढ़ की आशंकाओं को देखते हुए कंट्रोल रूम 24 घंटे के लिए खुलवा दिया है, ताकि किसी भी तरह की सूचना मिलते ही संभावित क्षेत्र में समय पर मदद पहुंचाई जा सके।

अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व आलोक शर्मा ने बताया कि उत्तराखंड में ग्लेशियर के टूटने से मुजफ्फरनगर में अलर्ट किया गया है। गंगा के किनारे लगभग दो दर्जन गांव के प्रभावित होने की संभावना है, जिसमें आधा दर्जन गांव गंगा के किनारे हैं। अगर पानी की स्थिति ज्यादा बढ़ती है तो इन गांव को खाली कराए जाने को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं।

गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर में गंगा के किनारे थाना पुरकाजी और भोपा के क्षेत्रों से लेकर मीरापुर रामराज थाना क्षेत्रों तक लगभग 2 दर्जन गांव हैं, जिसमें आधा दर्जन से ज्यादा गांव गंगा के किनारे बसे हैं। यहां पानी आने की संभावना ज्यादा रहती है। क्योंकि 2013 में केदारनाथ में आई तबाही के बाद मुजफ्फरनगर के आधा दर्जन से भी ज्यादा गांव जलमग्न हो गए थे। ग्रामीणों व किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। अलर्ट जारी होने के बाद जिला प्रशासन की कई टीम प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के लिए निकल चुकी हैं, जिसमें पुरकाजी के शेरपुर खादर से थाना भोपा क्षेत्र के मजलिशपुर तौफीर और गंगा बैराज पर अधिकारियों ने अपनी नजर गड़ा ली है।

Published on:
07 Feb 2021 04:22 pm
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