नागौर

सरकारी स्कूलों में पासबुक पर प्रतिबंध, मिलने पर शिक्षक-विद्यार्थी के साथ संस्था प्रधान पर कार्रवाई

-आदेश जारी, शिक्षा की गुणवत्ता में आ रही गिरावट को देखते हुए लगा बैन-सरकारी स्कूलों के अधिकांश टीचर भी इसी से करा रहे थे पढ़ाई -इंटेलिजेंस सर्वे में पिछड़ रहे थे बच्चेप्रताप कोई पासबुक का लोगो देखकर लगा लेना या कोई िवजुअल सरकारी स्कूलों में पासबुक पर प्रतिबंध, मिलने पर शिक्षक-विद्यार्थी ही नहीं संस्था प्रधान की भी खैर नहीं
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Nov 18, 2023
 प्रतिबंध
सरकारी स्कूलों में पासबुक के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। शिक्षक अथवा किसी भी विद्यार्थी के पास पासबुक मिलने पर कड़ी कार्रवाई होगी। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।

ग्राउण्ड रिपोर्ट

नागौर. सरकारी स्कूलों में पासबुक के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। शिक्षक अथवा किसी भी विद्यार्थी के पास पासबुक मिलने पर कड़ी कार्रवाई होगी। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।

सूत्रों के अनुसार पासबुक किसी भी कक्षा अथवा विषय की हो, सब पर प्रतिबंध है। विद्यार्थियों में रटने की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आने के कारण यह निर्णय किया गया है। विषय की समझ विकसित करने के उद्देश्य से अब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पासबुक का उपयोग नहीं हो सकेगा। स्कूल में अगर किसी टीचर अथवा स्टूडेंट के पास पासबुक मिली तो उसके खिलाफ एक्शन होगा। सभी स्कूलों के संस्था प्रधान को इस संबंध में अवगत करा दिया है।

सूत्र बताते हैं कि पिछले कई सालों से सरकारी स्कूल के काफी टीचर भी पासबुक के सहारे बच्चों को पढ़ाने लगे थे। यह केवल दसवीं-बारहवीं ही नहीं अन्य कक्षाओं का भी चलन बन गया था। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई का मूल आधार पासबुक बन गई थीं। पुस्तकों का उपयोग धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा था। शिक्षक हो या विद्यार्थी, हर कोई पास बुक पर निर्भर होता जा रहा था।

पिछड़ रहे थे बच्चे

पासबुक से पढ़ाई के कारम नेशनल सर्वे में प्रदेश के विद्यार्थी पिछड़ रहे थे। विद्यार्थियों में रटने की आदत बढ़ती जा रही थी। इंटेलिजेंस सर्वे और स्टेट लेवल इंटेलिजेंस सर्वे के प्रश्न बुद्धिमत्ता एवं तार्किकता से जुड़े होते हैं। ऐसे प्रश्नों का जवाब पासबुक पढ़कर नहीं दिए जा सकते हैं। बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स पासबुक के आदी हो गए हैं, जिससे बच्चे विषय को समझ नहीं पाते। वे बौद्धिक सवालों के जवाब नहीं दे पाते। इसी कारण राजस्थान नेशनल इंटेलिजेंस सर्वे में पीछे रह जाते हैं। असल में पासबुक का दायरा सीमित होता है, ना पूरी सामग्री होती है ना ही इससे ज्ञान मिलता है। नंबर लाने का शॉर्ट कट बन चुकी पासबुक वास्तविक ज्ञान से बच्चों को दूर कर रही थी। बच्चों की रचनात्मक गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ रहा था।

टीचर किस लोभ में

सूत्रों का कहना है कि पासबुक के भी कई ब्राण्ड हो गए हैं। अपने-अपने ब्राण्ड प्रमोट करने के हिसाब से भी कई टीचरों को काम में लिया जाने लगा था। पासबुक का मार्केट बढ़ाने के लिए सरकारी स्कूल के टीचर तक इन पासबुक वालों के झमेले में फंस चुके थे। प्राइवेट स्कूलों में तो इसकी मार्केटिंग जोर-शोर से होती है। कुछ लोग दबी जुबान में यह भी कहते हैं कि पता नहीं किस फायदे के लिए पासबुक को प्रमोट करना फैशन सा बन गया है।

करोड़ों का कारोबार

बताया जाता है कि दसवी-बारहवीं बोर्ड परीक्षा देने वाले सरकारी स्कूल के ही विद्यार्थियों की संख्या करीब साठ हजार है। इसके अलावा निजी स्कूलों में भी करीब चालीस हजार के करीब विद्यार्थी हैं। ऐसे में अकेले नागौर जिले में करीब एक लाख विद्यार्थी तो बोर्ड कक्षाओं के हैं, जिनमें लगभग 70 फीसदी इन्हीं पासबुक के आधार पर पढ़ाई करते हैं। इसके अलावा आठवीं-नवीं-ग्यारहवीं की ही नहीं अब अन्य कक्षाओं के भी लगभग सभी विषयों की पासबुक बाजार में मिलने लगी है। एक अनुमान के मुताबिक अकेले नागौर जिले में ही पासबुक का कारोबार करोड़ों का है।

निरीक्षण के दौरान मिली तो संस्था प्रधान पर कार्रवाई

आदेश में कहा गया है कि राजकीय विद्यालयों में पासबुक का चलन पूरी तरह बंद हो, मिलने पर शिक्षक अथवा छात्रों पर कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में पासबुक मिली तो संस्था प्रधान पर कार्रवाई होगी। अभी यह आदेश सरकारी स्कूलों पर लागू हुआ है, निजी स्कूलों के बारे में कोई स्पष्ट रुख सामने नहीं आया है।

Published on:
18 Nov 2023 09:11 pm