जोधपुर से सुजानगढ़ की ओर जा रही थी बस, ओवरट्रेक के कारण हुआ हादसा, ट्रक चालक के पैर टूटे
नागौर. नागौर-लाडनूं रोड पर हरीमा टोल से पहले पेट्रोल पंप के पास शनिवार रात करीब साढ़े 8 बजे राजस्थान लोक परिवहन की बस और एक मिनी ट्रक के बीच आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसे में ट्रक चालक सहित बस में सवार कई यात्री घायल हो गए, जिनमें से 14 जनों को नागौर के जेएलएन अस्पताल लाया गया, जबकि कुछ सामान्य घायलों को डेह अस्पताल ले जाया गया। जेएलएन अस्पताल में लाए गए दो घायलों की हालत गंभीर होने पर उन्हें जोधपुर रेफर किया गया।बस यात्रियों ने बताया कि हादसा ओवरटेक करते समय हुआ। जोधपुर से सुजानगढ़ की तरफ जा रही बस सामने से आ रहे मिनी ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस और ट्रक दोनों के आगे के हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। ट्रक चालक के दोनों पैर टूट गए। हादसे की सूचना मिलने पर टोल एम्बुलेंस के ईएमटी निर्मल ओझा व चालक किशनसिंह की मदद से गंभीर घायलों को नागौर के जेएलएन अस्पताल पहुंचाया गया।
अस्पताल चौकी पुलिस के अनुसार दुर्घटना में बुरड़ी निवासी बाबूलाल (44) पुत्र पूर्णाराम मेघवाल, नत्थूराम मेघवाल (27), आदूराम (40) पुत्र हेमराम मेघवाल, मुकेश मेघवाल (27), महिपाल (20) पुत्र बाबूलाल मेघवाल, कमेडिया निवासी प्रेम पत्नी पूर्णमल व पूर्णमल पुत्र मेघाराम मेघवाल, डेह निवासी सोनू पुत्र बजरंगलाल सेन, सुजानगढ़ निवासी सुरेन्द्र व रविन्द्र पुत्र मोहनलाल स्वामी तथा गुगरियाली निवासी कमलकिशोर पुत्र रामधन ब्राह्मण, जरडि़या निवासी प्रीति (29) पत्नी ओमप्रकाश जाट तथा भरतपुर के अकाता निवासी आजाद (24) पुत्र अमर खान घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल प्रीति व आजाद को प्राथमिक उपचार के बाद जोधपुर रेफर किया गया। हादसे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाकर यातायात सुचारू कराया।
अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड पड़ गया छोटा
जेएलएन अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड को मेडिकल कॉलेज के हिसाब से तैयार करने के कारण छोटे-छोटे कमरों में उपचार करने में काफी परेशानी आई। चिकित्साकर्मियों ने बताया कि पहले इमरजेंसी का वार्ड बड़ा होने के कारण ज्यादा संख्या में घायल आने पर उपचार में परेशानी नहीं आती थी, लेकिन पिछले कुछ समय से वार्ड में दीवारें खड़ी करके छोटे-छोटे कमरे बना दिए हैं, जिनमें चार-पांच घायल एक साथ आते ही उपचार में परेशानी होती है। शनिवार रात को एक साथ 14 घायल आए तो अंदर जगह ही नहीं रही, जिसके कारण कुछ घायलों को इंतजार करना पड़ा।