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सरकारी कॉलेजों में न पीटीआई और न ही लाइब्रेरियन, विश्वविद्यालय ठोक रहा पैनल्टी पर पैनल्टी

पीटीआई और लाइब्रेरियन की नियुक्ति कॉलेज प्रशासन के हाथ में नहीं, फिर भी वसूली जा रही पैनल्टी, राजस्थान के 600 से अधिक सरकारी कॉलेजों में 95 फीसदी पद लम्बे समय से रिक्त

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BR mirdha college nagaur

BR mirdha college nagaur

नागौर. राजस्थान के सरकारी कॉलेजों के लिए लम्बे समय से पीटीआई (शारीरिक प्रशिक्षण अनुदेशक) और लाइब्रेरियन की भर्ती नहीं होने से 95 फीसदी पद रिक्त पड़े हैं। इसका खमियाजा जहां विद्या??र्थियों को भुगताना पड़ रहा है, वहीं कॉलेज प्रशासन पर भी विश्वविद्यालय पैनल्टी पर पैनल्टी ठोक रहा है, जबकि इन पदों पर स्थाई नियुक्ति का अधिकार कॉलेज प्रशासन के पास है ही नहीं। राज्य सरकार व उच्च शिक्षा विभाग की उदासीनता का खमियाजा कॉलेजों को भुगतना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि गत वर्ष राजस्थान सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने विधानसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए बताया कि प्रदेश के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में 555 पुस्तकालयाध्यक्ष एवं 555 शारीरिक प्रशिक्षक अनुदेशक (पीटीआई) के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 535 पुस्तकालयाध्यक्ष एवं 540 शारीरिक प्रशिक्षक अनुदेशक (पीटीआई) के पद रिक्त हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने कई नवीन महाविद्यालय खोले, जिन्हें मिलाकर कुल संख्या 600 से अधिक हो गई, जहां पीटीआई और लाइब्रेरियन के लगभग सभी पद? खाली हैं।
इधर, सरकारी कॉलेजों के प्रशासन का कहना है कि नियुक्तियां उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं, फिर भी विश्वविद्यालय की ओर से स्टाफ की कमी पर पैनल्टी लगाई जा रही है। इससे कॉलेजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

भर्ती प्रक्रिया तीन साल से अटकी
राज्य सरकार ने वर्ष 2022-23 के बजट में लाइब्रेरियन और पीटीआई के 247-247 नए पदों की घोषणा की थी। फरवरी 2022 में वित्त विभाग ने पद भी स्वीकृत कर दिए, लेकिन सेवा नियम नहीं बनने से भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। लंबे इंतजार के बाद मई 2023 में कार्मिक विभाग ने सेवा नियम तैयार किए और भर्ती को यूजीसी 2018 अधिनियम के तहत कराने का निर्णय लिया गया। इसके बाद कॉलेज आयुक्तालय को आरपीएससी को अभ्यर्थना भेजनी थी, लेकिन प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी।

34 साल पहले हुई थी भर्ती
प्रदेश में आखिरी बार सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष की भर्ती वर्ष 1992 में हुई थी। यानी करीब 28 साल बाद लाइब्रेरियन भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद जगी, लेकिन तीन साल बीतने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। परिणामस्वरूप कॉलेजों में केवल 30 से कम लाइब्रेरियन बचे हैं, जबकि अधिकांश कॉलेज बिना पुस्तकालयाध्यक्ष के ही संचालित हो रहे हैं, जिसके कारण कॉलेजों को हर साल 59 हजार रुपए की पैनल्टी भरनी पड़ रही है।

विवि के पास यूजीसी मानकों का बहाना
यूजीसी नियमों के अनुसार किसी भी कॉलेज में लाइब्रेरियन और पीटीआई का होना अनिवार्य है। इन्हीं नियमों की आड़ में विश्वविद्यालय सरकारी कॉलेजों से हर साल 50 हजार रुपए पैनल्टी व 18 प्रतिशत जीएसटी के हिसाब से 9 हजार रुपए मिलाकर कुल 59 हजार वसूल रहा है।

विवि ने वसूली का माध्यम बना रखा है
सरकारी कॉलेजों में लाइब्रेरियन व पीटीआई के पद भरना प्राचार्य के हाथ में नहीं है, इसके बावजूद एमडीएस विश्वविद्यालय हर साल पैनल्टी वसूलता है। एक प्रकार से विवि ने विभिन्न माध्यमों से पैन्लटी लगाकर पैसे वसूलने का माध्यम बना रखा है। कॉलेज से जो पत्र भेजे जाते हैं, उनके जवाब देते नहीं और पैनल्टी पर पैनल्टी वसूलते हैं। इसमें सुधार की आवश्यकता है।

  • डॉ. शंकरलाल जाखड़, पूर्व प्राचार्य, श्री बीआर मिर्धा कॉलेज, नागौर