
नागौर. जिले में खरीफ 2026 के प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आंकड़ों ने फसल बीमा व्यवस्था में चल रहे कथित फर्जीवाड़े को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बार ऋणी किसानों की तुलना में गैर ऋणी किसानों के फसल बीमा की संख्या अधिक हो गई है। जिले में कुल एक लाख 12 हजार 204 किसानों ने 3 लाख 58 हजार 203 फसल बीमा करवाए हैं। इनमें ऋणी किसानों के 1 लाख 74 हजार 186 बीमा हैं, जबकि गैर ऋणी किसानों के बीमा की संख्या बढकऱ 1 लाख 84 हजार 17 हो गई है।
पिछले वर्षों में सामान्य तौर पर ऋणी किसानों की तुलना में गैर ऋणी किसानों के बीमा करीब 20 फीसदी ही हुआ करते थे। ऐसे में इस बार गैर ऋणी किसानों के बीमा की संख्या का ऋणी किसानों से अधिक हो जाना संदेह पैदा कर रहा है। खास तौर पर ऐसे समय में जब जिले में फर्जी बंटाईदार बनकर दूसरे किसानों के खेतों पर फसल बीमा करवाने और बाद में करोड़ों रुपए के क्लेम उठाने के मामले सामने आ चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी बंटाईदार के नाम पर बीमा करवाकर क्लेम उठाने के मामलों के सामने आने के बाद गैर ऋणी किसानों के बीमा के आंकड़ों की गहन जांच की जरूरत है। यह भी जांच का विषय है कि जिन किसानों के खेतों पर बीमा करवाया गया, उन्हें इसकी जानकारी है या नहीं।
इन तहसीलों में ज्यादा गैर ऋणी बीमा
गैर ऋणी किसानों के बीमा के मामले में डेह, खींवसर, मूण्डवा, नागौर और मेड़ता तहसीलें प्रमुख रूप से सामने आ रही हैं। खास बात यह है कि फसल बीमा फर्जीवाड़े के मामले भी इन क्षेत्रों में अधिक सामने आए हैं। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार डेह में ऋणी किसानों के 10,143 बीमा हुए हैं, जबकि गैर ऋणी किसानों के 30,235 बीमा करवाए गए। खींवसर में 15,359 ऋणी किसानों के मुकाबले 18,742 गैर ऋणी किसानों के बीमा हुए हैं। मेड़ता में ऋणी किसानों के 26,908 बीमा के मुकाबले गैर ऋणी किसानों के 34,162 बीमा करवाए गए। इसी तरह नागौर तहसील में 34,154 ऋणी किसानों के बीमा हुए, जबकि गैर ऋणी किसानों के 39,928 बीमा करवाए गए। इन आंकड़ों को देखते हुए अब गैर ऋणी किसानों के बीमा की प्रक्रिया, दस्तावेज और खेतों का सत्यापन महत्वपूर्ण हो गया है।
पकड़े जाने के डर से भेज रहे अर्जियां
पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि फसल बीमा फर्जीवाड़े के मामलों में पुलिस की कार्रवाई तेज होने के बाद अब बीमा कंपनी के पास बीमा निरस्त कराने की अर्जियां पहुंच रही हैं। इनमें कई कथित किसान यह दावा कर रहे हैं कि उनके खेत का फसल बीमा किसी अन्य व्यक्ति ने करवा दिया है, इसलिए बीमा निरस्त किया जाए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले 7 दिन में सैकड़ों अर्जियां बीमा कम्पनी को मिल चुकी हैं।
कौन भेज रहा है अर्जियां
इन अर्जियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आम किसान के पास नई बीमा कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी (यूआईसी) का ई-मेल पता होने और सीधे कंपनी को शिकायत भेजने की जानकारी होने की संभावना कम है। इसके अलावा कई अर्जियां हाथ से लिखी हुई हैं और कुछ अर्जियों में हैंड राइटिंग के एक जैसी होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि ये अर्जियां वास्तव में किसानों ने भेजी हैं या फर्जीवाड़े में शामिल लोगों ने कार्रवाई से बचने के लिए किसानों के नाम से भेजी हैं।
बंटाईदार के नाम पहले उठ चुके हैं करोड़ों के क्लेम
जिले में फसल बीमा फर्जीवाड़े की जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें दूसरे किसानों के खेतों पर फर्जी बंटाईदार तैयार कर फसल बीमा करवाया गया और फसल खराब होने पर बीमा क्लेम उठाया गया। अब गैर ऋणी किसानों के बीमा की बढ़ी संख्या को इसी पैटर्न से जोडकऱ देखा जा रहा है। हालांकि प्रत्येक मामले में वास्तविक स्थिति दस्तावेजों के सत्यापन और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस करे जांच
अब जरूरत इस बात की है कि गैर ऋणी किसानों के सभी बीमा आवेदनों में बंटाईदार की स्थिति, जमीन का रिकॉर्ड, किसान की सहमति और प्रीमियम जमा कराने वाले व्यक्ति की जानकारी का मिलान किया जाए। इससे यह पता चल सकेगा कि बढ़े हुए बीमा वास्तव में किसानों की जरूरत का परिणाम हैं या फर्जीवाड़े की किसी नई रणनीति का हिस्सा।
फर्जी फसल बीमा मामले में अब तक 21 एफआइआर, 10 शिकायतें और मिलीं
नागौर. फर्जी फसल बीमा कराने और बीमा कम्पनी के कार्मिकों से मिलीभगत कर करोड़ों रुपए का क्लेम उठाने के मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जिले के विभिन्न थानों में अब तक 21 एफआइआर दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि फर्जीवाड़े से संबंधित 10 और रिपोर्ट पुलिस को मिली हैं, जिनकी एफआईआर जल्द ही दर्ज की जाएगी। मामले की जांच के लिए गठित एसआइटी की कार्यवाहक एसपी आशाराम चौधरी ने गुरुवार को रिव्यू मीटिंग लेकर अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा की और आगे की जांच को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए। कार्यवाहक एसपी चौधरी ने बताया कि जांच में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़ा करने वाले मुख्य सरगना के साथ ही उसके नेटवर्क में शामिल दलालों और उन्हें संरक्षण देने वालों की भूमिका भी सामने लाई जाएगी। एसआइटी अब पूरे नेटवर्क की कडिय़ां जोडऩे में जुटी है, ताकि फर्जी बीमा और क्लेम के इस खेल में शामिल कोई भी व्यक्ति बचे नहीं।
2023 की 27 एफआईआर भी जांच के दायरे में
उन्होंने बताया कि पुलिस अब वर्ष 2023 में जिले के विभिन्न थानों में दर्ज हुई 27 एफआइआर से जुड़े लंबित मामलों की भी दोबारा जांच करेगी। इनमें से जिन मामलों में पूर्व में जांच अधिकारियों की ओर से एफआर लगाई गई थी। अब एसआइटी इन मामलों की फाइलों को खंगालेगी और यह देखा जाएगा कि किन परिस्थितियों में एफआर दी गई। यदि जांच में सामने आता है कि मामलों में एफआर देना उचित नहीं था तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
बीमा कंपनी के कार्मिकों का 31 तक रिमांड
फर्जीवाड़े के मामले में गिरफ्तार बीमा कंपनी के कार्मिक आदित्य पाटोदिया, अक्षय तिवाड़ी व बिनीत कुमार दुबे को न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय से आरोपियों का 31 अगस्त तक दोबारा पुलिस रिमांड लिया गया है। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से फर्जी बीमा कराने, फसल कटाई प्रयोग (सीसीई), क्लेम प्रक्रिया और इसमें शामिल अन्य लोगों के संबंध में पूछताछ की जा रही है। वहीं फर्जी बीमा कराने के मामले में गिरफ्तार तीन आरोपी सियाराम लोयल, रविन्द्र बाजिया व तरुण लोयल रिमांड पर चल रहे हैं। पहले से ही पुलिस रिमांड पर चल रहे हैं। एसआईटी इन आरोपियों से पूछताछ के आधार पर फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। नागौर पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। फर्जी बीमा से लेकर क्लेम उठाने तक की पूरी प्रक्रिया में किस-किस की भूमिका रही, इसकी पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।