
एक साथ उठी दो अर्थियां, गांव में मातम (फोटो एआई)
Nagaur Drowning Incident: रविवार की वह सुबह लाडिया गांव के गिरधारीलाल के घर में रोज की तरह ही आम थी। 13 साल का मोहित और उसका 11 साल का छोटा भाई बस्तीराम, दोनों स्कूल की छुट्टी होने के कारण बेहद खुश थे। घर का आंगन उनकी खिलखिलाहट और मासूम शरारतों से गूंज रहा था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस छुट्टी का वे पूरे हफ्ते इंतजार कर रहे थे, वही उनके जीवन का आखिरी दिन साबित होगी।
दोपहर में जब माता-पिता रोजी-रोटी के लिए खेत में पसीना बहाने चले गए, तो दोनों भाई खेलते-खेलते घर के पीछे पड़ोसी के खेत की तरफ निकल गए। वहां बने पानी के कुंड (डिग्गी) को देखकर शायद मासूम बच्चों के मन में उसमें उतरने की चंचलता उमड़ी। सुरक्षा के लिए लगी कंटीली तारों को हटाकर, दोनों रस्सी के सहारे पानी में उतर तो गए, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। जब उन्होंने बाहर निकलने की कोशिश की, तो ऐन मौके पर रस्सी टूट गई। गहरा पानी और बेबस हाथों की छटपटाहट कुछ ही पलों में सब कुछ शांत हो गया।
शाम ढली और जब सूरज डूबने लगा, तो मां-बाप खेत से लौटे। घर का आंगन, जो हर शाम दोनों बेटों की चहल-पहल से आबाद रहता था, वहां अजीब सा सन्नाटा था। परिजनों ने पहले सोचा कि बच्चे गांव में हो रहे किसी जागरण में गए होंगे। लेकिन जैसे-जैसे रात गहराती गई और समय सुबह के दो बजे तक पहुंचा, तो दिल की घबराहट बढ़ती चली गई।
गांव वालों के साथ जब तलाश शुरू हुई, तो पड़ोसी के खेत की डिग्गी के पास जाकर परिजनों का कलेजा कांप उठा। पानी की सतह पर उतराते दोनों बेटों के बेजान शरीरों को देखकर मां-बाप के पांव तले जमीन खिसक गई। जिस घर के चिरागों को उन्होंने बड़े लाड-प्यार से पाला था, वे एक साथ सदा के लिए बुझ चुके थे।
अगले दिन जब जेएलएन अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद दोनों भाइयों के शव गांव पहुंचे, तो पूरे लाडिया गांव के लोगों की आंखों में आंसू थे। एक साथ उठीं दो मासूमों की अर्थियों ने हर कठोर दिल को पिघला दिया। जिस आंगन में कुछ घंटे पहले खिलखिलाती हुई हंसी गूंजती थी, वहां आज सिर्फ मां की चीखें और पिता का खामोश दर्द बिखरा हुआ था। एक ही हादसे ने पूरे हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए दफन कर दिया।
Updated on:
25 Aug 2026 08:21 am
Published on:
25 Aug 2026 08:21 am
