25 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

नागौर में एक साथ उठीं 2 मासूम भाइयों की अर्थियां, अंतिम विदाई देख रो पड़े लोग, छुट्टी का दिन बना जिंदगी का आखिरी दिन

नागौर जिले में श्रीबालाजी थाना क्षेत्र के लाडिया गांव में दर्दनाक हादसे में डिग्गी में डूबने से दो सगे भाइयों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान 13 वर्षीय मोहित और 11 वर्षीय बस्तीराम पुत्र गिरधारीलाल के रूप में हुई है। दोनों रविवार को स्कूल की छुट्टी के चलते घर पर थे। हादसे के समय परिजन खेत में काम करने गए थे।
2 min read
Google source verification

नागौर

image

Arvind Rao

Aug 25, 2026

two brothers drown in water tank nagaur

एक साथ उठी दो अर्थियां, गांव में मातम (फोटो एआई)

Nagaur Drowning Incident: रविवार की वह सुबह लाडिया गांव के गिरधारीलाल के घर में रोज की तरह ही आम थी। 13 साल का मोहित और उसका 11 साल का छोटा भाई बस्तीराम, दोनों स्कूल की छुट्टी होने के कारण बेहद खुश थे। घर का आंगन उनकी खिलखिलाहट और मासूम शरारतों से गूंज रहा था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस छुट्टी का वे पूरे हफ्ते इंतजार कर रहे थे, वही उनके जीवन का आखिरी दिन साबित होगी।

रस्सी के सहारे डिग्गी में उतरे, बाहर निकलते समय टूटी रस्सी

दोपहर में जब माता-पिता रोजी-रोटी के लिए खेत में पसीना बहाने चले गए, तो दोनों भाई खेलते-खेलते घर के पीछे पड़ोसी के खेत की तरफ निकल गए। वहां बने पानी के कुंड (डिग्गी) को देखकर शायद मासूम बच्चों के मन में उसमें उतरने की चंचलता उमड़ी। सुरक्षा के लिए लगी कंटीली तारों को हटाकर, दोनों रस्सी के सहारे पानी में उतर तो गए, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। जब उन्होंने बाहर निकलने की कोशिश की, तो ऐन मौके पर रस्सी टूट गई। गहरा पानी और बेबस हाथों की छटपटाहट कुछ ही पलों में सब कुछ शांत हो गया।

देर रात तक घर नहीं लौटे तो तलाश शुरू

शाम ढली और जब सूरज डूबने लगा, तो मां-बाप खेत से लौटे। घर का आंगन, जो हर शाम दोनों बेटों की चहल-पहल से आबाद रहता था, वहां अजीब सा सन्नाटा था। परिजनों ने पहले सोचा कि बच्चे गांव में हो रहे किसी जागरण में गए होंगे। लेकिन जैसे-जैसे रात गहराती गई और समय सुबह के दो बजे तक पहुंचा, तो दिल की घबराहट बढ़ती चली गई।

गांव वालों के साथ जब तलाश शुरू हुई, तो पड़ोसी के खेत की डिग्गी के पास जाकर परिजनों का कलेजा कांप उठा। पानी की सतह पर उतराते दोनों बेटों के बेजान शरीरों को देखकर मां-बाप के पांव तले जमीन खिसक गई। जिस घर के चिरागों को उन्होंने बड़े लाड-प्यार से पाला था, वे एक साथ सदा के लिए बुझ चुके थे।

एक साथ उठी दो अर्थियां, गांव में मातम

अगले दिन जब जेएलएन अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद दोनों भाइयों के शव गांव पहुंचे, तो पूरे लाडिया गांव के लोगों की आंखों में आंसू थे। एक साथ उठीं दो मासूमों की अर्थियों ने हर कठोर दिल को पिघला दिया। जिस आंगन में कुछ घंटे पहले खिलखिलाती हुई हंसी गूंजती थी, वहां आज सिर्फ मां की चीखें और पिता का खामोश दर्द बिखरा हुआ था। एक ही हादसे ने पूरे हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए दफन कर दिया।