श्री गंगानगर

डेढ़ सौ रुपए दिहाड़ी के लिए जान जोखिम में

जिले के मकराना में ठेकेदार के सफाईकर्मी मात्र 150 रुपए दिहाड़ी में जरूरी संसाधन उपलब्ध करवाए बिना ही अपनी जान जोखिम में डाल सीवरेज चैम्बर, नाले आदि के भीतर घुस सफाई करने पर मजबूर हैं।

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कार्य के दौरान कई बार पांव में कांच लगने, कीचड़ में फिसलने से पत्थर आदि से टकरा चोट लगने साथ ही कई बार घण्टों तक बिना सुरक्षा उपकरणों के सफाई में लगे रहने से चर्म रोग से ग्रस्त होने पर उपचार की व्यवस्था भी उन्हें स्वयं अपने स्तर पर ही करनी पड़ती है।

हो जाता है चर्म रोग

सफाईकर्मी लक्ष्मण वाल्मिकी ने बताया कि सुरक्षा उपकरण तो दूर ठेकेदार की ओर से चाय एवं नहाने के लिए साबुन बट्टी भी उपलब्ध नहीं करवाई जाती। डेगाना में ठेकेदार की ओर से जहंा प्रतिदिन 250 रुपए व किशनगढ़ में 300 रुपए दिहाड़ी दी जाती है वहीं मकराना में मात्र 150 रुपए हाथ में थमा दिए जाते हंै। इसी तरह ठेकेदार सफाईकर्मी 18 वर्षीय युवक दीपक के बिना सुरक्षा साधनों के साफ-सफाई कार्य में लगे रहने से उसके शरीर पर जगह-जगह निशान पड़ गए है एवं वह चर्म रोग की चपेट में है। अर्जुन एवं बाबूलाल भी बेरोजगारी एवं बच्चों का पेट पालने के चलते जान जोखिम में डाल यही कार्य करने को मजबूर है। इसी तरह ठेकेदार के सफाईकर्मचारियों ने बताया कि कार्य के दौरान बारिश होने पर ठेकेदार की ओर से सीवरेज चैम्बर आदि की साफ-सफाई का कार्य बंद करवा दिया जाता है एवं उन्हें आधी दिहाड़ी अर्थात 75 रुपए ही दिए जाते है।

न्यूनतम मजदूरी से कम मिलते

चेजे आदि स्थानों पर खुली मजदूरी करने वाला दिहाड़ी मजदूरों को क्षेत्र में जहां 350-400 रुपए प्रतिदिन मिलते है वहीं सरकार की ओर से न्यूनतम घोषित मजदूरी 189 रुपए के स्थान पर ठेेकेदार साफ-सफाई दिहाड़ी कर्मचारियों को मात्र 150 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से दिए जा रहे है। ठेकेदार के अपने 50 के लगभग सफाई कर्मचारी होने के बावजूद ना तो इन सफाई कर्मचारियों के लिए कोई बीमा की व्यवस्था है ना ही उनके लिए स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन ठेकेदार की ओर से किया जाता है।

इनका कहना है

नगरपरिषद स्थाई सफाई कर्मचारियों को चिकित्सा भत्ता दिया जाता है जिससे वे स्वयं अपने स्तर पर अपने स्वास्थ्य की जांच करवा लेते है वहीं निजी सफाई कर्मचारियों को कार्य के दौरान सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाना एवं उनका स्वास्थ्य ठेकेदार के जिम्मे है।

अशोक चौधरी, आयुक्त नगरपरिषद

बिना सुरक्षा साधनों के लगातार सीवरेज चैम्बर, नाले आदि की साफ-सफाई करने पर पैरासाइड इंफेक्शन (संक्रमण) की संभावना के चलते कीड़े चमड़ी से होते हुए शरीर में चले जाते है जिससे चर्म रोग हो जाता है वहीं सीवरेज चैम्बर में कई बार जहरीली गैस होने से श्वास रोग से भी सफाईकर्मी ग्रसित हो जाता है।

डॉ. श्रवण नायक, चिकित्सा प्रभारी, राजकीय चिकित्सालय

Published on:
06 Aug 2016 12:19 am
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