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कौन है हवलदार मंगतराम? जिसके इशारों पर दौड़ रही थी पुलिस, वही ड्रग्स माफिया के लिए कर रहा था काम

श्रीगंगानगर में एसपी ऑफिस के CDR सेल में तैनात हवलदार मंगतराम हेरोइन तस्करों का मददगार निकला। पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आई 10.83 किलो हेरोइन केस में उसने पुलिस टीम को गुमराह किया। जांच में तस्करों से संपर्क सामने आने पर उसे निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई।

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Havildar Mangatram

हवलदार मंगतराम (पत्रिका फोटो)

श्रीगंगानगर: राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर से एक बेहद गंभीर और सुरक्षा तंत्र को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स सिंडिकेट ने पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे, जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) सेल में ही सेंध लगा दी।

मामले में पुलिस ने अपनी ही टीम के एक हवलदार मंगतराम को तस्करों के साथ मिलीभगत और सरकारी ड्यूटी में गद्दारी करने के आरोप में निलंबित कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, CDR सेल में तैनात हवलदार मंगतराम ने पाकिस्तानी तस्करों और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के साथ साठगांठ कर ली थी।

बता दें कि वह न केवल पुलिस की गोपनीय सूचनाएं तस्करों तक पहुंचा रहा था, बल्कि पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए गिराई जाने वाली हेरोइन की खेप की सुरक्षित डिलीवरी में भी मदद कर रहा था। यह खुलासा तब हुआ, जब जिला पुलिस और सीआईडी (आईबी) की संयुक्त टीम ने रावला थाना क्षेत्र में एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया।

क्या है पूरा मामला?

बीती 26 मार्च को रावला थाना क्षेत्र के चक 7-8 एसकेएम की रोही में पाकिस्तानी तस्करों द्वारा ड्रोन के माध्यम से भारी मात्रा में नशीले पदार्थ गिराए जाने की सूचना मिली थी। पुलिस ने घेराबंदी कर 10 किलो 830 ग्राम (कुल 20 पैकेट) उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन बरामद की। इस कार्रवाई में पंजाब के फाजिल्का निवासी तस्कर हरमेश, रणजीत सिंह, सोनू सिंह, गुरप्रीत सिंह और कीर्तन सिंह को गिरफ्तार किया गया।

इस संवेदनशील ऑपरेशन के दौरान रावला क्षेत्र में तैनात पुलिस टीम तकनीकी मदद के लिए SP कार्यालय स्थित CDR सेल से संदिग्धों की फोन लोकेशन और कॉल डिटेल्स मांग रही थी। आरोप है कि उस समय ड्यूटी पर मौजूद हवलदार मंगतराम ने टीम को सटीक जानकारी देने के बजाय गलत सूचनाएं देकर गुमराह किया। उसका उद्देश्य पुलिस टीम को भटकाना था, ताकि तस्करी में शामिल मुख्य आरोपी भाग सकें।

35 दिनों की जांच और मोबाइल रिकॉर्ड ने खोली पोल

पुलिस को हवलदार की गतिविधियों पर संदेह हुआ, जिसके बाद आंतरिक जांच शुरू की गई। लगभग एक महीने की गहन जांच में चौंकाने वाले साक्ष्य मिले। मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) की जांच से पुष्टि हुई कि मंगतराम न केवल टीम को गुमराह कर रहा था, बल्कि वह गिरफ्तार किए गए तस्करों में से एक के साथ निरंतर सीधे संपर्क में था। वह पुलिस की हर गतिविधि की जानकारी तस्करों को दे रहा था।

सबूत पुख्ता होने पर श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक हरिशंकर यादव ने कार्रवाई करते हुए मंगतराम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले की विभागीय जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (RPS) रघुवीर शर्मा को सौंपी गई है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती

यह मामला राजस्थान पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। एक तरफ सीमा सुरक्षा बल (BSF), NCB, SOG और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स दिन-रात सीमा पार से होने वाली ड्रोन तस्करी को रोकने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस मुख्यालय के भीतर बैठा एक कर्मचारी दुश्मन देशों के सिंडिकेट के लिए काम कर रहा था।

कठोर कार्रवाई के संकेत

पुलिस अधीक्षक हरिशंकर यादव ने बताया, हवलदार मंगतराम ने 10 किलो से अधिक हेरोइन बरामदगी वाले संवेदनशील मामले में जांच टीम को गुमराह करने का प्रयास किया और पकड़े गए आरोपियों के साथ उसके संबंध पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर उसे सेवा से बर्खास्त करने और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करने की भी प्रबल संभावना है।

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