
Didwana Nagaur Encroachment Action : डीडवाना (नागौर)। अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत सोमवार को नगर परिषद और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई कर शहर की बेगाना कॉलोनी में हिस्ट्रीशीटर दिनेश स्वामी के मकान के सामने सार्वजनिक रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को बुलडोजर (जेसीबी) से ध्वस्त किया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।
नगर परिषद के अनुसार 30 फीट चौड़े सार्वजनिक मार्ग पर 5 से 8 फीट तक अवैध निर्माण कर शौचालय, दीवार और पानी का टांका बनाया था। निर्धारित समय में अतिक्रमण नहीं हटाने पर प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर करीब एक घंटे में पूरा निर्माण हटवा दिया। दिनेश स्वामी फिलहाल जेल में बंद है।
उसके खिलाफ विभिन्न थानों में चोरी, लूट, राहजनी सहित 21 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें डीडवाना थाने के 12 मामलों में उसे पूर्व में सजा भी हो चुकी है। जिस मकान पर कार्रवाई हुई, वह उसके पिता के नाम दर्ज है। वहां वर्तमान में उसके माता-पिता निवास कर रहे हैं।
नगर परिषद ने शुक्रवार को मकान पर नोटिस चस्पा कर 24 घंटे के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद सोमवार सुबह करीब 9 बजे नगर परिषद की टीम पुलिस जाब्ते और जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंची। करीब एक घंटे चली कार्रवाई में सार्वजनिक मार्ग पर बने अवैध निर्माण को हटाया।
कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए हथियारों से लैस पुलिस बल तैनात रहा। डीडवाना, महिला थाना, खुनखुना और मौलासर थाना पुलिस के साथ आरएसी की टुकड़ी तथा तीन डिप्टी कमांडेंट स्तर के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई गई।
अतिक्रमण हटाने के दौरान परिजनों ने विरोध जताते हुए हंगामा किया। इसी दौरान हिस्ट्रीशीटर की मां, जो हृदय रोग से पीड़ित बताई गई, रोते-बिलखते अचानक अचेत हो गईं। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत एम्बुलेंस बुलवाई, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु शर्मा ने कहा कि कोई भी अपराधी कानून से ऊपर नहीं है। हार्डकोर और हिस्ट्रीशीटर अपराधियों के खिलाफ हर स्तर पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं पुलिस उपाधीक्षक जेठूसिंह ने कहा कि अपराध के जरिए अर्जित अवैध संपत्तियों और सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमणों को हटाने का अभियान लगातार जारी रहेगा। उनका कहना था कि ऐसी कार्रवाई से अपराधियों में कानून का भय पैदा होगा और उन्हें संरक्षण देने वालों को भी स्पष्ट संदेश मिलेगा।