नगरपरिषद नागौर ने ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था शुरू की है। इससे सफाई सिस्टम में जवाबदेही तय होगी। अधिकारियों को क्षेत्रवार जिम्मेदारी दी गई है। कचरा परिवहन करने वाले ठेकेदार भी गफलत नहीं कर पाएंगे। कचरा मिलने पर संबंधित सफाई कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।
नागौर. शहर की सफाई व्यवस्था को तकनीक से जोड़ते हुए नगरपरिषद ने अब घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था पर डिजिटल निगरानी शुरू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत शहर के विभिन्न मोहल्लों और कॉलोनियों में बार कोड लगाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से यह ट्रैक किया जाएगा कि कचरा वाहन संबंधित क्षेत्र में पहुंचा या नहीं। नगरपरिषद नागौर अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से सफाई व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और वाहन संचालक अब बिना क्षेत्र में गए कचरा उठाने का दावा नहीं कर सकेंगे।
नगरपरिषद की ओर से फिलहाल संजय कॉलोनी, माही दरवाजा, जाट कॉलोनी और रोडवेज बस स्टैंड क्षेत्र में बार कोड लगाने का कार्य शुरू किया गया है। अधिकारियों के अनुसार हर चौथे या पांचवें घर पर बार कोड लगाया जा रहा है, ताकि संबंधित क्षेत्र में वाहन की मौजूदगी और कचरा संग्रहण की स्थिति डिजिटल रूप से रिकॉर्ड हो सके। आने वाले दिनों में इस व्यवस्था का विस्तार पूरे शहर में किया जाएगा।
नगरपरिषद के अनुसार शहर में कचरा परिवहन के लिए 37 वाहन संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी वाहनों में पहले से जीपीएस सिस्टम लगाया गया है तथा आरएफआईडी तकनीक भी जोड़ी गई है। अब बार कोड स्कैनिंग के जरिए यह स्पष्ट हो सकेगा कि वाहन किस क्षेत्र में पहुंचा और वहां से कचरा उठाया गया या नहीं।
नगरपरिषद के अधिकारियों ने बताया कि यह व्यवस्था केवल चुनिंदा कॉलोनियों तक सीमित नहीं रहेगी। जल्द ही काठड़िया का चौक, बाठड़िया का चौक, भूरावाड़ी, मिश्रावाड़ी, प्रतापसागर कॉलोनी, नया दरवाजा और मानासर चौराहा सहित लगभग पूरे शहर को डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
बार कोड लगाने के दौरान कुछ क्षेत्रों में लोगों ने आपत्ति भी जताई और कर्मचारियों को विरोध का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि कुछ स्थानों पर कर्मचारियों के साथ अशोभनीय व्यवहार किया गया। नगरपरिषद ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल शहर को स्वच्छ और सफाई व्यवस्था को जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाएगा तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शहर में कचरा संग्रहण व्यवस्था की प्रभावी निगरानी के लिए बार कोड प्रणाली लागू की जा रही है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वाहन निर्धारित क्षेत्रों में पहुंचे या नहीं और सफाई व्यवस्था में लापरवाही की गुंजाइश कम होगी।
गोविंद सिंह भींचर, आयुक्त नगरपरिषद नागौर
नागौर. शहरवासियों को हरियाली और सुकून भरा माहौल देने के उद्देश्य से विकसित किया गया प्रतापसागर तालाब पार्क आज बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कभी सुबह-शाम लोगों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला यह पार्क अब रखरखाव के अभाव में अपनी चमक खोता जा रहा है। पार्क परिसर में जगह-जगह फैली गंदगी, सूखी घास और मुरझाते पौधे नगरपरिषद की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं। शहर के सुंदर स्थलों में गिने जाने वाले इस पार्क की वर्तमान स्थिति लोगों को निराश कर रही है।
पार्क में लगाए गए पौधों की हालत खराब हो चुकी है। कई जगह घास सूखने से जमीन बंजर दिखाई देने लगी है। जिन रास्तों और हरित पट्टियों को आकर्षण का केंद्र बनाया गया था, वहां अब उपेक्षा साफ दिखाई देती है। नियमित सिंचाई और देखरेख नहीं होने से हरियाली खत्म होने लगी है। पार्क के कई हिस्सों में मिट्टी उखड़ी पड़ी है।