11 मई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नागौर मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर संकट के बादल

जिला अस्पताल के पीएमओ ने सेंट्रल लैब बंद करवाकर पांच किमी दूर स्थापित करवा दी मदर लैब, मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य ने आरएमईएस को लिखा पत्र, कहा - एनएमसी के निरीक्षण में पैदा हो सकती है परेशानी

2 min read
Google source verification
नागौर मेडिकल कॉलेज

नागौर मेडिकल कॉलेज

नागौर. जिले के जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सालय में स्थापित सेंट्रल लैब को बंद कर पांच किलोमीटर दूर पुराना अस्पताल परिसर में मदर लैब स्थापित करने का मामला अब मेडिकल कॉलेज की मान्यता तक पहुंच गया है।

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी (आरएमईएस) को लिखे गए पत्र के बाद पिछले करीब डेढ़ महीने से स्वास्थ्य विभाग में लगातार पत्राचार चल रहा है। विभागीय पत्रों में बताया गया है कि एनएमसी निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कार्यरत सेंट्रल लैब बंद मिलने पर मेडिकल कॉलेज को नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं अजमेर जोन के संयुक्त निदेशक ने नागौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेके सैनी को पूरे मामले की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।

राजकीय मेडिकल कॉलेज नागौर के प्रधानाचार्य ने 17 मार्च 2026 को राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी, जयपुर के आयुक्त को पत्र लिखकर बताया कि एमसीएच हॉस्पिटल में स्थापित की गई मदर लैब राज्य सरकार के 13 मार्च को जारी आदेश की पालना के विरुद्ध है। पीएमओ ने सेंट्रल लैब जेएलएन नागौर से पूर्णतया बंद करके मदर लैब को पांच किलोमीटर दूर एमसीएच हॉस्पिटल में संचालित किया जा रहा है। अब जेएलएन अस्पताल में केवल कलेक्शन सेंटर चलाया जा रहा है। इससे सम्पूर्ण आपातकालीन जांच बंद हो गई है। यह सेंट्रल लैब मेडिकल कॉलेज के एनएमसी नोर्म्स के विरुद्ध है। उन्होंने पत्र में आशंका जताई कि यदि जिला अस्पताल की सेंट्रल लैब बंद रही तो आगामी नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) निरीक्षण में गंभीर आपत्तियां उठ सकती हैं। इससे मेडिकल कॉलेज की मान्यता प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।

प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक राजकीय मेडिकल कॉलेज नागौर की ओर से चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजे गए पत्र में बताया गया कि राज्य सरकार ने हब एंड स्पोक मॉडल के तहत लैब संचालन के निर्देश दिए थे, लेकिन जिला अस्पताल प्रशासन ने मौजूदा सेंट्रल लैब को ही निजी फर्म को सौंप दिया।

चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने माना गंभीर

मामले को गंभीर मानते हुए चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के अतिरिक्त निदेशक मुकेश कुमार मीणा ने 9 अप्रेल को एनएचएम के मिशन निदेशक एवं चिकित्सा विभाग के संयुक्त शासन सचिव को पत्र भेजकर प्रकरण में की जा सकने वाली यथोचित कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट टिप्पणी सहित जानकारी मांगी।

पत्रिका ने उठाया था मुद्दा

जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल की सेंट्रल लैब को बंद कर पुराना अस्पताल परिसर में मदर लैब शुरू करने को लेकर पीएमाओ की ओर से जारी आदेश के बाद राजस्थान पत्रिका ने 16 मार्च को ‘सरकार के अजीब फरमान : पांच किमी दूर स्थापित होगी जेएलएन अस्पताल की लैब’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मरीजों होने वाली परेशानियों के साथ मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर आने वाले संकट के संकेत दिए थे। पत्रिका ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई, इंटर्न डॉक्टरों के प्रशिक्षण, एमबीबीएस, नर्सिंग और डीएमएलटी विद्यार्थियों की प्रैक्टिकल क्लासों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। साथ ही ऑपरेशन से पहले होने वाली जरूरी जांचों में देरी होने की आशंका जताई थी।

पहले मार्गदर्शन लेंगे

अजमेर जोन के संयुक्त निदेशक ने जेएलएन अस्पताल के मदर लैब से जुड़े प्रकरण में मुझसे तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है, लेकिन पीएमओ मेरे अधीन नहीं है, इसलिए एक बार मार्गदर्शन लेकर जांच रिपोर्ट भेजेंगे।

- डॉ. जेके सैनी, सीएमएचओ, नागौर।