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Rajasthan: कुदरत के कहर के आगे आंखों में बेबसी… बरसात से मेड़ता मंडी में 5 करोड़ की फसलें भीगी

अचानक बदले मौसम के मिजाज ने शुक्रवार को मेड़ता कृषि उपज मंडी में बर्बादी का नजारा बना दिया। तेज बारिश आफत बनकर बरसी। बरसात के कारण मंडी परिसर में रखी रायड़ा, चना, जीरा, ईसबगोल सहित कृषि उपज पूरी तरह भीग गई।

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बारिश में भीगती उपज व तिरपाल से ढकते पल्लेदार। पत्रिका

मेड़ता सिटी (नागौर)। अचानक बदले मौसम के मिजाज ने शुक्रवार को कृषि उपज मंडी में बर्बादी का नजारा बना दिया। तेज बारिश आफत बनकर बरसी। बरसात के कारण मंडी परिसर में रखी रायड़ा, चना, जीरा, ईसबगोल सहित कृषि उपज पूरी तरह भीग गई। जिससे करीब 5 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है।

मंडी में नीलामी के इंतजार में खुले आसमान के नीचे रखी कृषि उपज की ढेरियों को बचाने के लिए किसानों, व्यापारियों ने खूब भागदौड़ की, लेकिन बारिश इतनी तेज थी कि तिरपाल से ढककर उपज को बचाने का मौका तक नहीं मिला। कई जगहों पर किसानों ने तिरपाल ढके भी , लेकिन नीचे से बहते पानी ने ढेरियों, बाेरियों और कट्टों को भीगा दिया। देखते ही देखते अनाज की ढेरियां पानी में बहती नजर आई।

रायड़ा, चना में शत-प्रतिशत नुकसान

मंडी में शुक्रवार सुबह ढेरी बोली लगने और तुलाई होने के बाद बारिश हुई। इससे माल भीग गया। इसका नुकसान सीधा व्यापारियों को उठाना पड़ेगा। मंडी में खुले में रखी रायड़ा, चना की ढेरियां व कट्टे पूरी तरह भीग गए। ईसबगोल, सौंफ, जीरा, ग्वार सहित सभी उपज 60 से 70 प्रतिशत भीग गई। व्यापारी, पल्लेदार बारिश के बीच भीगते माल को सिर्फ बेबसी भरी आंखों से देखते रहे।

बड़ा सवाल: मंडी टैक्स की मोटी कमाई, फिर भी सुविधाएं अधूरी क्यों?

हर साल करोड़ों का राजस्व देने वाली मेड़ता मंडी में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि 70 प्रतिशत उपज की नीलामी आज भी खुले आसमान के नीचे होती है। आवक के मुकाबले शेड इतने कम हैं कि किसानों को मजबूरी में फसल खुले में रखनी पड़ती है। मंडी में पानी निकासी के पुख्ता इंतजाम नहीं होने से समय पर निकासी नहीं हो पाती। , मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद उपज को सुरक्षित रखने के लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम क्यों नहीं किए गए।