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पानी के लिए कतार…रातभर लाइन में लगकर भरवा रहे टैंकर

नागौर जिला मुख्यालय व आस-पास के गांवों की पांच लाख की आबादी को मिलते है रोजाना महज 100 टैंकर पानी। बारिश नहीं होने से गांवों में तालाब सूख गए है। ऐसे में ग्रामीणों को टैंकरों से पानी खरीद कर लेना पड़ रहा है। नागौर शहर में भी एक दिन के अंतराल पर पेयजल आपूर्ति मिल रही है।

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नागौर. जिला मुख्यालय व आस-पास के गांव पेयजल के लिए नहरी पानी के गोगेलाव डेम पर निर्भर हैं। बारिश नहीं होने से गांवों में तालाब सूख गए है। ऐसे में ग्रामीणों को टैंकरों से पानी खरीद कर लेना पड़ रहा है। नागौर शहर में भी एक दिन के अंतराल पर पेयजल आपूर्ति मिल रही है। यहां भी जरूरत के अनुरूप पानी घरों तक नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में पानी के टैंकरों की मांग बढ़ गई है। परन्तु टैंकर वालों को भी गोगेलाव डेम से पानी भरवाने में पसीने छूट रहे है। रातभर टैंकर लाइन में लगाकर खड़े रहते है तब जाकर कहीं पानी मिलता है। एक टैंकर को एक दिन में मुश्किल से एक बार ही भरवा पाते है।

यह डेम जलदाय विभाग के अधीन है और सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक ही यहां टैंकरों को भरा जाता है। इसके लिए विभाग प्रत्येक टैंकर से 100 रुपए लेता है, लेकिन असल समस्या यहां से भी पानी नहीं मिलने की है। अभी 10 मई तक पूर्ण नहरबंदी है और नहर खोलने के बाद 15 मई तक पानी नोखा दैया डेम पहुंचने में लग जाएगा। ऐसे में नोखा-दैया डेम में स्टॉरेज पानी से ही काम चलाना है।

रोजाना केवल 100 टैंकर पानी

गोगेलाव डेम से पानी देने के लिए दो मोटर और चार पाइप लगाए हुए है, जिनसे रोजाना 100 से 110 टैंकर ही पानी भरा जाता है। करीब 4500 लीटर के प्रत्येक टैंकर को पानी भरने में 15 मिनट लगते है। टैंकर वाले पहले दिन शाम को 5 बजे ही डेम के आगे लाइन लगाना शुरू करते हैं। अगले दिन सुबह 7 बजे यहां टैंकर भरने शुरू होते हैं। टैंकर को सात से आठ घंटे लाइन में लगना पड़ता है, तब उसकी पानी भरवाने की बारी आती है।

हाइवे पर लगी टैंकरों की कतार

नागौर-बीकानेर हाइवे पर गोगेलाव डेम के पम्प हाउस के बाहर सड़क किनारे टैंकरों की लाइन लगी रहती है। मंगलवार सुबह 11 बजे यहां करीब 70 टैंकर पानी लेने के लिए लाइन में लगे हुए थे। चार पाइपों से एक साथ टैंकरों में पानी भरा जा रहा था।

मई-जून दो महीने ज्यादा परेशानी

नागौर जिला मुख्यालय व आस-पास के गांव डूकोसी, इन्दास, गोगेलाव, बालवा, कृष्णपुरा, चूंटीसरा, सलेऊ, सिंगड़, बाराणी आदि में टैंकर वाले पानी ले जाकर ग्रामीणों को देते हैं। कुछ टैंकर नागौर शहर में लोगों के घरों में पानी देते हैं। मई-जून दो महीने पानी की किल्लत से पूरा क्षेत्र जुझता है। बारिश होने के बाद तालाबों में पानी भरने पर कुछ राहत मिलती है। भूमिगत जल खारा होने से उसका उपयोग भी नहीं कर पाते है।

सात घंटे बाद आती है बारी

चालीस साल से टैंकर से पानी की आपूर्ति का कार्य कर रहा हूं। अब सात से आठ घंटेे लाइन में लगने के बाद टैंकर भरवाने की बारी आती है। ऐसे में एक दिन में एक टैंकर पानी ही मिलता है। ऐसी परेशनी इससे पहले कभी नहीं हुई।

- मोहन लाल, टैंकर मालिक

रातभर लाइन में, सुबह आती है बारी

गांवों और शहर में पानी की भंयकर किल्लत है। डेम से पानी सुबह 7 बजे से 2 बजे तक ही दिया जाता है। वह भी दो मोटरों से। ऐसे में एक साथ चार टैंकरों को ही पानी मिलता है। रोजाना शाम को यहां आकर लाइन में ट्रैक्टर टैंकर खड़ा कर देता हूं। सुबह 11-12 बजे बारी आ जाती है।

- जगदीश, टैंकर मालिक

फेक्ट फाइल

नागौर जिले की कुल मांग - 175 एमएलडी लगभग

वर्तमान में मिल रहा है- 115 एमएलडी लगभग

शहरी क्षेत्र में सप्लाई - 37 एमएलडी

ग्रामीण क्षेत्र में सप्लाई - 78 एमएलडी

पूर्ण नहर बंदी - 10 मई तक

नागौर तक पानी आएगा - 15 मई तक

नोखा-दैया की डिग्गी-1 में पानी शेष - 20,681.7 लाख लीटर

डिग्गी-2 में पानी शेष - 22,504.5 लाख लीटर