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जंगल में बढ़े शाकाहारी वन्य जीव, बाघ, तेंदुआ जैसे बड़े शिकारी नदारद

एक भी गिद्ध नहीं मिला: 24 घंटे की गणना में 32,986 वन्यजीव दर्ज, नीलगाय सबसे अधिक, मोर 11,290 के साथ शीर्ष पर

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नागौर. वन विभाग की ओर से इस साल हुई वन जीवों की गणना के आंकड़ों ने जिले के जंगलों की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। 1 मई शाम 5 बजे से 2 मई शाम 5 बजे तक चली गणना में कुल 32,986 वन्यजीव दर्ज किए गए। आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि क्षेत्र में शाकाहारी प्रजातियों की मजबूत मौजूदगी है, जबकि खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर रहने वाले बड़े शिकारी पूरी तरह अनुपस्थित पाए गए। इससे जंगल का संतुलन बदलता नजर आ रहा है।

शाकाहारी प्रजातियों की मजबूत मौजूदगी

गणना में नीलगाय 9,058 की संख्या के साथ सबसे आगे रही। काला हिरण 5,514 और चिंकारा 3,291 भी बड़ी संख्या में दर्ज हुए। इसके अलावा खरगोश 510, लंगूर 134 और साही 69 भी सामने आए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी बड़ी संख्या यह संकेत देती है कि जिले के खुले वन क्षेत्र और चारागाह इन प्रजातियों के लिए अनुकूल बने हुए हैं।

बड़े शिकारी नहीं, तो फिर बढ़ेंगी शाकाहारी प्रजातियां

आंकड़ों में बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे बड़े शिकारी एक भी दर्ज नहीं हुए। मांसाहारी वर्ग में सियार 70, लोमड़ी 160, रेगिस्तानी लोमड़ी 96, जंगली बिल्ली 37 और हाइना 7 तक ही सीमित रहे। यह स्थिति पारिस्थितिकी संतुलन पर सवाल खड़े करती है, क्योंकि शीर्ष शिकारी की अनुपस्थिति से शाकाहारी प्रजातियों की संख्या अनियंत्रित हो सकती है। पक्षी वर्ग में मोर 11,290 की संख्या के साथ सबसे अधिक दर्ज हुआ है। तीतर 1,271, कबूतर 308 और अन्य पक्षी भी अच्छी संख्या में मिले। हालांकि गिद्धों की सभी प्रजातियां शून्य पर रहना चिंता का विषय माना जा रहा है, क्योंकि वे पर्यावरण की सफाई व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं।

जमीनी असर और चुनौती

वन्यजीवों की यह स्थिति केवल जंगल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों और खेती पर भी पड़ रहा है। नीलगाय व अन्य शाकाहारी प्रजातियों की अधिकता किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अब जरूरत केवल गणना तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि संतुलित संरक्षण रणनीति बनाने की है, ताकि जंगल का प्राकृतिक संतुलन कायम रखा जा सके।

गणना में नहीं मिले बड़े शिकारी...

वन जीवों की गणना में बड़े शिकारी यानि की मांसाहारी प्रजातियां नहीं मिली है। शाकाहारी प्रजातियों की संख्या ठीक मिली है। 11 हजार से ज्यादा मोर और एक हजार से ज्यादा तीतर पाए गए हैं।

विजयशंकर, उपवन संरक्षक, वन विभाग नागौर

82 जल स्रोतों पर 24 घंटे चला अभियान

नागौर सहित डीडवाना-कुचामन जिले में वन विभाग द्वारा वन्यजीव गणना अभियान सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। इस बार के आंकड़ों में कई रोचक बदलाव सामने आए हैं। जहां सियार और लोमड़ी की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं मौसम में बदलाव और बीच-बीच में हुई बारिश के कारण बाघ और बघेरा जैसे बड़े शिकारी जल स्रोतों पर नजर नहीं आए।

डीएफओ विजय शंकर पांडे ने बताया कि शुक्रवार शाम 5 बजे से शुरू हुआ यह अभियान शनिवार शाम 5 बजे तक लगातार चला। इस दौरान जिले के 82 जल स्रोतों पर वन्यजीवों की गतिविधियों और उनकी संख्या का सूक्ष्म आकलन किया गया। भीषण गर्मी में जल स्रोत वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा होते हैं, इसलिए इन वॉटरहोल्स के आसपास उनकी उपस्थिति अधिक स्पष्ट रूप से दर्ज होती है। वैज्ञानिक पद्धति के तहत लाडनूं (5), मेड़ता (19), डीडवाना (6), जायल (10), परबतसर (14), नागौर (9) और कुचामन (19) के कुल 82 वॉटरहोल चिन्हित कर निगरानी की गई।