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Nagaur news…पाइपलाइन बिछी, पानी नहीं पहुंचा, पांच साल से टैंकर पर निर्भर कॉलोनियां

नागौर. शहर के ताऊसर रेलवे फाटक के पास गणेश कॉलोनी एवं बालसागर कॉलोनी में पांच साल से पानी की एक-एक बूंद के लिए लिए स्थानीय बाशिंदे तरस रहे हैं

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नागौर. ताऊसर रेलवे फाटक के पास स्थित गणेश कॉलोनी और बालसागर कॉलोनी के बाशिंदे पिछले पांच वर्षों से पेयजल के लिए जूझ रहे हैं। यहां पाइपलाइन होने के बावजूद घरों तक एक बूंद पानी नहीं पहुंचा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को अपनी मूल जरूरत पूरी करने के लिए निजी टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है। गर्मी बढऩे के साथ समस्या और विकट हो गई है। इसको लेकर महिलाओं ने प्रदर्शन कर जलदाय विभाग के अधिकारियों को चेताया है कि ध्यान नहीं दिया तो फिर कार्यालय में पहुंचकर घेराव किया जाएगा।

पाइपलाइन डालने के बाद भी नहीं पहुंचा पानी
स्थानीय निवासियों के अनुसार वर्ष 2020-21 में गूजरखेड़ा की ओर से पाइपलाइन बिछाई गई थी। उस समय लोगों को भरोसा दिया गया था कि जल्द ही नियमित जलापूर्ति शुरू होगी। लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। जयनारायण, भागीरथराम और श्याम का कहना है कि पाइपलाइन डालने के बाद भी विभाग ने आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं की, जिससे पूरी योजना अधर में लटकी हुई है।

पांच साल में टेंकर से भी नहीं पहुंचा पाए पानी
कॉलोनीवासियों ने कई बार जलदाय विभाग को लिखित और मौखिक शिकायतें दी हैं। अधिकारियों को मौके की स्थिति से अवगत भी कराया गया, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। हाल ही में अजमेर से आए अतिरिक्त मुख्य अभियंता रामचंद्र राड के साथ हुई समीक्षा बैठक में स्थानीय अधिकारियों ने जल व्यवस्था को संतोषजनक बताया, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है। बैठक में यह भी कहा गया था कि जिन इलाकों में पाइपलाइन से पानी नहीं पहुंच रहा है, वहां टैंकर के जरिए आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। लेकिन यह दावा केवल कागजों तक ही सीमित रहा। वास्तविकता यह है कि कॉलोनी के लोग खुद ही निजी टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं। प्रशासन की ओर से कोई नियमित व्यवस्था नजर नहीं आ रही।

महंगा पड़ रहा पानी, किया प्रदर्शन
स्थानीय परिवारों को हर दस दिन में टैंकर मंगवाना पड़ता है। गर्मी के मौसम में टैंकर का खर्च और बढ़ जाता है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह स्थिति और कठिन हो गई है। कई घरों में पानी का उपयोग भी बेहद सोच-समझकर करना पड़ रहा है। पानी की किल्लत से सबसे अधिक परेशानी महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ रही है। सोमवार को जेतादेवी, राजुड़ी, अलका, सुमिता, निरमा, जसोदा और सुमित्रा सहित अन्य महिलाओं ने खाली बर्तन लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग करते हुए चेतावनी दी कि समस्या का निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।