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एक पंप के भरोसे नागौर शहर: सीएनजी की भारी किल्लत, वाहन चालकों को घंटों करना पड़ रहा इंतजार

नागौर शहर ही नहीं, शहर के आसपास 50 किलोमीटर के दायरे में फिलहाल एक पम्प के भरोसे हजारों वाहन संचालित हो रहे हैं, जिसके चलते वाहन चालकों को ईंधन लेने के लिए एक-एक घंटे तक लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है

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वाहन चालकों को घंटों करना पड़ रहा इंतजार

वाहन चालकों को घंटों करना पड़ रहा इंतजार

नागौर. पर्यावरण अनुकूल और सस्ता ईंधन मानी जाने वाली सीएनजी की बढ़ती मांग के बीच नागौर शहर इन दिनों गंभीर किल्लत से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि नागौर शहर ही नहीं, शहर के आसपास 50 किलोमीटर के दायरे में फिलहाल एक पम्प के भरोसे हजारों वाहन संचालित हो रहे हैं, जिसके चलते वाहन चालकों को ईंधन लेने के लिए एक-एक घंटे तक लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है। जितनी तेजी से सीएनजी वाहन सडक़ों पर आए हैं, उतनी तेजी से बुनियादी ढांचा यानी पम्प नहीं बढ़े हैं।

देशभर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण सीएनजी वाहनों की मांग तेजी से बढ़ी है। नागौर में भी अब नई बिकने वाली करीब 40 प्रतिशत कारें सीएनजी वैरिएंट में आ रही हैं, लेकिन इसके मुकाबले रिफिलिंगपम्प चालू नहीं हो पाए हैं, हालांकि शहर सहित जिलेभर में पांच पम्प पिछले करीब डेढ़ साल से तैयार हैं, लेकिन सीएनजी उपलब्ध करवाने वाली आईओसीएल कम्पनी इसको लेकर उदासीनता दिखा रही है। यही वजह है कि सुबह-शाम शहर के एक मात्र सीएनजी पम्पर पर वाहनों की लंबी कतार आम हो गई है और कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती है। कई वाहन चालक तो कार बेचने वाले डीलर से शिकायत करने पहुंच रहे हैं।

तैयार पंप, फिर भी नहीं मिल रही गैस

नागौर जिले में कुल पांच सीएनजी पम्प पूरी तरह तैयार हैं। इनमें नागौर शहर में दो, जबकि मेड़ता, रेण और खाटू बड़ी में एक-एक पंप स्थापित किया गया है। इन पंपों पर कम्प्रेशर, स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन और सेल्स नोजल तक की सभी तकनीकी तैयारियां काफी पहले पूरी हो चुकी हैं। कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी हो चुका है, लेकिन जिले में मात्र दो पम्प चालू किए गए हैं, जबकि तीन पम्प पर्याप्त गैस आपूर्ति नहीं मिलने के कारण पिछले डेढ़ साल से शुरू नहीं हो पाए हैं।

क्या कहते हैं पम्प संचालक

पंप संचालक तेजपाल मिर्धा ने बताया कि शुरुआत में कम्प्रेशर और नोजल के बीच लगने वाली पाइप की कमी के कारण देरी हुई। लेकिन अब पिछले छह महीने से उनके नागौर व खाटू में सीएनजी पम्प पूरी तरह तैयार हैं, इसके बावजूद कम्पनी की ओर से चालू नहीं करवाया जा रहा है। इस कारण करोड़ों रुपए का निवेश अटका हुआ है और संचालकों पर रखरखाव व बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

दूसरे शहरों पर निर्भरता

सीएनजी पंपों की कमी के चलते वाहन मालिकों को अजमेर और जोधपुर जैसे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है। वाहन विक्रेता महेन्द्र सिंह भाटी के अनुसार, ‘सीएनजी पंप चालू होने से न केवल लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।’

सस्ता और पर्यावरण हितैषी विकल्प

जानकारों के अनुसार सीएनजी से चलने वाले वाहन पेट्रोल-डीजल के मुकाबले 30 से 40 प्रतिशत तक कम खर्चीले होते हैं। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में औसतन 25 प्रतिशत तक कमी आती है, जिससे वायु प्रदूषण घटाने में मदद मिलती है।