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एक छोटी जांच बचा सकती है पूरी जिंदगी, जागरूकता से सामने आए थैलेसीमिया मरीज

जिला अस्पताल में 40 थैलेसीमिया व 10 हीमोफीलिया मरीजों का नि:शुल्क उपचार, दवाइयों से जांच तक मुफ्त सुविधा

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नागौर. अनभिज्ञता के कारण पहचान नहीं होने वाली थैलेसीमिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी के मरीज अब जागरूकता बढऩे के साथ सामने आने लगे हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, जांच सुविधाओं और जागरूकता अभियानों का असर यह है कि नागौर जिले में अब थैलेसीमिया मरीजों की पहचान तेजी से हो रही है। वर्तमान में जेएलएन राजकीय अस्पताल की एमसीएच विंग में जिलेभर के करीब 40 थैलेसीमिया मरीजों का नियमित उपचार चल रहा है, जबकि हीमोफीलिया के 10 मरीज भी यहां उपचार ले रहे हैं। राहत की बात यह है कि इन मरीजों को जांच, उपचार और दवाइयों सहित अधिकांश सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

जिला अस्पताल में थैलेसीमिया मरीजों को नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन, आवश्यक रक्त जांच और आयरन कंट्रोल की दवाइयां नि:शुल्क दी जा रही हैं। वहीं हीमोफीलिया मरीजों को भी जरूरी इंजेक्शन और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

गौरतलब है कि विश्व थैलेसीमिया दिवस हर साल 8 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को इस गंभीर आनुवांशिक रक्त विकार के प्रति जागरूक करना और समय रहते जांच के लिए प्रेरित करना है। चिकित्सकों के अनुसार थैलेसीमिया ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। इसके कारण मरीज, खासकर बच्चों को हर कुछ सप्ताह में रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।

जागरूकता बढ़ी तो सामने आने लगे मरीज

एमसीएच विंग के प्रभारी डॉ. मूलाराम कड़ेला ने बताया कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस बीमारी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते थे। कई परिवार बच्चों की कमजोरी, बार-बार बीमार पडऩे या खून की कमी को सामान्य बीमारी समझते रहे, लेकिन अब स्क्रीनिंग और जांच सुविधाएं बढऩे से मरीजों की पहचान आसान हुई है। उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया की जांच काफी महंगी होने के कारण हर कोई करवा नहीं पाता था, लेकिन अब जिला अस्पताल में नि:शुल्क हो रही है।

विवाह पूर्व जांच से रोकी जा सकती है बीमारी

विशेषज्ञों का कहना है कि थैलेसीमिया पूरी तरह आनुवांशिक बीमारी है और इसकी रोकथाम संभव है। यदि विवाह से पहले युवक-युवती थैलेसीमिया माइनर की जांच करवा लें तो भविष्य में बच्चों को इस बीमारी से बचाया जा सकता है। डॉक्टरों के अनुसार यदि दोनों व्यक्ति थैलेसीमिया माइनर हों तो बच्चे में थैलेसीमिया मेजर होने की आशंका 25 प्रतिशत तक रहती है।

एक रक्त जांच बदल सकती है भविष्य

विश्व थैलेसीमिया दिवस 2026 की थीम ‘अब और छिपा नहीं: अज्ञात लोगों को ढूंढना, अनदेखे लोगों का समर्थन करना’ रखी गई है। इसका संदेश साफ है कि जागरूकता, समय पर जांच और समाज के सहयोग से इस बीमारी से लड़ाई आसान बनाई जा सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि एक साधारण ब्लड टेस्ट किसी बच्चे को उम्रभर की पीड़ा से बचा सकता है। ऐसे में लोगों को रक्तदान के साथ-साथ थैलेसीमिया जांच के प्रति भी जागरूक होना जरूरी है।