
नागौर. बुटाटी धाम स्थित संत चतुरदास महाराज मंदिर विकास समिति को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद को लेकर जिला कलक्टर की ओर से गठित की गई जांच समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट कलक्टर को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया मंदिर समिति के कार्यकाल के दौरान करीब 22 करोड़ 74 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता, देवस्थान निधियों के दुरुपयोग तथा सुनियोजित गबन का प्रथम दृष्टया खुलासा किया गया है।
आपराधिक मामले दर्ज कराने की अनुशंसा
रिपोर्ट में समिति के प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों पर गंभीर सवाल उठाते हुए संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक, राजस्व और विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। गौरतलब है कि जिला कलक्टर ने मंदिर विवाद को लेकर 10 फरवरी को जांच कमेटी गठित की थी, जिसने चार माह 13 दिन बाद गत 23 जून को अपनी रिपोर्ट जिला कलक्टर को सौंपी।
रिपोर्ट के अनुसार समिति के रिकॉर्ड, आय-व्यय विवरण, बैंक खातों, निर्माण कार्यों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं। जांच समिति ने निष्कर्ष निकाला कि मंदिर की आय और देवस्थान निधियों का नियमानुसार उपयोग नहीं किया गया। कई मामलों में वित्तीय नियमों की अनदेखी कर राशि का दुरुपयोग किया गया। समिति ने इसे केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित वित्तीय गड़बड़ी और गबन का मामला माना है।
रिपोर्ट में बताया है कि नकद आय में भारी अंतर, बिना बिल और वाउचर के भुगतान, निर्माण एवं मरम्मत कार्यों में संदिग्ध व्यय, ग्राम विकास मद में खर्च तथा कबाड़ बिक्री से प्राप्त राशि के लेखांकन में भी गंभीर विसंगतियां मिली हैं।
जांच कमेटी ने बिन्दुबार ब्यौरा देते हुए बताया कि जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 का कुल प्रमाणित गबन 15.16 करोड़ रुपए है। चूंकि समिति ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड जांच दल से छिपा लिए हैं, अतः कानूनी एवं प्रतिकूल उपधारणा और विगत 2 वर्षों के वित्तीय औसत के आधार पर वर्ष 2025-26 का अनुमानित गबन 7.58 करोड़ आकलित किया जाता है। इस प्रकार, संस्था की पवित्र देवस्थान निधि में कुल 22.74 करोड़ रुपए (22 करोड़, 74 लाख, 74 हजार, 946 रुपए) की भारी वित्तीय अनियमितता, राशियों का दुरुपयोग एवं सुनियोजित गबन प्रमाणित होता है।
एफआईआर दर्ज कराने की अनुशंसा
जांच समिति ने इस मामले में संबंधित कार्यकारिणी सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सक्षम पुलिस एजेंसी से विस्तृत जांच कराने की अनुशंसा की है। साथ ही राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम के तहत संबंधित व्यक्तियों से राशि की राजस्व बकाया की तरह वसूली करने का सुझाव दिया है। साथ ही जिन सदस्यों की भूमिका वित्तीय निर्णयों में रही, उनसे संयुक्त एवं पृथक दायित्व तय कर वसूली की जाए।
प्रशासक नियुक्त करने की सिफारिश
रिपोर्ट में वर्तमान समिति को तत्काल प्रभाव से हटाकर मंदिर के संचालन के लिए किसी सक्षम राजपत्रित अधिकारी को प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) नियुक्त करने की सिफारिश भी की गई है। साथ ही समिति के सभी बैंक खातों, सावधि जमा (एफडी) और ऑनलाइन भुगतान प्रणालियों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर उनका संचालन नव नियुक्त प्रशासक को सौंपने की अनुशंसा की है।
स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराने सिफारिश
जांच समिति ने 2219 आधिकारिक रसीद पुस्तकों के वित्तीय प्रभाव, डिजिटल लेन-देन की मनी ट्रेल, संदिग्ध भुगतानों और रिकॉर्ड की वैज्ञानिक जांच के लिए विशेषज्ञ एजेंसी से फोरेंसिक ऑडिट कराने तथा मंदिर समिति के कार्यालय, अभिलेख, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और अन्य रिकॉर्ड को तत्काल सील कर सुरक्षित रखने की अनुशंसा भी की है, ताकि संभावित साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो सके।
आयकर विभाग और देवस्थान विभाग को पूरे मामले से अवगत कराते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की सिफारिश की है। जांच समिति का मानना है कि करोड़ों रुपए की नकद राशि, बिना बिल के भुगतान और अन्य वित्तीय लेन-देन कर नियमों के उल्लंघन की आशंका पैदा करते हैं।
सरकारी भूमि पर है मंदिर
जांच समिति ने रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि संत श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर विकास समिति भले ही सोसायटी के रूप में पंजीकृत है, लेकिन मंदिर परिसर सरकारी भूमि पर स्थित है। समिति को मंदिर की संपत्तियों एवं आय पर वैधानिक स्वामित्व प्राप्त नहीं है। इसके बावजूद समिति मंदिर की आय और परिसंपत्तियों का प्रबंधन कर रही थी, जो जांच का विषय है। समिति ने दोषियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई कर देवस्थान निधियों की सुरक्षा की अनुशंसा की है।
न्यायालय के आदेशानुसार करेंगे कार्रवाई
बुटाटी मंदिर मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय ने कार्रवाई पर रोक लगा रखी है, इसलिए आगामी पेशी में हम जांच रिपोर्ट के आधार पर अपना पक्ष रखेंगे। आगे न्यायालय जो आदेश देगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
- देवेन्द्र कुमार, जिला कलक्टर, नागौर।