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यमुना जल की आस, डीडवाना-कुचामन फिर भी उदास

कुचामन-डीडवाना और नागौर जिले में खारा भूजल, सूखते बोरवले से जल संकट है। यमुना जल समझौते से नई उम्मीद जगी है कि इस इलाके को भी पानी मिले। जिले में खारे भूजल, नहरी जल पर निर्भरता और हर साल का जल संकट की चुनौती है। पानी आने से यह परेशानी दूर होगी।
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Ai Generate image यमुना जल समझौते ने प्रदेश के जल संकट वाले इलाकों में नई उम्मीद जगाई

दिनेश कुमार स्वामी@नागौर.डीडवाना. राजस्थान और हरियाणा के बीच हाल ही में हुए यमुना जल समझौते ने प्रदेश के जल संकट वाले इलाकों में नई उम्मीद जगाई है। इस परियोजना का सीधा लाभ फिलहाल शेखावाटी क्षेत्र के चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों को मिलेगा।

परन्तु नागौर, डीडवाना-कुचामन जिले के किसान, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता आवाज उठाएंगे तो इलाके को भी फायदा मिल सकता है। विशेषज्ञ यहां भविष्य में यमुना का पानी लाने की अनुकूलता भी मानते है। इससे क्षेत्र को जल संकट से मुक्ति मिलेगी और किसानों को सिंचाई पानी मिलने से कृषि उत्पादन भी बढ़ेगा।

सीधा असर जिले की जलापूर्ति पर

नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले की पहचान लंबे समय से जल संकट वाले क्षेत्र के रूप में रही है। जिले के अधिकांश हिस्सों में भूजल अत्यधिक खारा है। पेयजल के लिए स्थानीय जल स्रोत पर्याप्त नहीं हैं। शहरों और गांवों की बड़ी आबादी इंदिरा गांधी नहर की नागौर लिफ्ट पेयजल परियोजना पर निर्भर है।

जब भी नहरबंदी होती है या तकनीकी कारणों से आपूर्ति बाधित होती है, सीधा असर जिले की जलापूर्ति पर पड़ता है। इसी वर्ष भी गांवों और कस्बों में जलापूर्ति प्रभावित रही। कई स्थानों पर टैंकरों से पानी पहुंचाना पड़ा तथा जलदाय विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी। इससे स्पष्ट है कि जिले की पेयजल व्यवस्था अभी भी एक ही बड़े स्रोत पर अत्यधिक निर्भर है।

गिरते भूजल स्तर की चिंता

जिले में लगातार गिरता भूजल स्तर चिंता का विषय है। अधिकांश क्षेत्रों में नए ट्यूबवेल खोदने के बाद भी मीठा पानी नहीं मिल पाता। कई गांवों में भूजल की गुणवत्ता पेयजल मानकों के अनुरूप नहीं है। ऐसे में सतही जल आधारित योजनाओं पर निर्भरता बढ़ रही है।

पानी मिले तो बदले तस्वीर

यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान को प्रतिवर्ष निर्धारित मात्रा में यमुना का पानी मिलेगा। इससे शेखावाटी क्षेत्र की पेयजल जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा होगा। इससे अन्य पेयजल योजनाओं पर दबाव कम होगा। इसका अप्रत्यक्ष लाभ पड़ोसी जिलों को मिलेगा। इसके साथ ही डीडवाना-कुचामन को भी यमुना का पानी मिलने लगे तो इलाके की तस्वीर बदल सकती है।

पानी को लेकर जिले की प्रमुख चुनौतियां

1. अधिकांश क्षेत्रों में खारा भूजल।

2. नहर आधारित जलापूर्ति पर निर्भरता।

3. गर्मी व नहरबंदी के दौरान जल संकट।

4. गिरता भूजल स्तर और सीमित पुनर्भरण।

5. बढ़ती आबादी से बढ़ती पानी की मांग।

32 साल बाद धरातल पर उतरेगा प्रोजेक्ट

करीब 32 साल से लंबित यमुना जल बंटवारे को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच गत 29 जून को सहमति बनी। दोनों राज्यों ने केंद्र सरकार की मौजूदगी में यमुना वाटर प्रोजेक्ट के निर्माण और क्रियान्वयन के लिए समझौता किया। साथ ही वर्ष 1994 के यमुना नदी बोर्ड समझौते को धरातल पर उतारने का रास्ता साफ हो गया।

समझौते के तहत राजस्थान को उसके हिस्से का करीब 580 मिलियन क्यूबिक मीटर यमुना जल हर वर्ष मानसून के दौरान जुलाई से अक्टूबर के बीच उपलब्ध कराया जाएगा। यह पानी हरियाणा के हथिनीकुंडबैराज से पश्चिमी यमुना नहर प्रणाली के माध्यम से लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से राजस्थान पहुंचेगा। परियोजना की अनुमानित लागत 34,102 करोड़ रुपए हैं।

यमुना जल हमें भी मिले

बिल्कुल सही हैं, डीडवाना-कुचामन जिले को यमुना जल मिलना चाहिए। इससे क्षेत्र की पानी की जरूरतें पूरी होगी। पानी लेने के लिए मुख्यमंत्री से बात कर हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

- विजयसिंह चौधरी, राज्य मंत्री व विधायक नावां

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डीपीआर में करें शामिल

हमारे जिले में पानी की कमी है, किसान खेती के लिए बारिश के पानी पर निर्भर रहते है। आइजीएनपी का पानी घरेलू उपयोग के लिए मिल रहा है, जो पर्याप्त नहीं है। राज्य सरकार जो डीपीआर बना रही है, उसमें डीडवाना-कुचामन व नागौर जिले को भी शामिल करना चाहिए।

- रामनिवास गावड़िया, विधायक परबतसर

सीकर आ रहा तो यहां भी संभव

हमारे जिले डीडवाना-कुचामन व नागौर में पानी की बहुत कमी है। खेती बारिश पर निर्भर है। आइजीएनपी से पेयजल जरूरतें ही मुश्किल से पूरी हो रही है। यमुना का पानी पाइप से सीकर तक आ रहा है तो हमारा क्षेत्र वंचित क्यों रहे। राज्य सरकार को इस योजना से इस क्षेत्र को भी जोड़ना चाहिए।

- जाकिर हुसैन गैसावत, विधायक मकराना

हमारा जिला भी शामिल हो

पानी के मामले में डीडवाना-कुचामन जिले की हालत बहुत खराब है।पीने के लिए भले ही नहरी योजना का पानी मिल रहा हो लेकिन, कृषि के लिए किसान अब भी बारिश पर निर्भर है। जब सीकर तक योजना का पानी आ रहा है तो हमारे जिले को भी इसमें शामिल करना चाहिए।

- मुकेश भाकर, विधायक लाडनूं

पानी आ जाए तभी मानें

वर्ष 1994 में 5 मुख्यमंत्रियों ने समझौता किया। 32 साल पहले समझौता हो चुका था। फिर भी अभी तक पानी नहीं आया। अब पानी आ जाएगा तो मान सकते है। अब दो मुख्यमंत्रियों व मंत्रियों ने एमओयू किया है। इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। भविष्य में पता चलेगा कि प्रदेश को क्या फायदा मिला।

- यूनुस खान, विधायक डीडवाना

यह है परिदृश्य

  • डीडवाना कुचामन जिले की जनसंख्या- 19.5 लाख (अनुमानित)
  • 155 एमएलडी पेयजल आवश्यकता।
  • 267 प्रतिशत ओवर भूजल दोहन कुचामन में।
  • 162 प्रतिशत ओवर भूजल दोहन डीडवाना में।
  • 5 लाख हैक्टेयर कृषि योग्य भूमि जिले में।
  • 800 क्यूसेक पानी चाहिए सिंचाई के लिए।