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‘अपनों’ के बीच महफूज नहीं हैं फूलों सी नाजुक ‘बेटियां’, नागौर में कई मामले दर्ज

चाचा, ताऊ, मामा जैसे रिश्तेदारों के बाद अब मां-बाप ही बन रहे भक्षक, कहीं बाप बेटियों के साथ कर रहा बलात्कार तो कहीं मां अपनी ही बेटी को कर रही दरिंदों के हवाले
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Raipur Rape Case

4 साल की मासूम के साथ बड़े भाई ने किया दुष्कर्म (AI Photo)

नागौर. एक मासूम बच्ची जब जन्म लेती है तो सबसे पहले मां की गोद में सुकून तलाशती है और फिर पिता की उंगली पकडकऱ दुनिया को पहचानती है। उसके लिए घर सिर्फ चार दीवारें नहीं होता, बल्कि भरोसे, अपनत्व और सुरक्षा का दूसरा नाम होता है। लेकिन जब यही घर डर का ठिकाना बन जाए, जब जन्म देने वाले ही बचपन को नोचने लगें, तब यह सिर्फ अपराध नहीं रहता, बल्कि समाज के टूटते संस्कारों की सबसे भयावह तस्वीर बन जाता है।

नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले में पिछले छह महीनों में सामने आए मामलों ने इसी कड़वी सच्चाई को उजागर किया है। पहले चाचा, ताऊ, मामा और अन्य रिश्तेदारों की ओर से बच्चियों के साथ बलात्कार और यौन शोषण के मामले सामने आते थे, लेकिन अब कई मामलों में मां-बाप ही आरोपी बनकर सामने आए हैं। कहीं पिता अपनी ही बेटियों के साथ बलात्कार कर रहा है, तो कहीं मां अपनी बेटी को ऐसे माहौल में छोड़ रही है, जहां वह दरिंदगी का शिकार बन रही है। यह घटनाएं केवल पुलिस रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उन मासूम आंखों का दर्द हैं, जिनमें कभी अपने घर के लिए सबसे ज्यादा भरोसा हुआ करता था।

केस 1 - जब जन्मदाता ही बन गया दरिंदा

हाल ही में डीडवाना-कुचामन जिले के एक थाने में दर्ज मामला इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला था। एक पिता ने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार किया और उसका अश्लील वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। पुलिस जांच में आरोप सही पाए गए और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

केस 2 - मां की ममता और पिता की छांव... दोनों पर सवाल

नागौर जिले में भी हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें एक मां ने अपने ही पति के खिलाफ दो नाबालिग बेटियों से दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया। आरोप है कि मां के काम पर जाने के बाद पिता मासूम बच्चियों का यौन शोषण करता था। जब मां को सच्चाई का पता चला तो उसने साहस दिखाते हुए पति के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई।

केस 3 - जब मां भी नहीं बन सकी ढाल

जून माह में सामने आए एक अन्य मामले ने समाज को एक और झटका दिया। पहली कक्षा में पढऩे वाली बच्ची के साथ उसकी मां के प्रेमी ने अश्लील हरकत की। बच्ची ने डरते हुए मां को पूरी बात बताई, लेकिन मां ने आरोपी का विरोध करने के बजाय बच्ची को रिश्तेदारों के पास छोड़ दिया। बाद में पिता की शिकायत पर पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज हुआ।

रिश्तों की दीवारें क्यों दरक रही हैं?

समाजशास्त्रियों का मानना है कि परिवारों में संवाद की कमी, नशे की प्रवृत्ति, अश्लील सामग्री तक आसान पहुंच, नैतिक मूल्यों में गिरावट और बच्चों को लेकर संवेदनशीलता का अभाव ऐसे अपराधों की पृष्ठभूमि तैयार कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश मामलों में आरोपी कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि परिचित या परिवार का सदस्य होता है। इसी वजह से बच्चे अक्सर डर, शर्म या धमकी के कारण लंबे समय तक किसी से कुछ कह नहीं पाते। कई मामलों में परिवार की बदनामी के डर से शिकायत भी दर्ज नहीं होती, जिससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है।

सिर्फ सजा नहीं, सोच बदलने की जरूरत

पॉक्सो कानून कठोर है और पुलिस भी ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई कर रही है। लेकिन कानून तब सक्रिय होता है, जब अपराध हो चुका होता है। असली जरूरत अपराध होने से पहले उसे रोकने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ की जानकारी देना, परिवारों में खुला संवाद बनाना, स्कूलों में काउंसलिंग और समाज में जागरूकता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। बच्चों को यह भरोसा भी दिया जाना चाहिए कि यदि उनके साथ कुछ गलत होता है तो वे बिना डर अपनी बात कह सकते हैं।

आखिर सवाल वही...

बेटियां आखिर किस पर भरोसा करें? जब घर की चौखट ही असुरक्षित लगने लगे, जब पिता का साया डर में बदल जाए और मां की गोद भी सुरक्षा का भरोसा न दे सके, तब यह केवल कानून का नहीं, पूरे समाज के आत्ममंथन का विषय है। रिश्तों को फिर से विश्वास, संस्कार और संवेदनाओं की डोर से जोडऩा होगा, क्योंकि हर बच्ची का सबसे पहला अधिकार सुरक्षित बचपन है। तभी घर सच मायनों में घर कहलाएगा।

विशेषज्ञ बोले

यह बेहद चिंता का विषय है कि बालिकाओं से बलात्कार और यौन शोषण के अधिकांश मामलों में आरोपी परिचित या अपने ही होते हैं। बच्चों को जागरूक बनाना, परिवारों में संवाद बढ़ाना और समाज में संवेदनशीलता विकसित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

- मनोज सोनी, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, नागौर

इसके पीछे कई कारण

नाबालिग हो या फिर बालिग, यदि किसी बच्ची या महिला के साथ परिवार के ही लोग बलात्कार या गलत हरकत करते हैं तो इसके पीछे कई कारण होते हैं। सबसे पहला कारण तो नशा है। अक्सर व्यक्ति एल्कोहल, स्मैक, एमडी जैसे नशे के कारण ऐसा करता है। दूसरा कारण, पोर्न एडिक्शन है, यदि कोई व्यक्ति लम्बे समय तक पोर्न वीडियो देखता है और उस समय घर में कोई बच्ची या महिला अकेली है तो वह उसके साथ ऐसी हरकत कर सकता है। तीसरा कारण, समाज से कटा हुआ व्यक्ति भी इस प्रकार की हरकत कर सकता है, ऐसे में परिवार के लोगों को चाहिए कि उसके असामान्य व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करें। आजकल मानसिक रोग भी बढ़ रहे, जिसमें बायपोलर डिसऑर्डर और स्किज़ोफ्रेनिया दोनों गंभीर मानसिक बीमारियां हैं। जिनके कारण व्यक्ति ऐसी हरकतें करता है।

- डॉ. राधेश्याम रोझ, मनोचिकित्सक, जेएलएन अस्पताल, नागौर

हाईकोर्ट ने कहा - अपराध सामान्य अपराधिकता से आगे निकल जाता

जनवरी 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार के दोषी पिता की आपराधिक अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा। न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने डूंगरपुर जिले के एक पॉक्सो प्रकरण में फैसला देते हुए कहा कि यौन अपराध, विशेष रूप से बच्चों के खिलाफ किए गए, ऐसे घाव देते हैं जो कृत्य की तात्कालिकता से कहीं आगे तक बने रहते हैं। जो आघात सहा जाता है, वह शारीरिक चोट तक सीमित नहीं होता। बल्कि पीडि़त के मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक कोर में गहराई तक प्रवेश कर जाता है, जिससे विश्वास, सुरक्षा और मानव गरिमा को ठेस पहुंचती है। जब अपराधी पिता हो, जो बच्चे के प्राकृतिक संरक्षक के रूप में न्यासी होता है तो अपराध सामान्य अपराधिकता से आगे निकल जाता है। एक घृणित और विकृत चरित्र ग्रहण कर लेता है। इस प्रकृति के अपराधों के लिए सबसे मजबूत न्यायिक निंदा और उनकी गंभीरता के अनुरूप निवारक सजा की आवश्यकता होती है। इस तरह की नैतिक पतनशीलता के प्रति किसी भी तरह की रियायत या गलत जगह दया न केवल न्याय प्रशासन को कमजोर करेगी, बल्कि यौन शोषण से बच्चों की सुरक्षा के संवैधानिक और वैधानिक दायित्व का गंभीर परित्याग होगा।