दिन में मॉनिटरिंग का नहीं कोई जरिया, एलएसए व ड्राइवर के भरोसे चलती एमवीयू वैन, खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग में हडक़ंप, मुख्यालय से मांगा स्पष्टीकरण
नागौर. पशुपालन विभाग की ओर से प्रदेश में संचालित की जा रही मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (एमवीयू) में एक्सपायरी डेट की दवाइयां दी जा रही हैं, जिनकी मॉनिटरिंग के लिए विभाग के पास कोई व्यवस्था नहीं है। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि जिला मुख्यालय के अधिकारी सुबह साढ़े 9 बजे सभी यूनिट के डॉक्टर, चालक व एलएसए की हाजिरी लेकर मुख्यालय को सूचना भेज देते हैं, इसके बाद कॉल आने पर फिल्ड में डॉक्टर गया या नहीं, यदि गया तो उसने पशु का उपचार किया या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग करने की कोई व्यवस्था नहीं है। दिनभर यूनिट की मॉनिटरिंग का कोई सिस्टम नहीं होने से एमवीयू वैन एलएसए व ड्राइवर के भरोसे संचालित हो रही हैं। इसी का फायदा उठाकर अनुबंधित फर्म की ओर से जमकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद पशुपालकों को समुचित इलाज नहीं मिल रहा है।
खबर छपी तो बोले अब आ जाते हैं...
गौरतलब है कि 19 मई के अंक में राजस्थान पत्रिका ने एमवीयू के फर्जीवाड़े को उजागर करते हुए ‘हवा में घूम रही ‘यूनिट’, करोड़ों का बन रहा बिल’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। खबर प्रकाशित होने के बाद इंदास के पशुपालक प्रकाश पूनिया के पास वैन के डॉक्टर ने फोन करके आने के लिए कहा, लेकिन प्रकाश ने कहा कि कल आपने मना कर दिया तो उसने निजी डॉक्टर से गाय का उपचार करवा लिया। इसके बाद प्रकाश के पास जयपुर से भी कॉल आया, जिसमें पूरी जानकारी ली गई।
डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करेंगे
सोमवार को 1962 पर कॉल करने वाले खजवाना के पशुपालक सुरेश जाखड़ को पशुपालन विभाग जयपुर से डॉ. हेमंत पंत ने मंगलवार को फोन करके पूछा कि क्या, वैन के साथ डॉक्टर नहीं था? सुरेश ने बताया कि हां, डॉक्टर नहीं आया। इस पर डॉ. पंत ने कहा कि कंफर्म करने के लिए कॉल किया था। डॉक्टर नहीं था तो गलत बात है, मैं इसकी जांच कर रहा हूं। इनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। इधर, पत्रिका में प्रकाशित समाचार को लेकर जयपुर मुख्यालय ने स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।
नहीं रुकी लापरवाही, दी एक्सपायर दवाइया
पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद एक ओर जहां विभाग में हडक़ंप मच गया। जयपुर मुख्यालय के अधिकारियों ने अधीनस्थ अधिकारियों से वस्तुस्थिति की सूचना मांगी गई। जिसके तहत संखवास के पशु चिकित्सक खजवाना पहुंचे तथा पशुपालक से जानकारी लेकर रिपोर्ट तैयार की। वहीं अनुबंधित फर्म की ओर से जिले में संचालित एमवीयू वैन के चिकित्सकों एवं स्टाफ की लापरवाही मंगलवार को भी जारी रही। इंदास निवासी पशुपालक डालाराम भादू के गाय बीमार होने पर 1962 पर कॉल किया तो वैन पहुंची, गाय को चेक करने के बाद एक्सपायर डेट की दवाइयां दे दी। वैन जाने के बाद पशुपालक ने एक्सपायर डेट देखने पर वापस कॉल किया तो थोड़ी देर बाद वैन वापस पहुंची और जहां डेट लिखी हुई थी, उसका कैंची से काटकर दूसरी टेबलेट दे दी।
डॉक्टर दूर खड़ा होकर करता रहा मोबाइल पर बातें
शिवपुरा रायधनू निवासी पशुपालक ओमप्रकाश ने गाय बीमार होने पर मंगलवार को 1962 पर कॉल किया। कॉल करने के करीब एक घंटे बाद एमवीयू वैन पहुंची। एंबुलेंस में मौजूद डॉक्टर ने पशु का सही तरीके से परीक्षण तक नहीं किया और इलाज के दौरान दूर खड़े होकर मोबाइल फोन पर बात करता रहा। पशुपालक ने बताया कि डॉक्टर ने न तो पशु को चेक किया और न ही पूरी दवाई उपलब्ध कराई। केवल पर्ची पर दवाई लिखकर दे दी। वहीं वैन में मौजूद एलएसए ने डॉक्टर से बिना पूछे ही गाय को दो इंजेक्शन लगा दिए। वैन में पूरी दवाइयों भी नहीं थी।