नागौर

गायों के नाम पर वसूली ज्यादा, अनुदान कम: सड़कों पर भटक रहा गोवंश

राज्य सरकार ने चार साल में स्टाम्प ड्यूटी पर 10 एवं शराब पर 20 प्रतिशत अधिभार के रूप में 5201.93 करोड़ वसूले, जबकि गोशालाओं को 3996.83 करोड़ का अनुदान ही दिया

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Feb 28, 2026
शहर की सड़कों पर लावारिस गोवंश का जमावड़ा

नागौर. राज्य में गो संरक्षण के नाम पर आमजन से भारी-भरकम अधिभार वसूला गया, लेकिन धरातल पर हालात यह हैं कि शहरों और गांवों की सड़कों पर लावारिस गोवंश खुलेआम घूमता नजर आ रहा है। विधायक हंसराज पटेल की ओर से विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में सामने आए आंकड़े सरकार के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच बड़ा अंतर उजागर कर रहे हैं।

सरकार ने जनवरी 2022 से दिसम्बर 2025 तक स्टाम्प ड्यूटी पर 10 प्रतिशत और शराब पर 20 प्रतिशत अधिभार गोशालाओं के नाम पर वसूला। चार साल में इस मद से कुल 5201.93 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ, लेकिन पंजीकृत गोशालाओं को इसी अवधि में मात्र 3996.83 करोड़ रुपए का ही अनुदान जारी किया गया। यानी करीब 1305 करोड़ रुपए का अंतर साफ दिखाई देता है।

सड़कों पर भटक रहा गोवंश

वर्षवार आंकड़े (राशि करोड़ रुपए में)

वर्ष - प्राप्त राजस्व - गोशालाओं को अनुदान

2022 - 1058.03 - 750.87

2023 - 1210.82 - 733.15

2024 - 1374.76 - 1232.53

2025 - 1558.32 - 1280.28

कुल - 5201.93 - 3996.83

आंकड़ों से स्पष्ट है कि पहले दो वर्षों में (कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में) राजस्व की तुलना में काफी कम अनुदान जारी किया गया। हालांकि वर्ष 2024 और 2025 में अनुदान राशि बढ़ी, लेकिन चार साल का कुल अंतर अभी भी 1300 करोड़ रुपए से अधिक है।

राज्य में 4,425 गोसंस्थाएं, 14.33 लाख गोवंश का हो रहा संधारण

राज्य के सात संभागों में कुल 4,425 गोसंस्थाएं पंजीकृत हैं, जिनमें से 3,791 वर्तमान में क्रियाशील हैं। इन संस्थाओं में कुल 14,33,327 गोवंश का संधारण किया जा रहा है। इनमें 11,67,456 बड़ागौवंश (तीन वर्ष से अधिक आयु) तथा 2,65,871 छोटा गोवंश (तीन वर्ष से कम आयु) शामिल है। जोधपुर संभाग में सर्वाधिक 5,14,872 गोवंश संरक्षित है, जबकि बीकानेर दूसरे स्थान पर है। भरतपुर संभाग में सबसे कम 24,720 गोवंश दर्ज किया गया। अजमेर संभाग में सबसे अधिक गोवंश (1,55,018) नागौर जिले में है।

1300 करोड़ से बदल सकती थी तस्वीर

पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शेष बची राशि का उपयोग सुनियोजित ढंग से किया जाता, तो लावारिस गोवंश के लिए स्थायी संधारण व्यवस्था विकसित की जा सकती थी। प्रत्येक जिले में आधुनिक गोअभयारण्य, चारा बैंक, पशु चिकित्सा सुविधाएं और आश्रय स्थलों का विस्तार संभव था। वर्तमान में नागौर सहित कई जिलों में सडक़ों पर घूमता गोवंश न केवल दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है, बल्कि किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि पहरा और तारबंदी का अतिरिक्त बोझ किसानों पर पड़ रहा है।

नंदी गोशाला योजना अधूरी

पूर्ववर्ती सरकार ने प्रत्येक पंचायत समिति स्तर पर नंदी गोशाला खोलने की घोषणा की थी। लेकिन प्रदेश में ‘पंचायत समिति नंदीशाला जनसहभागिता योजना’ के तहत अब तक केवल 70 नंदीशालाएं स्थापित की गईं, जिन पर 70.02 करोड़ रुपए आवंटित किए गए। राज्य में सैकड़ों पंचायत समितियां हैं, ऐसे में मात्र 70 नंदीशालाएं स्थापित होना घोषणा के मुकाबले बेहद कम माना जा रहा है।

जवाबदेही का सवाल

गोसंरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपए की अधिभार वसूली के बावजूद यदि गोवंश सडक़ों पर भटक रहा है तो यह नीति और क्रियान्वयन दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सरकार के पास पर्याप्त फंड होने के बावजूद नागौर जिले सहित प्रदेश की ज्यादातर गोशालाओं को अप्रेल 2025 के बाद का अनुदान जारी नहीं किया है।

- रामजीवन डांगा, अध्यक्ष, गोसेवा संघ, नागौर

Updated on:
28 Feb 2026 11:19 am
Published on:
28 Feb 2026 11:18 am
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