17 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मेधावी ओबीसी छात्राएं हक से वंचित, 30 हजार स्कूटियों में ओबीसी का ‘कोटा’ शून्य

काली बाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना : एससी, एसटी, एमबीसी, ईडब्ल्यूएस के लिए तय है अलग से कोटा, ओबीसी की छात्राओं को छोड़ा, मेधावी छात्राएं योजना के लाभ वंचित, नीति निर्माताओं की मंशा पर उठे सवाल, पिछले दस साल में कितनी बालिकाओं को बांटी स्कूटियां, ओबीसी वर्ग की कितनी छात्राएं अब तक रह चुकी वंचित

2 min read
Google source verification
स्कूटी वितरण का फाइल फोटो

स्कूटी वितरण का फाइल फोटो

नागौर. प्रदेश में छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना में ओबीसी वर्ग की छात्राओं की उपेक्षा का मामला सामने आया है। योजना के तहत हर वर्ष करीब 30 हजार स्कूटियों का वितरण किया जाता है, लेकिन ओबीसी वर्ग की छात्राओं के लिए अलग से कोई कोटा निर्धारित नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में मेधावी छात्राएं योजना के लाभ से वंचित हो रही हैं।

इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की छात्राओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है, लेकिन कोटा निर्धारण में असंतुलन के चलते ओबीसी वर्ग की छात्राओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। पत्रिका पड़ताल में पाया कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं को स्कूटी वितरण के लिए विभिन्न श्रेणियों में अलग-अलग कोटा तय किया गया है। इनमें अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), एमबीसी, अल्पसंख्यक एवं विमुक्त घुमंतू वर्ग की छात्राओं के लिए स्पष्ट संख्या निर्धारित है, वहीं मेरिट के आधार पर सभी वर्गों के लिए एक श्रेणी जरूर रखी गई है, लेकिन उसमें भी प्रतिस्पर्धा अधिक होने से ओबीसी वर्ग की छात्राओं को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

एमबीसी वर्ग को अलग से

देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना के तहत एमबीसी वर्ग को अलग से हजारों स्कूटियां दी जा रही हैं, जबकि कालीबाई भील योजना में भी अलग-अलग वर्गों को स्पष्ट लाभ मिल रहा है। ऐसे में ओबीसी वर्ग, जो राज्य की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, उसके लिए पृथक प्रावधान नहीं होना सवाल खड़े करता है।

इस मुद्दे को लेकर छात्राओं के साथ सामाजिक संगठनों में भी नाराजगी है। उनका कहना है कि जब अन्य वर्गों के लिए अलग-अलग कोटा तय है, तो ओबीसी वर्ग की छात्राओं को इससे बाहर रखना न्यायसंगत नहीं है। इससे न केवल समान अवसर की भावना प्रभावित होती है, बल्कि मेधावी छात्राओं का मनोबल कमजोर पड़ता है।

विधायक ने विधानसभा में उठाया मुद्दा

शाहपुरा विधायक मनीष यादव ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा था कि आखिर ओबीसी वर्ग की छात्राओं के लिए अलग प्रावधान क्यों नहीं किया गया। क्या यह नीति अनजाने में बनी है या इसके पीछे कोई विशेष कारण है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की योजनाओं का उद्देश्य सभी वर्गों की प्रतिभाशाली छात्राओं को समान अवसर देना होना चाहिए। यदि किसी बड़े वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है, तो योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।

केटेगरी नहीं होने से रही वंचित

मेरे 12वीं में अच्छे अंक होने के बावजूद कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना का लाभ मुझे नहीं मिल पाया। यदि एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस, एमबीसी, अल्पसंख्यक एवं विमुक्त घुमंतू वर्ग की छात्राओं के लिए स्पष्ट संख्या निर्धारित है, लेकिन ओबीसी का अलग कोटा नहीं है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

- किरण विश्नोई, छात्रा, द्वितीय वर्ष , मिर्धा कॉलेज, नागौर

उच्च स्तर पर अवगत करवाएंगे

काॅलेज स्तर मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने का उद्देध्य छात्रा शिक्षा को प्रोत्साहन देना है, इसमें सरकार का जाति के आधार पर कोई भेदभाव करने की मंशा नहीं है। यदि कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना में ओबीसी की केटेगरी नहीं है तो विभाग एवं सरकार स्तर पर बात करके समाधान करवाएंगे।

- डॉ. मंजू बाघमार, राज्य मंत्री, राजस्थान सरकार