
Nagaur. Potholes are visible on the Delhi Darwaza Bazaar road.
नागौर. यह किसी गांव की उपेक्षित गली नहीं, बल्कि शहर का सबसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र दिल्ली दरवाजा बाजार है। बस स्टैंड से मुख्य बाजार तक जाने वाले इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों लोग गुजरते हैं, लेकिन यहां की सडक़ बदहाली की ऐसी कहानी बयां कर रही है कि जिसने विकास कार्यों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। चार से छह माह पहले हुए निर्माण और मरम्मत कार्य के बावजूद सडक़ कई जगह से उखड़ चुकी है। सडक़ में हुए गड्ढों की माप कराई गई तो कई गड्ढे 12 से 15 इंच तक गहरे पाए गए। यह स्थित तब है, जबकि अब मानसून दस्तक देने वाला है, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।
पूरी सडक़ पर केवल गड्ढे ही मिलते हैं
दिल्ली दरवाजा शहर की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। सैकड़ों दुकानें और हजारों खरीदार प्रतिदिन यहां पहुंचते हैं। दिल्ली दरवाजा बाजार गांधी चौक, सदर बाजार, बस स्टैंड से मूण्डवा चौराहा को सीधा जोड़ता है। इस पर पूरे दिन ट्रेफिक रहता है। स्थिति यह है कि हर दो मीटर के दायरे में एक गड्ढा मिल जाता है। अफसोसजनक स्थिति यह है कि यहां के दुकानदारों की ओर से इस संबंध में नगरपरिषद को लिखित रूप से कई बार अवगत कराया गया। इसके बाद भी सडक़ पर गढ्ढे बने हुए हैं। सडक़ की स्थिति देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कुछ माह पहले हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता कैसी थी कि सडक़ चार माह भी नहीं टिक सकी। इससे जिम्मेदारों की करतूत का अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है। बताते हैं कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही गड्ढे पानी से भर जाते हैं। ऊपर पानी दिखाई देता है, लेकिन नीचे एक फीट से ज्यादा गहरे खड्डे छिपे रहते हैं। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। बाजार में जलभराव होने पर जाम लगना भी आम बात है। इस बार भी मानसून से पहले हालात नहीं सुधरे तो परेशानी और बढ़ सकती है।
मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही
स्थानीय बाशिंदों में विजय सिंह राठौड़, अशोक बोहरा, शंकरलाल व्यास, सलीम रंगरेज, नरेश कच्छावा, पवन भंडारी, गोपाल जांगिड़ और सुरेश प्रजापत ने कहा कि दिल्ली दरवाजा केवल बाजार नहीं, बल्कि शहर की आर्थिक धुरी है। यहां से हर दिन हजारों लोग गुजरते हैं, लेकिन सडक़, सफाई और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक संतोषजनक नहीं हैं। उनका कहना है कि सडक़ चार माह में टूट जाए और एक फीट से अधिक गहरे गड्ढे बन जाएं तो काम की गुणवत्ता और निगरानी दोनों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सडक़ पर पानी भर जाता है…..
बरसात का पानी सडक़ के गड्ढों में भर जाता है। ऊपर से सामान्य सडक़ दिखाई देती हैए लेकिन नीचे गहरे खड्डे होते हैं। कई बार वाहन चालक हादसों का शिकार होते हैं। सफाई व्यवस्था भी लगातार बिगड़ती जा रही है।
मुकेश भाटी, दुकानदार, दिल्ली दरवाजा
पूरे दिन धूल उड़ती रहती है…
सडक़ पर 12 से 15 इंच तक गहरे गड्ढे हैं। कुछ माह पहले काम हुआ थाए लेकिन सडक़ फिर टूट गई। धूल और खराब सडक़ के कारण व्यापारियों व ग्राहकों दोनों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इस रास्ते पूरे दिन धूल उड़ती रहती है।
धनराज सोलंकी, दुकानदार
Published on:
04 Jun 2026 09:28 pm
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