विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष : 10 सालों में जिले की जनसंया 5 लाख बढकऱ हो गई 38 लाख पार- चिकित्सा, शिक्षा, पानी, परिवहन के साधन एवं आधारभूत सुविधाएं आबादी की तुलना में बहुत कम बढ़ी
नागौर. जिले की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, पिछले दस सालों में हम 5 लाख से अधिक बढकऱ 38 लाख पार हो चुके हैं। इस दर से आबादी का बढऩा न तो जिले के हित में है और न देश के हित में है। जनसंख्या की यह वृद्धि प्रगति के सारे प्रयत्नों को निरर्थक व निष्फल कर रही है। जिस गति से जनसंख्या वृद्धि हो रही है, उसकी तुलना में आधारभूत सुविधाओं व संसाधनों की वृद्धि नहीं हो रही है। जनसंया के दबाव में सुविधाएं कमतर साबित हो रही हैं। चिकित्सा, शिक्षा, पानी, परिवहन के साधन, आधारभूत सुविधाएं आदि आबादी की तुलना में बहुत कम बढ़ी हैं।
जनसख्ंया पर नियंत्रण नहीं होना कई क्षेत्रों में चुनौती पैदा कर रहा है। सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक क्षेत्र में है। कॉलेज में प्रवेश का मामला हो या फिर पानी के लिए भटकते लोग हो, अस्पतालों में खाली पड़े चिकित्सकों के पदों के चलते मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगे दाम पर इलाज की मजबूरी विकास की नीति पर सवालिया निशान लगा रही है। जनसंख्या का दुष्प्रभाव पर्यावरण पर भी पड़ रहा है। भूमि, वन, पहाड़, खनिज सभी प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बढ़ रहा है। भूमिगत जल दूषित हो रहा है, प्रदूषण बढ़ रहा है। प्राकृतिक असंतुलन बढ़ रहा है। बढ़ती जनसंख्या ने परिवारों को उपलब्ध सुविधाएं, पक्के आवास, पेयजल व बिजली की आपूर्ति, सरकार के दावों को समाप्त कर दिया है। सुरक्षित पेयजल आपूर्ति अभी कोसों दूर है। वहीं बढ़ती आबादी के लिहाज से स्वास्थ्य सेवाएं कराह रही हैं। इसका ताला उदाहरण हमने कोरोना की दूसरी लहर में देखा है। ओपीडी में फिजीशियन को प्रतिदिन 100 से अधिक मरीजों को देखना पड़ रहा है।
नागौर जिले पर एक नजर
जनगणना 2011 में ये थे हम
अब हमारी स्थिति ये
इसलिए मनाते हैं विश्व जनसंख्या दिवस
11 जुलाई 1987 तक विश्व में जनसंख्या का आंकड़ा 5 अरब के पार पहुंच चुका था। तब दुनिया भर के लोगों को बढ़ती आबादी के प्रति जागरूक करने के लिए इस दिन को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ world population day के रूप में निर्धारित करने का निर्णय लिया गया था और दिसंबर 1990 में इसे आधिकारिक बनाया गया।
नसबंदी में हम प्रदेश में चौथे स्थान पर
परिवार नियोजन को लेकर की जा रही नसबंदी के मामले में हमारी स्थिति प्रदेश में काफी अच्छी है। इस वर्ष अप्रेल, मई व जून में की गई नसबंदी में नागौर चौथे नम्बर पर है। इन तीन महीनों में नागौर में 1582 नसबंदी की गई है। नागौर से ज्यादा जयपुर, अजमेर व जोधपुर में नसबंदी हुई है।
जनसंख्या नियंत्रण अतिआवश्यक
संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए परिवार नियोजन तथा जनसंख्या नियंत्रण आज अतिआवश्यक हो गया है। जन्म दर को कम कर अर्थव्यवस्था के अनुरूप लाना होगा। चिकित्सा विभाग इस दिशा में पूरा प्रयास कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले तीन महीने में कोरोना महामारी से उत्पन्न हुई विकट परिस्थितियों के बावजूद हम प्रदेश में चौथे स्थान पर हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि इस वर्ष प्रदेश में टॉप पर रहें।
- डॉ. शीशराम चौधरी, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, नागौर