नागौर

सरकारी सहायता नहीं मिलने से प्रतिभा दिखाने से वंचित है शतरंज की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी

- तुर्की में होने वाली आईसीएसडी शतरंज प्रतियोगिता के लिए पांचवें नम्बर पर हुआ है चयन - सरकारी सहायता के लिए कार्यालयों के लगा रही चक्कर- जन्म से मूक-बधिर पर शतरंज की बेहतरीन खिलाड़ी
less than 1 minute read
Feb 23, 2024
 सरकारी सहायता नहीं मिलने से प्रतिभा दिखाने से वंचित है शतरंज की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
कुचेरा. पूर्व केन्द्रीय मंत्री सी आर चौधरी को अपनी व्यथा बताती सुमन भाम्बू।

कुचेरा. नागौर जिले के क्षेत्र के ढेहरी गांव में गरीब किसान परिवार में जन्मी सुमन भाम्बू मूक-बधिर होने के बावजूद शतरंज की बेहतरीन खिलाड़ी बन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा चुकी है। इस वर्ष उसका चयन आगामी 2 से 12 मार्च तक तुर्की में आयोजित आईसीएसडी की 20वीं विंटर डीफलिम्प्स ऑल इण्डिया स्पोर्ट्स कौन्सिल फोर द डीफ ने किया है।लेकिन सरकारी सहायता के अभाव में वह अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने से वंचित हो रही है।
सुमन भाम्बू के मामा जगदीश खोखर ने बताया कि ऑल इण्डिया स्पोर्ट्स कौन्सिल ने 6 पुरुष व 6 महिला खिलाडियों का तुर्की में आयोजित होने प्रतियोगिता के लिए चयन किया है। इसमें सुमन का 5 वें नम्बर पर चयन हुआ है। विडम्बना यह है कि प्रथम तीन खिलाड़ी ही सरकारी खर्चे पर खेलने जा सकेंगे। ऐसी स्थिति में सुमन अपनी प्रतिभा दिखाने से वंचित रह जाएगी। सरकार से आर्थिक सहायता मिल सके इसके लिए वह परिजनों के साथ कार्यालयों में चक्कर काटने को मजबूर है।

खोखर ने बताया कि बेलगार्ड के सरबिया में आगामी 25 जून से 6 जुलाई तक आयोजित आईसीसीडी अंतरराष्ट्रीय व्यक्तिगत डीफ शतरंज चैम्पियनशिप के लिए भी उसे फिर से प्रयास करना पड़ेगा। शतरंज के खेल में विलक्षण प्रतिभा की धनी सुमन ने बताया कि वह तीसरी बार विंटर ओलिंपिक फोर डीफ से वंचित हो रही है। इससे पूर्व सितम्बर 2022 में भी वह विश्व शतरंज चैम्पियनशिप में भाग लेने से वंचित रह गई थी। गरीब किसान परिवार में जन्मी सुमन प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर करीब आधा दर्जन गोल्ड, सिल्वर व ब्रॉज मेडल जीतकर गांव देश का नाम रोशन कर चुकी है। हालांकि वह बोल व सुन नहीं पाती, लेकिन संकेतों में या लिखकर वह अपनी व्यथा दूसरों को बताती है।

Published on:
23 Feb 2024 05:03 pm