सालभर सोने के बाद एक बार करते हैं दिखावटी कार्रवाई, छोटे खननकर्ताओं को पकड़ कर खुद ही थपथपाते हैं अपनी पीठ
नागौर. नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले में अवैध खनन का खेल खुलेआम चल रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए जिम्मेदार खनिज विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। हालात यह हैं कि सालभर आंखें मूंदे रहने के बाद विभाग कभी-कभार एक दिखावटी कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है। इन कार्रवाइयों में भी बड़े खनन माफियाओं पर हाथ डालने की बजाय छोटे खननकर्ताओं को पकड़ कर अफसर खुद ही अपनी पीठ थपथपाते नजर आते हैं।
कुल मिलाकर नागौर जिले में अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए जिम्मेदार विभागों की इच्छाशक्ति पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। यदि समय रहते सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो जिले की प्राकृतिक संपदा यूं ही लुटती रहेगी और प्रशासन सिर्फ दिखावटी कार्रवाइयों तक सिमट कर रह जाएगा।
खींवसर में लाइम स्टोन का अवैध खनन
जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में अवैध खनन ने पर्यावरण, जल स्रोतों और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया है। खींवसर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लाइम स्टोन (चूना पत्थर) का अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। भेड़, तांतवास, भावंडा, बैरावास व ताडावास, टांकला, आकला, महेशपुरा सहित अन्य गांवों में खनन माफिया नियमों को ताक पर रखकर मगरा व गोचर भूमि को खोद रहे हैं, लेकिन खनिज विभाग की ओर से कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नजर नहीं आती।
रियां क्षेत्र में नियम विरुद्ध निकाल रहे बजरी
इसी प्रकार रियां बड़ी और पादू कलां क्षेत्र में बजरी का अवैध खनन लूणी नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ रहा है। खनन माफिया के हौसले इतने बुलंद है कि वे लीज क्षेत्र के आसपास के खेतों में खनन करने से भी नहीं चूकते। नदी के पेटे से अवैध रूप से बजरी निकालने के कारण स्वरूप बिगड़ रहा है, जिससे भविष्य में जल संकट और कटाव जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। स्थानीय लोगों की ओर से बार-बार धरने देकर कहा जा रहा है कि नियम विरुद्ध खनन किया जा रहा है, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
कुचामन में अरावली को कर रहे खोखला
कुचामन क्षेत्र में अरावली की पहाडिय़ों को खनन माफिया दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं। पहाडिय़ों को छलनी किया जा रहा है, लेकिन खनिज विभाग के अधिकारी कार्रवाई करने की बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। अरावली के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्रियों ने भले ही अरावली को नुकसान नहीं पहुंचने देने के दावे किए हैं, लेकिन धरातल पर खनन बदस्तूर जारी है। सवाल यह उठता है कि क्या यह चुप्पी महज लापरवाही है या फिर किसी तरह की मिलीभगत?
जहां शिकायत, वहां कार्रवाई नहीं
मूण्डवा क्षेत्र के कुछ गांवों में चेजा पत्थर का खनन लंबे समय से चल रहा है, जहां स्थानीय लोग अपना पेट भरने के लिए खनन करते हैं, वहीं कुछ स्थानों पर खनन माफिया ने सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया और अवैध खनन करवा रहे हैं, जिनकी शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। सबसे गंभीर स्थिति खुडख़ुड़ा कलां की है, जहां लंबे समय से अवैध खनन की शिकायतें की जा रही हैं। विभाग की ओर से साल में एकाध बार कार्रवाई कर कुछ वाहनों या मजदूरों को पकड़ लिया जाता है और फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इससे साफ है कि कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित है।
पुलिस भी कभी-कभार करती है कार्रवाई
जिले में पुलिस भी अवैध खनन के खिलाफ कभी कभार कार्रवई करके इतिश्री कर लेती है। हाल ही बू-नरावता में कुछ लोगों को गिरफ्तार करके वाहवाही लूटने का प्रयास किया, लेकिन बड़े खनन माफिया पर हाथ डालने से परहेज किया जाता है। इससे आमजन में यह संदेश जाता है कि कानून का डर सिर्फ कमजोरों के लिए है, ताकतवर माफिया बेखौफ होकर खनन कर सकते हैं।
विशेष अभियान चल रहा
जिले में अवैध खनन के खिलाफ खनिज विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन अभी पांच विभागों की ओर से संयुक्त रूप से कार्रवाई की जा रही है, जिसमें वन विभाग, राजस्व विभाग, खान विभाग, पुलिस व परिवहन विभाग की टीमें शामिल हैं।
- जयप्रकाश गोदारा, खनि अभियंता, खजिन विभाग, नागौर