
नागौर जिले की पहचान और जायके की जान 'नागौरी पान मेथी' अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग ब्रांड वैल्यू बनाने को तैयार है। लंबे समय से चल रहे प्रयासों के बाद, अब वह समय आ गया है जब इस पारंपरिक उपज को 'जीआई टैग' का कानूनी संरक्षण मिलेगा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के पत्र के अनुसार, आवेदन का मूल्यांकन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है और अब इसे औपचारिक रूप से GI जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।
भौगोलिक संकेतक (GI Tag) मुख्य रूप से एक प्रमाण पत्र है, जो यह सुनिश्चित करता है कि एक विशेष उत्पाद केवल एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र (जैसे नागौर) में ही पैदा होता है और उसके गुण अद्वितीय हैं।
नागौर जिले के हजारों किसान परिवारों के लिए यह फैसला आर्थिक क्रांति लाने वाला साबित होगा।
नागौर की जलवायु और रेतीली मिट्टी इस मेथी को वह विशिष्ट कड़वाहट और महक देती है, जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलती। इसे 'कस्तूरी मेथी' भी कहा जाता है। सूखे पत्तों के रूप में इसका उपयोग भारतीय रसोई के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों में भी किया जाता है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के पत्र के मुताबिक, मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद अब इसे 'GI जर्नल' में प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद एक निश्चित अवधि (आमतौर पर 3 से 4 महीने) के लिए सार्वजनिक आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं। यदि कोई ठोस आपत्ति नहीं आती है, तो नागौरी पान मेथी को आधिकारिक रूप से जीआई टैग का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।
यह सफलता नागौर के किसानों, कृषि विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों के उन लगातार प्रयासों का परिणाम है, जो पिछले कई वर्षों से इस मांग को लेकर दिल्ली के गलियारों में दस्तक दे रहे थे। यह राजस्थान की कृषि और विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
Updated on:
27 Feb 2026 03:36 pm
Published on:
27 Feb 2026 03:34 pm
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