नागौर

सनातन धर्म प्रधान देश में वृद्धाश्रम खुलना अफसोसजनक

Nagaur. रामद्वारा केशवदास महाराज बगीची बख्तासागर में भागवत कथा पर प्रवचन में मंहत जानकीदास ने कहा कि ने सनातन धर्म में क्रिया की नहीं, बल्कि बल्कि भाव की प्रधानता है
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Aug 05, 2021
Opening of old age home in Sanatan Dharma dominated country is regrettable
Nagaur. Sant Jankidas discourses on Bhagwat Katha at Ramdwara Keshavdas Maharaj Bagichi Bakhtasagar

नागौर. रामद्वारा केशवदास महाराज बगीची बख्तासागर में भागवत कथा पर प्रवचन में मंहत जानकीदास ने कहा कि ने सनातन धर्म में क्रिया की नहीं, बल्कि बल्कि भाव की प्रधानता है। जीवो के प्रति सद्भाव रखना चाहिए, क्योंकि हमारे शरीर की आकृतियां होने के साथ ईश्वर तत्व एक समान रूप से विराजमान है। इसीलिए सत् भाव अर्थात सभी में ईश्वर को देखना चाहिए। माता पिता के प्रति सद्भाव रखते हुए श्रद्धा के साथ सम्मान करना चाहिए। यह दुख का विषय है कि आज शहरों में वृद्धाश्रम की संख्या बढऩे लगी है। यह खुशी का विषय नहीं है, बल्कि दुख का विषय है। जबकि सनातन धर्म में माता-पिता को पृथ्वी व आकाश बड़ा माना गया है। माता-पिता की परिक्रम को पूरी धरती की परिक्रमा मानने वाले सनातन धर्म में वृद्धाश्रम का खुलने से स्पष्ट है कि अब धर्म भाव का क्षरण हुआ है। धर्म का क्षरण होने पर निश्चित रूप् से इसके दुष्परिणाम सामने आने भी शुरू हो गए हैं। ऐसे कृत्य की क्षमा किसी भी माध्यम से नहीं मिल सकती है। भौतिक उन्नति तो बहुत कर गए, परंतु हम संस्कारहीन होते चले गए। भगवान श्रीराम एवं श्रवणकुमार सरीखे उद्धरण से स्पष्ट है कि आवश्यकता होने पर माता एवं पिता के प्रति खुद को समर्पित कर देना चाहिए। यह समर्पण का भाव सदैव रहना चाहिए। इस दौरान धनराज रांकावत ,किशन जांगिड़, मदनलाल कच्छावा, सत्यनारायण सेन, दिनेश डूडी ,मेघराज राव, जगदीश चौधरी आदि मौजूद थे।

Published on:
05 Aug 2021 11:34 pm