
नागौर. स्थानीय निकाय के बाद अब सरकार ने पंचायतों के पुनर्गठन व सीमांकन के आदेश जारी कर दिए हैं। राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और सीमांकन की तैयारी कर ली है। राज्य सरकार की घोषणा के साथ ही पंचायतों में हलचल तेज हो गई है। युवा भी तैयारी में जुट गए हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश्वरसिंह ने बुधवार को एक आदेश जारी कर जिला कलक्टर को पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन / पुनर्सीमांकन व नवसृजन के प्रस्ताव तैयार करने के लिए न्यूनतम जनसंख्या 4 हजार व अधिकतम 6500 रखी जाए।
नई ग्राम पंचायतों का होगा गठन
ग्रामवासियों की मांग पर प्रशासनिक दृष्टि से ऐसे ग्रामों को वर्तमान ग्राम पंचायत से दूसरी ग्राम पंचायत में सम्मिलित किया जा सकता है लेकिन उस गांव की दूरी नई ग्राम पंचायत के मुख्यालय से 8 किमी से अधिक नहीं होनी चाहिए। राज्य के मरुस्थलीय व अनुसूचित क्षेत्रोंके लिए दूरी का निर्धारण करने के लिए जिला कलक्टर प्रशासनिक व व्यवहारिक दृष्टिकोण से स्वयं निर्णय ले सकते हैं। नवगठित या विभाजित पंचायतों में वार्डों का गठन इस प्रकार किया जाए कि प्रत्येक वार्ड की जनसंख्या यथा संभव सम्पूर्ण पंचायत सर्किल में समान रहे। हालांकि पंचायत में वार्डों की संख्या 5 ससे कम नहीं होगी। साथ ही राजस्व गांव को एक ही पंचायत में रखा जाए।
इन नियमों का रखना होगा ध्यान
पंचायत समितियों के पुनर्गठन / पुनर्सीमांकन व नवसृजन के प्रस्ताव तैयार करने के लिए 40 व उससे अधिक ग्राम पंचायतों कर संख्या से अधिक तथा दो लाख या उससे अधिक आबादी वाली पंचायत समितियों को पुनर्गठित किया जाए। लेकिन पुनर्गठित व नवसृजिज पंचायत समिति में न्यूनतम 25 ग्रााम पंचायतें रखी जाए। साथ ही जन सुविधा व प्रशासनिक दृष्टिकोण से नव सृजित व नवगठित होने वाली पंचायत समितियों में नजदीक की ग्राम पंचायतों को शामिल किया जा सकता है। लेकिन किसी ग्राम पंचायत को विभाजित कर दो पंचायत समितियों में नहीं रखा जाए।
ये रहेगा पुनर्गठन का कार्यक्रम
ग्राम पंचायतों व पंचायत समितियों के पुनर्गठन / पुनर्सीमांकन व नवसृजन के लिए जिला कलक्टर द्वारा नई ग्राम पंचायतों व समितियों के प्रस्ताव तैयार कर प्रकाशन 15 जून से 14 जुलाई तक किया जाएगा। राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 101 के तहत प्रस्तावों पर आपत्तियां 15 जुलाई से 13 अगस्त तक ली जा सकेगी। ड्राफ्ट प्रस्तावों के संबंध में आपत्तियों पर सुनवाई का कार्य 14 अगस्त से 23 अगस्त तक किया जाएगा तथा सुनवाई के बाद प्रस्ताव तैयार कर पंचायती राज विभाग को 24 अगस्त से 2 सितम्बर 2019 तक भिजवाने हैं।