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Nagaur news…कचरे के बढ़ते दबाव के बीच नागौर को मिलेगी बड़ी राहत

नागौर. शहर के निकट ही दुलाया के पास अब कचरा ट्रांजिट प्वाइंट बनेगा। यहां पर कचरा एकत्रित होने के पश्चात व्यवस्थित कर उसे बालवा रोड स्थित डम्पिंग यार्ड भेज दिया जाएगा। जहां पर कचरा का निस्तारण किया जाएगा।

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Proposed site for garbage transit point near Dulaya

Nagaur. Vacant municipal council land near Dulaya

नागौर में हर दिन निकलने वाले ठोस कचरे के संग्रहण और निस्तारण के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अब मजबूत होने जा रही है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत शहर में मैकेनाइज्ड ट्रांसफर स्टेशन (एमटीएस) स्थापित करने की स्वीकृति मिली है। इसके बनने के बाद विभिन्न वार्डों से एकत्रित कचरे को सीधे डंपिंग यार्ड ले जाने के बजाय पहले ट्रांसफर स्टेशन पर लाया जाएगा, जहां उसका संपीडन और प्रबंधन कर आगे भेजा जाएगा। इससे कचरा प्रबंधन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित हो सकेगी।

43.62 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी
24 मार्च 2026 को जारी स्वीकृति पत्र के अनुसार परियोजना पर 43.62 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें सिविल एवं इलेक्ट्रिकल कार्यों पर 15.82 करोड़ रुपए तथा मशीनरी और उपकरणों पर 27.19 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। परियोजना राजस्थान के उन चुनिंदा शहरों में शामिल है जहां आधुनिक ट्रांसफर स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं।

एक ही परिसर में जुटेंगी सभी व्यवस्थाएं

ट्रांसफर स्टेशन परिसर में बाउंड्री वॉल, आंतरिक सडक़ें, ड्रेनेज नेटवर्क और बड़ा संचालन शेड बनाया जाएगा। इसके साथ गार्ड रूम, कंट्रोल रूम, कार्यालय, डीजी सेट कक्ष, शौचालय, भूमिगत जल टैंक और लीचेट टैंक जैसी सुविधाएं भी विकसित होंगी। अभी कचरा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाएं अलग-अलग स्तर पर संचालित होती हैं, जबकि नई परियोजना में अधिकांश व्यवस्थाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।
आधुनिक मशीनों से होगा कचरे का संपीडन
परियोजना के तहत एक वेट ब्रिज, दो हुक लोडर, तीन कंटेनर और दो स्टेटिक कॉम्पेक्टर स्थापित किए जाएंगे। इन मशीनों की सहायता से कचरे को संपीडित कर बड़े कंटेनरों में संग्रहित किया जा सकेगा। वाहनों की आवाजाही और संचालन की निगरानी के लिए बूम बैरियर तथा सीसीटीवी सिस्टम भी लगाए जाएंगे।

सफाई और पर्यावरण सुरक्षा के भी प्रबंध
परिसर में वॉशिंग प्लेटफॉर्म और प्रेशर वॉशर की व्यवस्था होगी, जिससे कंटेनरों और वाहनों की नियमित सफाई की जा सकेगी। कचरे से निकलने वाले तरल अपशिष्ट के सुरक्षित प्रबंधन के लिए लीचेट टैंक बनाया जाएगा। इसके अलावा फायर प्रोटेक्शन सिस्टम, विद्युत कनेक्शन, प्लम्बिंग तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
तकनीक के सहारे होगी निगरानी
परियोजना में आईसीटी सॉफ्टवेयर, स्मार्ट सॉल्यूशन और अन्य डिजिटल व्यवस्थाओं का भी प्रावधान रखा गया है। इससे संचालन, निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। परियोजना पूरी होने के बाद नागौर को ठोस कचरा प्रबंधन का आधुनिक आधारभूत ढांचा मिलेगा।