फतेहपुर से पालनपुर तक पूरा हाइवे फाेरलेन, अजमेर-नागौर के बीच 145 किमी हिस्सा अभी तक टू-लेन। हाइवे पर वाहनों का दबाव ज्यादा होने से आए दिन हो रहे है हादसे।
नागौर. राष्ट्रीय राजमार्ग-58 का अजमेर से नागौर तक का करीब 145 किलोमीटर लंबा हिस्सा क्षमता से अधिक यातायात भार झेल रहा है। इसकी वजह से आए दिन इस हिस्से में हादसे होते है। हाइवे पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव से अब टू-लेन सड़क पर्याप्त नहीं रही। ऐसे में अजमेर से नागौर तक के हिस्से को फोरलेन बनाना जरूरी हो गया है।
फतेहपुर से शुरू होकर गुजरात के पालनपुर तक जाने वाले इस हाइवे का अजमेर से नागौर तक फोरलेन नहीं बना है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के मानकों के अनुसार टू-लेन हाइवे पर प्रतिदिन 10 हजार पीसीयू (पैसेंजर कार यूनिट) से अधिक यातायात गुजरने लगे, तब उसे फोरलेन में अपग्रेड किया जाता है। एनएच-58 का यह हिस्सा अब इस सीमा को पार कर चुका है। इसके बावजूद टू-लेन ही है। वाहनों की तेज रफ्तार और ओवर टेकिंग हादसों की वजह बन रही है। इस मार्ग पर रविवार सुबह चकढाणी-पूनास फांटा के पास वैन व बस की भीषण टक्कर का हादसा भी सड़क की खामी से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस हाइवे पर बुटाटी धाम दर्शन के लिए आने वाले यात्रियों के वाहनों का दबाव बहुत ज्यादा है। इससे पहले 14 मई की रात शुभदण्ड गांव के पास एक लग्जरी बस भी पलट गई थी। जिसमें कई यात्री घायल हुए थे। यह केवल दो दुर्घटनाएं उदाहरण मात्र हैं। इस मार्ग पर आए दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहते हैं।
हाइवे पर ज्यादातर हादसों में वाहनों की आमने-सामने की भिड़ंत सामने आ रही है। वाहन ओवरटेकिंग करते समय सड़क संकरी होने से आपस में टकरा जाते है। फोरलेन बनने के बाद विपरीत दिशा के वाहनों के लिए अलग सड़क होने पर ऐसी दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
सूत्रों के अनुसार इस मार्ग को फोरलेन बनाने को लेकर जयपुर स्तर पर कवायद जारी है। पीडब्ल्यूडी (एनएच) विभाग की ओर से प्रस्ताव एवं रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। विभाग द्वारा कई बार पत्राचार भी किया गया है। वहीं मंत्रालय स्तर पर भी इस 150 किमी हिस्से की डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है।
रेण.अजमेर-बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर चकढाणी गांव की सरहद के पास रविवार सुबह एक भीषण सड़क हादसे में कार सवार चार श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो मासूम बच्चों सहित चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कार सवार सभी लोग जोधपुर जिले के रावनियाना (बोरुंदा) के निवासी थे और प्रसिद्ध संत चतुरदास महाराज के दर्शन के लिए बुटाटी धाम जा रहे थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए।